जलवायु परिवर्तन डेढ़ डिग्री तक बढ़ा देगा अंटार्कटिका प्रायद्वीप का तापमान

जलवायु परिवर्तन ( Climate Change) का सबसे ज्यादा असर अंटार्कटिका (Antarctica) प्रायद्वीप पर हुआ है इसलिए बहुत जल्दी इसका तापमान बढ़ रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

जलवायु परिवर्तन ( Climate Change) का सबसे ज्यादा असर अंटार्कटिका (Antarctica) प्रायद्वीप पर हुआ है इसलिए बहुत जल्दी इसका तापमान बढ़ रहा है (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

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  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 1:41 PM IST
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर यूं तो दुनिया भर में  देखने को मिल रहा है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित अंटार्कटिका प्रायद्वीप (Antarctica Peninsula) होता है. इसलिए हमारे वैज्ञानिक भी अंटार्कटिका में आए बदलावों को बहुत ज्यादा गंभीरता लेते हैं. एक अध्ययन के मुताबिक इस प्रायद्वीप में जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान (Temperature) साल 2044 तक आधे से डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा.

तापमान के साथ बढ़ेगा वर्षण

यह अध्ययन क्लाइमेट डायनामिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं ने सिम्यूलेशन का विश्लेषण कर पाया है कि 19 क्लाइमेट मॉडल दर्शाते हैं कि अंटार्कटिका प्रायद्वीप में तापमान में बढ़ोत्तरि तय है. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि इसी दौरान इस प्रयाद्वीप में वर्षण की मात्रा में 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि भी होने की संभावना है.

यह आ रहा है बदलाव
इस अध्ययन के प्रमुख लेखकर और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के बिर्ड पोलर क्लाइमेट सेंटर में रिसर्च प्रोफेसर डेविड ब्रोमविक बताते हैं कि उनकी टीम इस प्रायद्वीप में हो रहे बदलावों का अवलोकन कर रही है. प्रायद्वीप गर्म होता जा रहा है और नरम बर्फ की चट्टानें और ग्लेशियर पिघल कर ठोस बर्फ में बदल रहे हैं.

चिंता की बात

ब्रोमविक का कहना है, “हम इन पड़तालों से काफी चिंतित हैं. हम पूरे प्रायद्वीप में एक बड़ा बदलदाव देख रहे हैं. यह इलका गर्म होता जा रहा है. बर्फ की चट्टानें पिघलने लगी हैं. और ग्लेशियरों से पानी और बर्फ महासागरों में जाकर मिलने लगा है.” इससे पहले भी हुई कई शोध इसी बात का इशारा कर रहे हैं.



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एंटार्कटिका प्रायद्वीप (Antarctica Peninsula) पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का विशेष प्रभाव देखने को मिल रहा है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


एक बड़ा कारण

इस सब का कारण बताते हुए ब्रोमविक कहते हैं, “अंटार्कटिका प्रायद्वीप के साथ समस्या यह है कि यह संकरा है लेकिन इसकी पर्वत शृंखला ऊंची है. लेकिन बड़े मॉडल पूरे महाद्वीप को अपने अध्ययन में शामिल करते हैं और इस तथ्य को अपने शोध में शामिल नहीं करते हैं. हमारा लक्ष्य इन अनुमानों को और ज्यादा विस्तृत जानकारी देना है.”

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बर्फबारी से बारिश

शोधकर्ताओं ने पाया है कि सबसे ज्यादा तापमान वृद्धि दो डिग्री की रही है. ऐसे अंटार्कटिका के पतझड़ के मौसम में होता है, लेकिन गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान समस्या पैदा कर सकते हैं. इससे प्रायद्वीप की बर्फ को ही खतरा हो जाता है. गर्म तापमान का यह मतलब भी है कि जो पिछले बार बर्फ के रूप में वर्षण हुआ था वही इस बार बारिश के रूप में हो सकता है.

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सूरज की रोशनी तापमान वृद्धि (Temperature Change) की गति को बहुत तेजी से बढ़ा देती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


यूं और बढ़ सकता है तापमान

शोधकर्ताओं का कहना है कि साल 1950 से अंटार्कटिका के पश्चिमी हिस्से सहित प्रायद्वीप पृथ्वी के सबसे तेजी से गर्म हाने वाले इलाकों में शामिल है. यदि यहां ज्यादा बारिश होती तो यहां ऊपरी बर्फ कम होगी जो सूर्य की किरणों को प्रतिबिंबित कर वापस पहुंचाती है. इससे इस इलाके के और ज्यादा गर्म होने की संभावना होगी क्योंकि अवशोषित होने वाली रोशनी पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ा सकती है.

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अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रायद्वीप के लिए ज्यादा सटीक पूर्वानुमानों के लिए बेहतर क्लाइमेट मॉडल की जरूरत है. लेकिन अभी अगर केवल ठोस बर्फ है या फिर थोड़ी पिघलने वाली बर्फ हो तो सूर्य की रोशनी अंदर तक पहुंचेगी और साथ ही ज्यादा ऊर्जा और बर्फ पिघलाएगी. अभी तक यही देखा गया है कि यह रोशनी हथौड़े की तरह काम करती है.
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