देश छोड़कर भागी चीनी साइंटिस्ट का दावा- सरकार ने छिपाया कोरोना का सच

देश छोड़कर भागी चीनी साइंटिस्ट का दावा- सरकार ने छिपाया कोरोना का सच
ली के मुताबिक व्हिसल-ब्लोअर के साथ चीन में काफी बुरा व्यवहार होता है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

चीन की एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि देश को काफी पहले से कोरोना वायरस का पता था लेकिन इस बारे में सबको चुप (Chinese scientist claims that government covered up coronavirus information) रखा गया. इस दौरान जान का खतरा महसूस होने पर साइंटिस्ट को देश छोड़कर भागना पड़ा.

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कोरोना को लेकर चीन पर संदेह गहरा रहा है. इस बारे में लगभग सारे ही देश एकमत हैं कि चीन की बीमारी को लेकर लापरवाही के कारण दूसरे देशों को इसकी संक्रामकता का पता नहीं लगा और बीमारी पूरी दुनिया में फैल गई. बता दें कि दिसंबर में चीन के वुहान में कोरोना का आधिकारिक रूप से पहला मामला आया था. वैसे तब चीन ने WHO को बताया कि ये एक से दूसरे में नहीं फैलता है. इसी वजह से चीन से दूसरे देशों का व्यापार और टूरिज्म भी खुला रहा, जिससे इंफेक्शन फैलता चला गया. अब तक चीन के कई वैज्ञानिक आरोप लगा चुके हैं कि देश को वायरस की संक्रामकता का पहले से पता था, लेकिन उसने ये बात कहने तक नहीं दी. इसी कड़ी में चीन की एक वायरोलॉजिस्ट ने हाल ही में एक बड़ा बयान देकर तहलका मचा दिया है.

डॉ ली मेंग यान (Dr. Li-Meng Yan) नाम की ये साइंटिस्ट हांगकांग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में वायरोलॉजी और इम्युनोलॉजी की विशेषज्ञ हैं. फॉक्स न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में ली ने कई चौंकाने वाली बातें कहीं. जैसे उनका दावा है कि वे कोरोना पर रिसर्च करने वाले पहले कुछ वैज्ञानिकों में से थीं. रिसर्च में ये बात पता चल गई कि वायरस काफी संक्रामक है और तेजी से फैल सकता है. ये बात ली ने अपने वरिष्ठों को भी बताई लेकिन उन्हें चुप रहने को कहा गया. ली के मुताबिक उन्हें और बहुत से डॉक्टरों को दिसंबर में ही पता चल चुका था कि वायरस एक से दूसरे में फैलता है. जबकि WHO ने 9 जनवरी को एक स्टेटमेंट में चीनी अधिकारियों के हवाले से कहा कि वायरस कई मरीजों को गंभीर तौर पर बीमार कर सकता है लेकिन ये एक से दूसरे में नहीं फैलता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग, जहां ली काम करती थीं, उसकी वेबसाइट से भी ली का नाम हटा लिया गया




