मवेशियों के मीथेन उत्सर्जन को काबू में करेगा यह खास मास्क, जानिए कैसे

इस शोध में ऐसा मास्क (Mask) बनाया गया है जो मवेशियों (Cattle) के मीथेन उत्सर्जन (Methane emission) को कम करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

यूके (UK) के एक स्टार्टअप (Start-up) ने ऐसा खास मास्क (Mask) बनाया है जिससे मवेशियों (Cattles)से होने वाले मीथेन उत्सर्जन (Methane Emission) को आधी से ज्यादा मात्रा में नियंत्रित किया जा सकेगा.

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    दुनिया में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के लिए इंसानी गतिविधियां (Human Acitvity) ज्यादा जिम्मेदार हैं इसमें कोई शक नहीं है. इसका सबसे प्रमुख कारण तकनीक और उद्योगों पर बढ़ती निर्भरता ही है. इसमें जानवर, खास तौर पर मवेशी (Cattle) भी शामिल हैं. जहां वैज्ञानिक ग्रीन हाउस गैसों (Greenhouse Gases) के उत्सर्जन को कम करने के प्रयास कर रहे हैं, उनका एक प्रयास में ब्रिटेन के एक स्टार्टअप का बनाया खास मास्क (Mask) भी शामिल हैं जो खास तौर पर मवेशियों के लिए हैं जो उनसे होने वाले मीथेन उत्सर्जन (Methane Emission) को कम करने में सहायक होगा.

    कैसे होता है यह उत्सर्जन
    मवेशियों का मीथेन उत्सर्जन उनकी डकार और अधोवायु या पाद (Fart) से होता है. इन प्रक्रियाओं से वे  जो मीथेन निकालते हैं वह उस कार्बन डाइऑक्साइड से 84 गुना ज्यादा टॉक्सिक होती है जीवाश्म ईंधन उद्योग से निकलती है. इस लिहाज से शोधकर्ताओं ने भी मवेशियों के इस योगदान को अहम मानते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के प्रयासों में शामिल किया.

    कितना कम हो सकता है उत्सर्जन
    शून्य उत्सर्जन मवेशी परियोजना  (Zero Emission livestock Project) यानि जेल्प (Zelp) नाम के स्टार्ट अप के जरिए यह मास्क बनाया गया है. जेल्प के मुताबिक यह मास्क मवेशियों में 60 प्रतिशत तक मीथेन उत्सर्जन रोक सकता है. यह ग्रीन हाउस गैसों को रोकने के लिए किए प्रयासों में एक बड़ा कदम होगा.

    कम हुआ है इस पर शोध
    अर्जेंटीना में अपने भाई पैट्रिकों के साथ एक मवेशी फार्म व्यवसायी और इस स्टार्टअप के सह संस्थापक फ्रांसिसको नोरिस के अनुसार, “हम जानते हैं कि हर देश में मीथेन का ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे ज्यादा योगदान है. और हमने पाया कि कृषि में मीथेन उत्सर्जन को कम करने वाले उकरणों पर शोध बहुत कम हुआ है. इस क्षेत्र में बहुत अधिक नवाचार नहीं है.”

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    मवेशियों (Cattle) की डकार (Burp) के जरिए बहुत सारा मीथेन उत्सर्जन (Methane Emission) होता है.(तस्वीर: Pixabay)


    शोध इस विषय पर ज्यादा रहा
    सयुंक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FOA) के अनुसार मवेशी उद्योग की वजह से 7.1 गीगाटन की ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है. यह दुनिया भर में होने वाले कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन का 14.5 प्रतिशत है. इसे देखते हुए बहुत सारा ध्यान मवेशियों के चारा में मिलने वाली खास दवाओं पर रहा है जिससे मीथेन की डकार में कमी आ सके. इससे पाचन प्रक्रिया में बदलाव होता है और मवेशियों के पेट में ही मीथेन का निर्माण कम होता है.

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    कैसे काम करता है ये मास्क
    यह मास्क इंसान के मास्क से बहुत अलग है. यह मास्क गाय के मुंह को नहीं ढकता है. यह एक जिप टाइ प्रक्रिया से बना है और केवल गाय के नथुने के ऊपर बैठता है जिससे उसके मुंह से निकलने वाली मीथेन को यह पकड़ लेता है. मास्क में एक सेंसर होता है जो यह पता करता है कि गाय कितने प्रतिशत मीथेन निकाल रही है. मीथेन स्तर बढ़ने के साथ ही इसकी ऑक्सीकरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिससे मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड औरा पानी में बदला जाती है और मास्क दोनों को बाहर निकाल देता है.

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    यह मास्क (Mask) पहनाने के बाद मवेशियों (Cattle) के बर्ताव और उनके खान पान में कोई बदलाव नहीं दिखा. .(तस्वीर: Pixabay)


    एक फायदा यह भी
    नॉरिस का कहना है कि इससे ग्लोबल वार्मिंग की क्षमता 1,5 प्रतिशत तक कम हो जाती है. वहीं मीथेन के अलावा मास्क एक स्मार्ट डिवाइस के तौर पर भी काम करता है. इसकी जीपीएस चिप के जरिए मवेशियों की स्थितियों का आकलन किया जा सकता है जिससे उन्हें ढूंढने में आसानी होती है और यह मास्क इनके भोजन की गतिविधि और गायों में प्रजनन ग्रहणशीलता का भी पता लगा सकता है.

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    इसके साथ ही यह मवेशियों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने में भी सहायक होता है. नॉरिस बंधुओं का मानना है कि यह मास्क मवेशियों के रखरखाव का खर्चा भी कम कर सकता है. यह उपकरण शुरुआती ट्रायल्स भी पास कर चुका है. पाया गया है कि मास्क का जानवरों के बर्ताव और खानपान में कोई फर्क नहीं आया है.