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Climate change बदल रहा है गंगा नदी का बहाव, बाढ़ों में हो सकता है इजाफा

Climate change बदल रहा है गंगा नदी का बहाव, बाढ़ों में हो सकता है इजाफा

गंगा (Ganga) नदी के बेसन में बाढ़ के बार बार आने के खतरा बढ़ता जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

गंगा (Ganga) नदी के बेसन में बाढ़ के बार बार आने के खतरा बढ़ता जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

गंगा (Ganga) के बेसिन में अब नदियों का बहाव बदलने के साथ ही बार बार बाढ़ (Floods) के आने का खतरा पैदा हो गया है. यह अनुमान इस क्षेत्र की नदियों पर हुए अध्ययन से सामने आया है. इस अध्ययन में साफ तौर पर बताया गया है कि इसका प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के साथ ही नदियों पर हाल ही में बनाए गए बांधों जैसी मानवीय गतिविधियां भी हैं. पिछले कुछ सालों में जहां अत्यधिक बहाव की मात्रा में तेजी से इजाफा हुआ है, तो वहीं अलकनंदा और भागीरथी नदियों बांधों के क्रियाशील होने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है.

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    जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर दुनिया के मौसमों और जंगलों पर ही नहीं बल्कि नदियों पर भी हो रहा है. जहां दुनिया भर के जीव ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के चलते खुद को नए हालात में ढालने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं नदियों में बाढ़ बार बार आने की संभावना भी काफी हद तक बढ़ने लगी है.भारतीय अध्ययन में संकेत मिले हैं कि गंगा (Ganga River) के मैदान में बहने वाली नदियों में भी अब और अधिक बाढ़ देखने को मिलेगी क्योंकि मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन की वजह से इसके बहाव में ही बदलाव हो रहा है.

    किसने किया शोध
    यह नया अध्ययन भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरू और भारतीय तकनीकी संस्थान कानपुर के शोधकर्ताओं ने किया है. इसमें बताया है कि मानवीय गतिविधियों का नदी पर गंभीर प्रदूषण से लेकर उसके बहाव दिशाओं तक बहुत विनाशाकारी प्रभाव पड़ रहा है. यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

    जलवायु और मानवीय गतिविधियों दोनों
    इस अध्ययन में इस बात की विशेष पड़ताल की गई है कि कैसे जलवायु परिवर्तन और बांध बनाने वाली मानवीय गतिविधियां इस क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं. इसमें पिछले समय में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई मानवीय गतिविधियों का विश्लेषण किया गया जिसमें भागीरथी और अलकनंदा जैसे सहायक नदियों पर विशेष ध्यान दिया गया.

    किस इलाके का किया गया अध्ययन
    जहां पश्चिमी सहयाक नदी भागिरथी गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है, वहीं पूर्वी सहायक नदी अलकनंदा सतोपंथ ग्लेशियर से निकलती है.  दोनों ही नदियां देवप्रयाग में गंगा में मिल जाती हैं. शोधकर्ताओं ने गंगा के बेसिन के ऊपर के हिस्से का ऋषिकेश तक किया. भागीरथी  बेसि में चार बांध साल 2010 से काम कर रहे हैं. जबकि दो अलखनंदा बेसिन में 2015 के बाद से क्रियाशील हैं.

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    जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियां नदियों (Rivers) के बहाव को सीधे प्रभावित कर रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बार बार आएगी बाढ़
    अलखनंदा बेसिन में पानी का बहाव 1995 से 2005 में दो गुना हो गया है. इसका कारण पानी के बहाव की दर में बढोत्तरी है जिसे एक्सट्रीम फ्लो या अत्याधिक बहाव भी कहा जाता है. शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि इस अत्याधिक बहाव की दर बढ़ जाएगी और गंगा के बेसिन में बाढ़ बार बार आएगी.

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    अत्याधिक बहाव अधिक क्यों
    इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और आईआईएससी में इंटरडिसिप्लिनरी  सेंटर ऑफ वाटर के रिसर्च फेलो सोमिल वार्णकार  ने इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया, “हमने पाया कि अलकनंदा बेसिन में उच्च बढ़ता हुआ वर्षा का रुझान है जो कि भागिरथी बेसिन में नहीं हैं. इस तरह के रुझान अलकनंदा के आगे के बहाव के इलाकों में ज्यादा देखे गए हैं. इसलिए हमें इन इलाकों में भी अत्याधिक बहाव की मात्रा में इजाफा देखने को मिला है.”

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    अलकनंदा (Alaknanda River) में बने बांधों के कारण अवसाद रुकने से नदियों का बहाव बदल रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    नदियों की दिशा पर असर
    शोधकर्ताओं ने इसे आगे यह भी सुझाया है कि अलकनंदा इलाके में बांध बनाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण नदियों की गतिविधि बदलने लगी है. बांध और जलाशयों ने भी इन नदियों के द्वारा लाई जा रही अवसाद की दिशा बदल दी है, गंगा के मैदान में अवसादों के ना होने से नदियों की आकृति तक बदल गई है.

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    हिमालय के क्षेत्र भारत में जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा बुरी तरह से प्रभावित हैं. वहीं साफ पानी क इन स्रोतों में बांध और जलाशयों के बढ़ने से हिमालय के नदी बेसिन में पारिस्थितिकी प्रक्रियाएं  बुरी तरह से प्रभावित हुई  हैं. अध्ययन में बताया गया है कि टिहरी बांध की उच्च गंगा बेसिन क्षेत्र में अहम भूमिका है. एक बड़े जलाशय और बहाव नियंत्रण संरचना के कारण यह ऊपर से आने वाले अवसाद को रोक लेता है और नदी के आगे के हिस्सो में बहाव को भी नियंत्रित करता है. लेकिन नई तकनीकों इस बहाव को नियंत्रित कर नदियों की दिशाभी नियंत्रित की जा सकती है.

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