ली के मुताबिक व्हिसल-ब्लोअर के साथ चीन में काफी बुरा व्यवहार होता है. जल्दी ही वुहान में काम करने वाले डॉक्टरों ने चुप्पी साथ ली. साथ ही ली से भी चुप रहने और सावधान रहने को कहा गया. बाद में कोरोना पर सहकर्मियों से बात करने की कोशिश के कारण ली संदेह के घेरे में आने लगी. यहां तक कि उन्हें चुपके से अमेरिका भागना पड़ा. अब ली के आरोपों के बीच WHO ने इनकार किया है कि उन्होंने या चीन ने कभी भी कोरोना वायरस के खतरे को छिपाने की कोशिश की. यहां तक कि ऑर्गेनाइजेशन ने ली या उनके सुपरवाइजर तक के साथ कभी भी काम करने से इनकार कर दिया. डेली मेल के मुताबिक WHO ने एक स्टेटमेंट में कहा कि ली के सुपरवाइजर मेलिक पेरिस एक एक्सपर्ट की तरह काम करते रहे लेकिन संगठन के साथ उन्होंने कभी भी काम नहीं किया. वहीं ली ने साफ कहा कि मेलिक WHO के लैब को-ऑर्डिनेटर रहे थे. अब ली के बयानों के बाद संगठन ने उनके सुपरवाइजर का नाम जानने से भी किनारा कर लिया.
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मामला संदेहास्पद इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग, जहां ली काम करती थीं, उसकी वेबसाइट से भी ली का नाम हटा लिया गया है. यूनिवर्सिटी ने एक स्टेटमेंट में कहा कि ली अब यूनिवर्सिटी का स्टाफ नहीं हैं. इधर ली अब हांगकांग छोड़कर अमेरिका में किसी अज्ञात जगह पर रह रही हैं. अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज से बात के दौरान ली ने कहा कि उन्हें अपनी जिंदगी पर खतरा महसूस हो रहा है. चीनी सरकार दुनियाभर में उनका नाम खराब करने में जुटी है. यहां तक कि उनके परिवार पर भी खतरा है.

वुहान सेंट्रल अस्पताल में काम करने वाली डॉक्टर Ai Fen अप्रैल से लापता हैं


वैसे ली का मामला अकेला नहीं, चीन अपने वैज्ञानिकों पर चुप रहने का दबाव बनाने को लेकर पहले से ही शक के घेरे में है. माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के बारे में वुहान के डॉक्टरों को पहले ही पता चल चुका था, लेकिन उनकी आवाज दबाई गई. खासकर वुहान सेंट्रल अस्पताल में काम करने वाली डॉक्टर Ai Fen की आवाज. खोजी पत्रकारिता करने वाले शो 60 Minutes Australia के अनुसार फेन का कोई अता-पता नहीं.

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डॉ. फेन ही वो पहली शख्स मानी जा रही हैं, जिन्होंने बीमारी की गंभीरता को समझा और लोगों को सचेत करने की कोशिश की थी लेकिन सरकारी अफसरों ने उन्हें धमकी दी. बाद में चीन की People (Renwu) मैगजीन में भी उन्होंने डॉक्टर समुदाय से इस बीमारी का जिक्र किया. ये लेख अब डिलीट किया जा चुका है.

माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के बारे में वुहान के डॉक्टरों को पहले ही पता चल चुका था (Photo-pixabay)


इसी डिलीट हो चुके आर्टिकल में एक मरीज के टेस्ट रिजल्ट की भी तस्वीर थी, जिसमें इस डॉक्टर ने लाल स्याही से साफ लिखा था- "SARS coronavirus". इस डॉक्टर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को भी इंटरव्यू दिया, जिसमें साफ कहा कि चीनी सरकार को पहले ही कोरोना वायरस के बारे में बताया जा चुका था लेकिन उसने न तो खुद जानकारी दी और न ही देने दी. इस इंटरव्यू के बाद से एकाएक डॉक्टर Ai Fen की अपडेट दिखनी बंद हो गईं. उनसे किसी का भी संपर्क होना बंद हो गया.

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डॉक्टर Fen के लापता होने के कयास तब गहराए, जब हुवेई में लॉकडाउन हटने के बाद खुद चीनी प्रेसिडेंट Xi Jinping वहां गए और लोगों से काम पर लौटने की अपील की. इसके बाद भी वह काम पर नहीं दिखी हैं. उनकी आखिरी अपडेट 1 अप्रैल को आई थी, जिसमें “Happy April Fools Day” कैप्शन के साथ वह लैब कोट और मास्क पहने हुए नजर आ रही हैं. लेकिन Radio Free Asia (RFA) के अनुसार हिरासत में लिए चीनी कैदियों का अकाउंट पुलिस अधिकारी देखते हैं या बंदी से जबर्दस्ती ऐसा करवाया जाता है.
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