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गरीबी- स्वच्छता से अधिक जलवायु परिवर्तन है बच्चों में कुपोषण की वजह- शोध

कुपोषण (Malnutrition) के लिए प्रमुख रूप से जलवायु परिवर्तन (Climate Chagne) को जिम्मेदार बताया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
कुपोषण (Malnutrition) के लिए प्रमुख रूप से जलवायु परिवर्तन (Climate Chagne) को जिम्मेदार बताया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की रिपोर्ट का कहना है कि दुनिया में बच्चों (Children) में कुपोषण (Malnutrition) की वजह गरीबी और स्वच्छता उतने नहीं हैं जितना की जलवायु परिवर्तन (Climate change) का असर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 7:46 PM IST
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दुनिया भर में बच्चों (Children) का कुपोषण (Malnutrition) एक बहुत ही बड़ी समस्या है. आम तौर पर माना जाता है कि किसी देश में बच्चों के कुपोषण की सबसे बड़ी वजह गरीबी (Poverty) और स्वच्छता में कमी (Poor sanitation) होती है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की एक रिपोर्ट का कहना कुछ और ही है. हाल ही में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक बच्चों में कुपोषण में जलवायु परिवर्तन (Climate change) की ज्यादा भूमिका हो सकती है. इसमें सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन प्रदूषण (Carbon pollution) है जिसकी वजह से खाद्य फसलों में पोषक तत्वों की कमी होने लगी है.

अचानक बढ़ने लगा है कुपोषण
पिछले कई दशकों से दुनिया के बच्चों में कुपोषण कम ही हुआ है. लेकिन साल 2015 पोषण में कमी बढ़ गई है. इसका एक कारण बढ़ते हुए वैश्विक तापमान और चरम मौसम हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 2019 में पांच साल से कम उम्र के 14.4 करोड़ बच्चों का विकास सतत कुपोषण के कारण प्रभावित हुआ था. इसके अलावा 4.7 करोड़ कम पोषण के भोजन के कारण शारीरिक दुर्बलता के शिकार हो रहे हैं.

कहां किया गया अध्ययन
विशेषज्ञों को लगता है कि सदी के मध्य तक मानवता को सही तरह से भोजन देने के लिए ज्यादा इलाकों में जरूरी पोषण में कमी की चुनौती का सामाना करना होगा. वर्मोन्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुआई वी एक टीम ने एशिया, अफ्रिका और दक्षिण अमेरिका की 19 कम आय वाले देशों में 5 साल से कम उम्र के एक लाख बच्चों के आहार की विविधता की पड़ताल की. इसके बाद उन्होंने इसे 30 साल के तापमान और बारिश के आंकड़ों के साथ मिलाया.



बढ़ते तापमान की भूमिका
शोध में पाया गया कि हर छह में से पांच इलाकों में आहार की गुणवत्ता में कमी का संबंध अधिक तापमान से है. एनवायर्नमेंटल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में टीम ने चेताया है कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन ने बाल विकास की प्रगति में बाधा डालने का काम किया है.

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बढ़ते प्रदूषण (Pollution) की वजह से खाद्य फसलों (Crops) में होने वाले जरूरी पोषक तत्वों में कमी आई है.


अभी से दिखने लगा है असर
शोध के प्रमुख लेखक और वर्मोंट ने न्यूट्रीशन एंड फूड सर्विसेस में एसिस्टेंट प्रोफेसर मेरेडिथ नाइल्स का कहना है कि निश्चित तौर पर भविष्य में जलवायु परिवर्तन कुपोषण को प्रभावित करेगा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह बढ़ते तापमान अभी से इसका असर दिखा रहे हैं.

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यह हो रहा है बड़ा बदलाव
इस अध्ययन में खास तौर पर आहार विविधता पर जोर दिया गया है जो आहार विविधता एवं सूक्ष्मपोषण की संयुक्त राष्ट्र की ईकाई है. सूक्ष्मपोषक तत्व जैसे लोहा, फोलिक एसिड, जिंक, विटामिन ए तथा डी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिहाज से बहुत ही जरूरी हैं. बढ़ते कार्बन प्रदूषण ने की वजह से खाद्य फसलों जिनमें गेहूं, चावल आदि शामिल हैं, इन जरूरी तत्वों के स्तर कम हो रहे हैं.

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ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण बच्चों में पोषण की कमी बढ़ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


दोहरा असर हो रहा है बच्चों पर
शोध में बताया गया है कि बढ़ते तापमान और बेतरतीब मौसम के स्वरूपों का बच्चों की आहार विविधता पर गहरा अल्पकालिक और दीर्घकालिक असर हो सकता है. बढ़ता तापमान खाद्य फसलों के उप्तादन में वैश्विक स्तर पर कमी ला सकता है. इससे मवेशियों की उप्तादकता में भी कमी आ रही है और दोनों का ही बच्चों को पोषण ग्रहण पर असर हो रहा है.

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इसके अलावा गर्भवती महिलाओं पर इनका असर हो रहा है जिससे जन्मदर में कमी, बच्चों के विकास में कमी का जोखिम भी बढ़ रहा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया की सरकारों को अब अपनी योजनाओं में आहार में बेहतरी के उपाय शामिल करने चाहिए
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