महासागरों को जलस्तर बढ़ने से खतरा, पर इस झील को गिरने से

कैस्पियन सागर (Caspian Sea) का सिकुड़ना (Shrinkinig) अब नियंत्रण के बाहर माना जाने लगा है. (तस्वीर: Pixabay)

कैस्पियन सागर (Caspian Sea) का सिकुड़ना (Shrinkinig) अब नियंत्रण के बाहर माना जाने लगा है. (तस्वीर: Pixabay)

जलवायु परिवर्तन (Climate change) की वजह से दुनिया भर के सागरों और महासागरों का जलस्तर (Sealevel) चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है, लेकिन इसी परिवर्तन की वजह से कैस्पियन सागर (Caspian Sea) सिकुड़ता जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 6:46 AM IST
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जलवायु परिवर्तन (Climate change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की वजह से दुनिया के महासागरों (Oceans) का जलस्तर (Sea level) बढ़ता जा रहा है. इस साल बहुत सारे ऐसे शोध हुए हैं जिन्होंने बताया है कि यह सब अब रोकना बहुत ही मुश्किल है. लेकिन दुनिया की सबसे विशाल झील में बिलकुल उल्टा हो रहा है. कैस्पियन सागर (Caspian Sea) में न केवल जलस्तर नीचे गिर रहा है बल्कि यह खतरनाक रूप से सिकुड़ती (Shrinking) भी जा रही है जिसकी वजह जलवायु परिवर्तन ही बताई जा रही है.

गर्मी और सूखे की मार

दुनिया में महासागरों के जल स्तर का बढ़ने का कारण यह है कि ग्लेशियर पिघल कर महासागरों में ताजा पानी मिला रहे हैं. वहीं गर्मी और सूखे हमारी झीलों को सुखा रहे हैं और अंतःस्थलीय  सागरों भी सूख रहे हैं, सिकुड़ रहे हैं. कैस्पियन सागर दुनिया की सबसे बड़ी झील है. ताजा शोध के मुताबिक यह अंतःस्थलीय  सागर भी सिकुड़ता जा रहा है और इसका जलस्तर भी गिर रहा है.

हालात बहुत चिंताजनक
हाल ही में कम्यूनिकेशन्स अर्थ एंड इनवायरन्मेंट प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक कैस्पियन सागर के हालात चिंताजनक होते  जा रहे हैं और इसे पर्व स्थिति में वापस लाना नामुमकिन है. वैज्ञानिक अब चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उत्सर्जन ऐसे ही जारी रहे तो इस खारे पानी की झील में पानी का जलस्तर इस सदी के अंत तक 9 से 18 मीटर नीचे तक चला जाएगा.

कितने इलाकों में होगा असर

शोधकर्ताओं के अनुसार कैस्पियन सागर में इतना ज्यादा जलस्तर के गिरने से पूरे उत्तरी केस्पियन शेल्फ और दक्षिण पूर्व  तुर्कमेनन शेल्फ के कुछ हिस्सों को वाष्पीकृत कर देगा. इसके अलावा पूर्वी इलाका पूरी तरह से सूख जाएगा. मॉडल्स बताते हैं कि बुरे से बुरे हालात में, यानि अगर जल स्तर18 मीटर तक गिर गया, इस झील का 34 प्रतिशत सतह क्षेत्र भी सिकुड़ जाएगा.



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कैस्पियन सागर (Caspian Sea) का जल स्तर इस सदी के अंत तक 18 मीटर नीचे तक गिर सकता है. (तस्वीर: Pixabay)

जानकार भी हैं इस संकट से अनजान

हैरानी  की  बात यह है कि वैज्ञानिक समुदाय का बहुत बड़ा हिस्सा इस बात से अनजान है. और लोगों को भी इसके संकट के बारे में पता नहीं है और जिन्हें पता है वे इसकी गंभीरता नहीं समझ पा रहे हैं. क्लाइमेट चेंज के इंटरनेशनल पैनल ने अपनी किसी भी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के कारण झील वाष्पीकरण पर ध्यान नहीं दिया है. यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया है.

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पूरे इकोसिस्टम को खतरा

शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया भर की झीलों का कुछ ऐसा ही हाल हो रहा है. इन हालातों को नजरअंदाज करना बहुत महंगा पड़ सकता है. इसलिए इस मुद्दे पर फौरन ध्यान देने की जरूरत है वरना यह पूरे इकोसिस्टम पर बहुत ही विपरीत असर डाल सकता है जो बहुत से पक्षियों और जीवों का घर है.


आमूलचूल बदलाव का अंदेशा

कैस्पियन सागर के 37 लाख वर्ग किलोमीटर के आकार और 1.2 प्रतिशत के खारेपन  के कारण इस झील को सागर का दर्जा दिया गया है. इसमें इतना बड़ा बदाला लाखों सालों से चला आ रहा इकोसिस्टम आमूलचूल रूप से बदल जाएगा. ग्लोबल वार्मिंग के कारण यहां आने वाले पानी में ऑक्सीजन की कमी पहले ही अपना दुष्प्रभाव दिखाने लगी है.

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झीलों में से पानी बाहर जाने की व्यवस्था नहीं होती जबतक कि उनमें पानी ज्यादा न भर जाए. इसलिए वे बढ़ते पानी के लिए बहुत संवेदनशील होती हैं. उनका जलस्तर बारिश, नदी, बहकर आने वाला पानी और वाष्पीकरण पर निर्भर होता है, कैस्पियन सागर के साथ भी यही है जो वोल्गा नदी पर निर्भर है.

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