क्या है चीन की दुनिया की सबसे बड़ी कॉर्बन ट्रेडिंग योजना

चीन (China) का कहना है कि यह दुनिया की सबसे बड़ी कार्बन ट्रेडिंग योजना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Climate Change: चीन (China) ने कार्बन ट्रेडिंग योजना (Carbon Trading Scheme) का ऐलान किया है जो ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाएगी.

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    जलवायु परिवर्तन (Climate change) के दुष्प्रभावों से बचने के लिए दुनिया के बड़े देशों को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. कुछ समय पहले तक हिचक रहे अमीरे देशों पर इस बात का दबाव भी बनाया जा रहा है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं और ठोस कदम उठाएं. चीन (China) ने कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) खत्म कर करने के लिए लक्ष्य की घोषणा की थी. अब चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन ट्रेडिंग सिस्टम लॉन्च किया है जो उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा. लेकिन इस पर विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने संदेह जताया है कि इसका पर्याप्त प्रभाव होगा भी या नहीं.

    बड़े लक्ष्य के लिए प्रयास
    चीन दुनिया का सबसे  बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है जो जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं. चीन की इस योजना को उसके उस लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास बताया जा रहा है कि जिसके तहत वह साल 2060 तक अपनी अर्थव्यवस्था को कार्बन रहित कर देगा. इस स्कीम पिछले हफ्ते ही लॉन्च की गई जिसमें कार्बन उत्सर्जन की कीमत वसूली जाएगी.

    क्या होगा इस स्कीम में
    इस स्कीम के तहत प्रांतीय सरकारों को पहली बार मौका मिलेगा कि वे बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए कदम उठाएंगी. इससे कंपनियांस कम कार्बन फुटप्रिंट वाले  प्रदूषण प्रसारक अधिकार खरीदने के लिए प्रेरित होंगी. लेकिन स्कीम के पहले चरण में इसे केवल विद्युत क्षेत्र पर लागू किया जाएगा जिससे इसके दायरे में 2,262 ऊर्जा उत्पादक आ जाएंगे जो हर साल करीब 4 अरब टन का कार्बन उत्सर्जन करते हैं.  यह चीन के कुल उत्सर्जन का 30 प्रतिशत है.

    ये कंपनियां भी आएंगी दायरे में
    अधिकारियों का कहना है कि उनकी योजना अगले साल तक सीमेंट कंपनियों और कुछ एल्यूमीनियम निर्माताओं को भी शामिल करने की है. स्थानीय सरकार हर कंपनी को हर एक टन का कार्बनडाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन करने पर एक सर्टिफिकेट देती है जिसकी उन्हें इजाजत है. इसके ज्यादा उत्सर्जन करने पर कंपनियों को जुर्माना देना होता है.

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    फिलहाल कार्बन ट्रेडिंग योजना (Carbon Trading Scheme) केवल ऊर्जा उत्पादन कंपनियों पर लागू होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    बढ़ता जाएगा जुर्माना
    चीन के पर्यावरण रक्षा कोष के उपाध्यक्ष झांग जियानयू का कहना है कि कंपनियां या तो उत्सर्जन कम कर सकती हैं या फिर प्रदूषण की कीमत चुका सकती हैं. लेकिन यह कीमत समय के साथ महंगी होती जाएगी क्योंकि सरकार अब कम प्रदूषण परमिट जारी करेगी. इतना ही नहीं पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ट्रेडिंग सिस्टम में शामिल कंपनियों को उनके प्रदूषण आंकड़ों को भी सार्वजिनिक करने के साथ अपने उत्सर्जन रिकॉर्ड की ऑडिटिंग करवानी होगी.

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    योजना पर संदेह
    लेकिन पिछले महीने पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा किए गए औचक निरीक्षणों में पाया गया कि तीन में से एक कंपनी जितना बता रही हैं उससे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कर रही हैं. विश्लेषकों का यह भी कहना है कि नियमों का पालन ना करने पर जुर्माना लगाना प्रदूषण रोकने के लिए पर्याप्त नहीं  होगा.

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    फिलहाल कार्बन ट्रेडिंग योजना (Carbon Trading Scheme) केवल ऊर्जा उत्पादन कंपनियों पर लागू होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    क्यों नहीं होगी कारगरता
    विश्लेषकों का मानना कि यह योजना कारगर होगी इसमें संदेह. इसकी पहली वजह वे यह बता रहे हैं कि यह योजना व्यापक नहीं हैं इसमें उड्डयन, स्टील और फार्मास्यूटिकल्स जैसे बड़े प्रदूषणकर्ता वाले क्षेत्र शामिल नहीं हैं. इसके अलावा प्रदूषण परमिट मुफ्त में दिए जा रहे हैं जबकि उनकी नीलामी होनी चाहिए थे. माना जा रहा है कि कम कार्बन कीमते कंपनियों को ग्रीन का कार्यप्रणालियों को अपने के लिए प्रेरित नहीं करेंगी. इस योजना को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है इस पर ही सब कुछ निर्भर करेगा.

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    चीन अब नया जलवायु परिवर्तन कानून लाने जा रहा है. पर्यावरणविदों का कहना है कि यह कार्बन ट्रेडिंग सिस्टम की खामियां को दूर कर सकता है. वहीं यह उम्मीद भी की जा रही है कि वर्तमान योजना में अन्य उद्योगों को भी शामिल किया जाएगा और सख्त जुर्माना लगाया जाएगा. फिलहाल इस कानून की प्रभावोत्पादकता पर संदेह भले ही हो, लेकिन यह एक उपयोगी उपकरण जरूर साबित हो सकता है.

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