रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 28 दिनों में करेंगे नौ बड़े फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा 02 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं लेकिन बड़े फैसलों को लेकर उन पर रहेगी नजर

News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 4:22 PM IST
रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा 28 दिनों में करेंगे नौ बड़े फैसले
सीजेआई दीपक मिश्रा की फाइल फोटो- PTI
News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 4:22 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का कार्यकाल 02 अक्टूबर को खत्म हो रहा है. लेकिन इस बीच उनकी बैंच कम से कम दस ऐसे मामलों पर फैसला देना है, जो देश पर बहुत डालने वाले हो सकते हैं. ये वही केस हैं, जो पिछले कई सालों से सुर्खियां बनते रहे हैं. इन सभी मामलों का असर देश की आम जनता पर भी स्वाभाविक तौर पर पड़ना है. लिहाजा कहा जा सकता है कि जस्टिस मिश्रा अगले करीब 28 दिनों जिन मामलों पर अपनी बैंच के साथ फैसला लेने वाले हैं, वो सभी राष्ट्रीय महत्व के हैं और उन पर होने वाला फैसला उतने ही महत्व का साबित होने वाला है.

ये हैं वो केस जिन पर इस महीने में फैसला आना है, वो इस तरह हैं-

1. आधार - 2016 के आधार एक्ट को संवैधानिक तौर पर चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला आना है. इस एक्ट को ये चुनौती दी गई है कि यूनिक आइडेंटिटी नागरिकों की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन करती है. 38 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद आधार मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया था. निजता को मौलिक अधिकार बताने का फैसला आने के बाद अब इस बारे में फैसला आएगा कि क्या आधार के लिए लिया जाने वाला डेटा निजता का उल्लंघन है या नहीं?

2. धारा 377- सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि इंडियन पैनल कोड की धारा को खत्म किया जाना चाहिए या नहीं. ये कानून भारत में ब्रिटिश राज से जारी है, जिसमें समलैंगिक रिश्तों पर सजा का प्रावधान है.

सिंतबर में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ नौ अहम मामलों पर फैसला देगी


3. व्याभिचार- याचिकाकर्ता चाहते हैं कि आईपीसी की धारा 497 में एडल्टरी के मामलों में केवल पुरुषों को ही क्यों दंडित किया जाता है. इस कानून में लिंग समानता लाई जानी चाहिए.

4. राजनीति का अपराधीकरण - सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि आपराधिक मामलों में चार्जशीट किए जा चुके राजनीतिज्ञों को चुनाव लड़ने योग्य होना चाहिए या नहीं.
Loading...

5. सांसद-विधायक वकील बनें या नहीं - क्या एक सांसद या एक विधायक को इस स्थिति में रहते हुए अदालत में वकील के रूप में प्रैक्टिस करनी चाहिए. ये फैसला भी सुप्रीम कोर्ट को करना है.

6. अयोध्या मामला - कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ तय करेगी कि एम इस्माइल फारुकी बनाम केंद्र सरकार के मामले पर क्या एक बड़ी बैंच को फिर से सुनवाई करनी चाहिए. 1994 में पांच सदस्यीय खंडपीठ ने ये व्यवस्था दी थी कि इस्लाम में मस्जिद नमाज पढ़ने के लिए कोई अनिवार्य जगह नहीं थी इसलिए इस जगह का राष्ट्र द्वारा अधिकरण संविधान के प्रावधानों के तरह बाधित नहीं होना चाहिए. अब अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान ये मुद्दा भी सामने आएगा.

सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति मिलेगी या नहीं, इस पर भी इसी महीने आएगा फैसला


7. सबरीमाला - केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के उम्र आधारित प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका फर फैसला आना है.फिलहाल सबरीमाला में 10 साल से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है.

8. कोर्ट कार्यवाही का लाइव वेबकास्ट - कोर्ट को ये तय करना है कि क्या पायलट आधार पर मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान लाइव वेबकास्ट किया जाए या नहीं.

9. प्रोमोशन में आरक्षण - कोर्ट ये तय करेगी कि 12 साल पुराने उस मामले पर विचार किया जाए या नहीं, जो एन नागराज बनाम केंद्र सरकार दायर किया गया था.

वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक सेक्टर में नौकरियों में एसटी-एससी कर्मचारियों के प्रोमोशन के लिए कोटा बनाने के लिए शर्तें रखी थीं. प्रोमोशन में आरक्षण मामले में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 30 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले को सात जजों की संवैधानिक बेंच को रेफर किया जाए या नहीं इस मसले पर फैसला आएगा.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 4, 2018, 2:59 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...