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Climate change: साल 2021 था पृथ्वी का 5वां सबसे गर्म साल

Climate change: साल 2021 था पृथ्वी का 5वां सबसे गर्म साल

पिछले कुछ सालों से पृथ्वी (Earth) ज्यादा गर्म होती रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पिछले कुछ सालों से पृथ्वी (Earth) ज्यादा गर्म होती रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यूरोपीय यूनियन (European Union) की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस का कहना है कि पृथ्वी (Earth) के रिकॉर्ड में साल 2021 का स्थानअब तक का पांचवा सबसे गर्म साल (Hottest Year ) का रहा है. लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि हमारे ग्रह को गर्म करने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसों का वायुमंडल में स्तर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है जो कम चिंता की बात नहीं है. इसके लिए फौरन कारगर कदम उठाने की आवश्यकता है.

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    जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के पुराने आंकलनों पर फिर से विचार करने की जरूरत है. नए अध्ययन नए आंकड़े के साथ किए जा रहे नए अध्ययन नए तरह के नतीजे भी ला रहे हैं जो पृथ्वी (Earth) की समस्याओं पर और ज्यादा गंभीर होने की जरूरत को बल देते दिख रहे हैं. यूरोपीय संघ (European Union) के वैज्ञानिकों ने कहा है कि साल 2021 रिकॉर्ड में अब तक का 5वां सबसे ज्यादा गर्म साल था. लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं हैं बल्कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए और भी ज्यादा सक्रिय हो जाना चाहिए.

    पिछले सात साल ज्यादा गर्म
    यूरोपीय यूनियन की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि रिकॉर्ड में पिछले सात साल दुनिया के सबसे गर्म साल थे.  1850 से रिकॉर्ड किए जा रहे तापमानों कि तुलना में ये साल एक बड़े अंतर से गर्म रहे.वहीं 1850-1900 के औसत की तुलना में साल 2021 का तापमान 1.1 से 1.2 डिग्री ज्यादा पाया गया है.

    बड़े प्रयास करने होंगे
    साल 2015 में हुए पेरिस समझौते के तहत दुनिया के देशों ने औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रोकने के लिए प्रयास करने का फैसला किया है. वैज्ञानकों का कहना है कि इससे ग्लोबल वार्मिंग का अधिकतम दुष्प्रभाव रोका जा सकेगा. लेकिन इसके लिए दुनिया को अपने उत्सर्जन को 2030 तक काफी हद तक रोकना भी होगा.

    ये नतीजे भी
    ग्रीन हाउसगैसों का उत्सर्जन बदस्तूर जारी है, इससे लंबे समय तक पृथ्वी का गर्म होने का चलन हो गया है. जलवायु परिवर्तन के कारण अब दुनिया के तमाम इलाकों में चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल रही हैं ऐसा साल 2021 में प्रमुखता से देखने को मिला. यूरोप,चीन और दक्षिण सूडान में भीषण बाढ़ देखने को मिली तो वहीं साइबेरिया और अमेरिका के जंगलों में भीषण आग.

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    ग्रीन हाउस गैसों (Greenhouse Gases) में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन का उत्सर्जन ज्यादा बढ़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    चेतावनी दे रही हैं ये घटनाएं
    सी3एस के निदेशक कार्लो बोन्टेम्पो का कहना  कि ये घटनाएं हमें चेतावनी की तरह याद दिला रही हैं कि हमें अपने तौर तरीकों में बदलाव करना होगा, संधारणीय समाज की स्थापना के लिए कुछ निर्णायक और कारगर कदम उठाने होंगे और कार्बन उत्सर्नज को कम करने के लिए प्रभावी काम करना होगा.

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    मीथेन भी पीछे नहीं
    रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे नुकादायक ग्रीन हाउस गैस मीथेन का स्तर पिछले दो सालों में तेजी से बढ़ा है. लेकिन इसे पूरी तरह से इसलिए नहीं समझा जा सका क्योंकि इसके उत्सर्जन बहुत ही व्यापक हैं जिनमें तेल और गैस के उत्पादन से लेकर कृषि और वेललैंड जैसे प्राकृतिक स्रोत सभी शामिल हैं.

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    यूरोप सहित पूरी दुनिया में इस बार ज्यादा गर्मी (Hot Summer) देखने को मिली थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    यूरोप में पहली बार
    2020 कोविड-19 महामारी की वजह से वैश्विक CO2 स्तरों में कुछ गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन 2021 में यह उत्सर्जन 4.9 प्रतिशत बढ़ गया.  पिछली गर्मियों में यूरोप भी रिकॉर्ड के हिसाब से सबसे गर्म रहा. इससे फ्रांस और हंगरी जैसे देशों में फलों की फसल खराब हो गई. जुलाई अगस्त में भूमध्यसागर की ग्रीष्मलहर ने तुर्की और ग्रीस सहित कई देशों के जंगलों को आग के हवाले कर दिया.

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    अपने अध्ययन में यूरोपीय वैज्ञानिकों ने  बताया कि सिसिल ने यूरोपीय उच्च तापमान का नया रिकॉर्ड (48.8 डिग्री सेंटीग्रेड) बनाया. जुलाई में पश्चिम यूरोप में बाढ़ की वजह से 200 से ज्यादा लोगों की जानें चली गईं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब बाढ़ आने की संभावना को 20 प्रतिशत तक और बढ़ा दिया है.

    Tags: Climate Change, Earth, Global warming, Research, Science

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