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जानिए क्या है वह सर्वोच्च तापमान जहां पर पहुंचने से गहरे खतरे में होगी पृथ्वी

शोध का मानना है कि इस तापमान (Temperature) पर पहुंचने के बाद कार्बन की मात्रा वायुमंडल (Atmosphere) में बहुत बढ़ जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शोध का मानना है कि इस तापमान (Temperature) पर पहुंचने के बाद कार्बन की मात्रा वायुमंडल (Atmosphere) में बहुत बढ़ जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जलवायु परिवर्तन (Climate change) पर हुए शोध से वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि पृथ्वी (Earth) जल्दी ही उस तापमान (Temperature) से ज्यादा गर्म (Hot) हो जाएगी जिसके बाद कार्बन आदान प्रदान (Carbon Exchange) असंतुलित हो जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2021, 5:27 PM IST
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आने वाले कुछ दशकों में तापमान (Temperature) के बढ़ने से पृथ्वी (Earth) के कई जैवतंत्र (Ecosystem) अपनी कार्बन रखने की क्षमात खो सकते हैं जिससे वे कार्बन भंडारण (Reservoir) की जगह उन स्रोतों (Sources) में बदल सकते हैं जो उसे उत्सर्जित करते हैं. इंसानों के द्वारा उत्सर्जित कार्बन का एक तिहाई पौधे जितना अवशोषित करते हैं. ताजा शोध के मुताबिक अब अगले दो दशकों में पृथ्वी की वह क्षमता घटकर आधी रह जाने वाली है और एक तापमान के बाद खास तौर से यह क्षमता कम होने लगेगी.

क्या होते हैं कार्बन सिंक
कार्बन सिंक उन चीजों को कहते हैं जो वायुमंडल से कार्बन लेकर उन कार्बन स्रोतों में डाल देते हैं जहां से वे निकलते हैं. ये प्राकृतिक और अन्य भंडारण होते हैं जो अनिश्चित या अनंत काल के लिए कार्बन पदार्थ जमाकरते हैं जिससे वायुमंडल में कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है. जंगल और महासागर इसकी सबसे अच्छी मिसाल हैं. यही कार्बन सिंक के कार्बन उत्सर्जक बनने के खतरे का सामना कर रहे हैं.

नाजुक तापमान बिंदु की पहचान
साइंस एडवांस में प्रकाशित नॉर्थ एरिजोना यूनिवर्सिटी, वुडवेल क्लाइमेट रिसर्च सेंटर, न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ वैकाटो के शोधकर्ताओं ने दो दशकों से ज्यादा के आंकड़ो के आधार पर यह आशंका जताई है. ये आंकड़े उन्होंने दुनिया के हर बायोम में मापन टावर से जुटाए हैं. टीम ने एक ऐसे नाजुक तापमान के बिंदु की पहचान की है जिसके बाद पौधों की वायुमंडल से कार्बन लेकर जमा करने की क्षमता तापमान बढ़ने के साथ घटने लगेगी. पौधों के इन सम्मिलत प्रयास को लैंड कार्बन सिंक कहा जाता है.



पौधों की क्षमता में भारी कमी होगी
पृथ्वी पर धरती के जैवमंडल में पेड़ पौधे और जमीन के सूक्ष्मजीवी कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का आदान प्रदान करते हैं. दुनिया भर में फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड हवा से खींची जाती है और जानवरों और अन्य जीवों के श्वसन से वापस वायुमंडल में आती है. पिछले कुछ दशकों तक वायुमंडल से कार्बन ज्यादा ली जा रही है जितनी की छोड़ी जा रही थी जिससे जलवायु परिवर्तन की असर कम होता था.

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मानवजनित कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) के कारण दुनिया का औसत तापमान (Average Temperature) तेजी से बढ़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह प्रक्रिया हो जाएगी बहुत धीमी
लेकिन जिस तरह से दुनिया में तापमान बढ़ता जा रहा है, ऐसा होता रहे मुश्किल है. शोधकर्ताओं ने ऐसा तापामान की पहचान की है जिसके आगे पौदो कार्बन अवशोषित करना धीमा कर देंगे और उन्हें छोड़ने की दर बढ़ा देंगे. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक कैथरिन डफी का कहना है कि इस तापमान से ज्यादा होने पर फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया में तेजी से गिरावट आ जाएगी और ऐसा दुनिया के पूरे जैवमंडल में होगा.

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इंसान की तरह सीमा
इस समस्या के बारे में डफी बताती है कि पृथ्वी का बुखार बढ़ रहा है जैसा की इंसानी शरीर में  होता है. हर बायोलॉजीकल प्रक्रिया के तापमान की सीमाएं होती है जिसके बाहर उनका काम खराब होने लगता है. शोधकर्ता पौधों के मामले में यह सीमा जानना चाहते थे.

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पेड़ पौधे (Plants) की फोटोसिंथेसिस (Photosynthesis) प्रक्रिया पर तापमान वृद्धि का सबसे खराब असर होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


खास तापमान कर्व
यह वैश्विक स्तर परपोटोसिंथेसिस की तापमान सीमा का पहला अध्ययन है. डफी बताती हैं कि हम यह तो जानते हैं कि इंसान का तापमान 37 डिग्री तक अच्छे से काम करता है ,लेकिन ऐसा हम जैवमंडल के बारे में नहीं जानते थे. टीम ने मैक्रोमॉलीक्यूलर रेट थ्योरी  (MMRT) का उपयोग कर दुनिया के हर बायोम के तापमान कर्व बनाए.

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शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर पेड़ पोधे जिन्हें C3 श्रेणी का माना जाता है उनके लिए 18 डिग्री सेल्सियस का औसत तापमान और C4 श्रेणी के पेड़ पौधों के लिए यह 28 डिग्री सेल्सियस की सीमा है. इसके बाद से फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया धीमी पड़ने लगेगी. इससे श्वसन प्रभावित तो नहीं होगा, लेकिन फोटोसिंथेसिस में असर दिखने लगेगा. औसत के तौर पर शोधकर्ताओं ने यह नाजुक तापमान 18 डिग्री सेल्सियस बताया है.
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