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इस देश के मौलवी जल, जंगल, जमीन और दुनिया को बचाने के लिए जारी करवाते हैं फतवे

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Updated: March 28, 2020, 2:07 PM IST
इस देश के मौलवी जल, जंगल, जमीन और दुनिया को बचाने के लिए जारी करवाते हैं फतवे
इंडोनशिया उलेमा काउंसिल की ओर से जारी फतवों पर अमल कराना मस्जिदों और उनके मौलवियों की जिम्‍मेदारी होता है.

इंडोनेशिया (Indonesia) उलेमा काउंसिल पर्यावरण को बचाने के लिए फतवे जारी करती है. इसके बाद देश की मस्जिदों के मौलवियों को उसका प्रशिक्षण दिया जाता है. फिर ये मौलवी लोगों को जागरूक करते हैं और फतवे को अमल कराते हैं.

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  • Last Updated: March 28, 2020, 2:07 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए करीब-करीब पूरी दुनिया लॉकडाउन (Lockdown) के दौर से गुजरने के कारण घरों में कैद है. इस बीच भी कुछ लोग बाहर निकलने से बाज नहीं आ रहे हैं. लॉकडाउन के बाद कहीं मस्जिदों में इकट्ठा होकर नमाज अदा करने पहुंचे मुस्लिम समुदाय के लोगों को पुलिस खदेडते हुई नजर आ रही है तो कहीं देवी बनकर कोई महिला संक्रमण के खतरों से अनजान लोगों का मजमा लगा रही है. दुनिया के किसी कोने में चर्च का पादरी संक्रमितों की जानकारी छुपा लेता है. ये धर्म का वो रूप है जो मौजूदा हालात में पूरी मानव जाति को खतरे में डाल रहा है. वहीं, एक देश ऐसा भी है, जहां के मौलवी जल, जंगल, जमीन और दुनिया को बचाने के लिए फतवे जारी करवाते हैं. ये देश इस बात का प्रमाण है कि धर्म लोगों से सकारात्‍मक बदलाव भी करा सकता है.

दिसंबर, 2019 के बाद बदल गया धर्मसभाओं का स्‍वरूप
कोरोना वायरस से निपटने के लिए मुस्लिम बहुत इंडोनेशिया (Indonesia) के मौलवी अच्‍छा काम कर रहे हैं. दरअसल, यहां के लोगों की ज़िंदगी में धर्म सबसे ज्‍यादा अहमियत रखता है. लोग बड़ी संख्या में धार्मिक सभाओं में इकट्ठा होते हैं. दिसंबर 2019 के बाद इन धर्म सभाओं ने नया रूप ले लिया है. अब इन सभाओं में पर्यावरण की बर्बादी और उसे बचाने के उपायों पर भी चर्चा होती है. इसकी शुरुआत दलदली जमीन को लेकर हुई. सुमात्रा के दक्षिण में तानजुंग माकमूर गांव में बड़े पैमाने पर दलदली जमीन है. यहां खेती के लिए पेड़ काटे गए. बची हुई घास को जलाकर खत्‍म कर दिया गया. इससे यहां की हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड बढ गई. ऐसे में सुमात्रा के मौलवी मुस्तानजिन ने सभाओं में लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया.

अभी तक इंडोनेशिया में कोरोना वायरस को लेकर कोई फतवा तो जारी नहीं हुआ है, लेकिन मौलवी अपने स्‍तर पर लोगों को जागरूक कर रहे हैं.




मौलवी लोगों को कोरोना वायरस के खतरों से कर रहे आगाह


मुस्तानजिन ने ये काम इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल की मदद से किया. वह 2018 से इंडोनेशिया की पीटलैंड रेस्टोरेशन एजेंसी और सेंटर ऑफ इस्लामिक स्टडीज इन नेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं. वह अब तक सैकड़ों स्थानीय मौलवियों को देश में दलदली जमीन बचाने की ट्रेनिंग दे चुके हैं. ट्रेनिंग लेने के बाद ये मौलवी सुमात्रा और कालीमंतन के इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करते हैं. पर्यावरण को बचाने के लिए इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल की ओर से फतवे भी जारी किए जाते हैं. इन फतवों पर अमल कराना स्थानीय मौलवियों और मस्जिद के जिम्‍मे होता है. इसी तरह इस वक्‍त ये स्‍थानीय मौलवी लोगों को कोरोना वायरस के खतरों के प्रति आगाह कर रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पीटलैंड रेस्टोरेशन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी नाजिर फॉएद का कहना है कि हर मिशन से स्थानीय लोगों को जोड़ने में इस्लाम धर्म ने अहम भूमिका निभाई है. यहां दलदली जमीन को बचाने के लिए लोगों को समझाया गया कि इन्‍हें आग लगाकर खत्‍म करना इस्लाम के खिलाफ है. आग लगाकर सुखाई गई जगह को गीला कर पौधे लगाने को कहा गया. लोगों ने इस काम को इस्लाम की सेवा के रूप में किया.

फतवे जारी कर बनवाई जा चुकी हैं 100 इकोफ्रेंडली मस्जिदें
इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल के नेचुरल रिसोर्सेज डिविजन यूनिट के मुखिया हेयू प्राबोवो का कहना है कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण का उपदेश देने का काम 2010 से किया जा रहा है. इस संबंध में अब तक 6 फतवे जारी किए जा चुके हैं. इसमें जल संरक्षण से लेकर जानवरों का संरक्षण भी शामिल है. ऐसे ही फतवों के कारण पूरे इंडोनेशिया में अब तक करीब 100 इको-फ्रेंडली मस्जिदें बनाई जा चुकी हैं. अभी तक कोरोना वायरस को लेकर काउंसिल ने कोई फतवा तो जारी नहीं किया है, लेकिन स्‍थानीय मौलवी अपने स्‍तर पर लोगों को इस खतरे के बारे में लोगों को जानकारियां दे रहे हैं. इंडोनेशिया के सेंटर फ़ॉर इंटरनेशनल फ़ॉरेस्ट्री रिसर्च के रिसर्चर हैरी पुरनोमो का कहना है कि इस्लामिक नजरिये से लोगों को जागरूक करना अनूठा प्रयोग है.

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First published: March 28, 2020, 2:05 PM IST
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