Climate Change के कारण उतनी तेजी से नहीं होगी तापमान वृद्धि- ताजा शोध

Climate Change के कारण उतनी तेजी से नहीं होगी तापमान वृद्धि- ताजा शोध
पहले जितना सोचा जा रहा था उतनाी ज्यादा तापमान वृद्धि नहीं होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में अनुमान (Estimate) लगाया गया था कि कुछ सालों बाद दुनिया का तापामान (Temperature) बहुत तेजी से बढ़ेगा, लेकिन ताजा शोध के मुतबिक यह तेजी इतनी ज्यादा नहीं होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 25, 2020, 12:52 PM IST
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पिछले कई दशकों से वैज्ञानिकों के पृथ्वी (Earth) के पर्यावरण (Environment) की चिंता सता रही है. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण पृथ्वी पर तेजी से हो रहे बदलाव वाकई चिंताजनक संकेत दे रहे हैं. हाल के कुछ सालों में कई शोध और अध्ययन यह दर्शा रहे हैं कि आने वाले सालों में वैश्विक तापमान (Global Temperature)  तेजी से बढ़ेगा और मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीसहाउस गैसों (Green house gases) का उत्सर्जन अगर कम नहीं किया गया तो इंसान के लिए मुश्किलें बहुत बढ़ जाएंगी. लेकिन ताजा शोध का कहना है कि जितना अनुमान लगाया जा रहा है कि वास्तव में उतनी तेजी से वैश्विक तापमान नहीं बढ़ेगा.

कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ेगी
कनवर्सेशन की रिपोर्ट के अनुसार साल 2060 से 2080 के बीच दुनिया में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 18वीं सदी में हुई औद्योगिक क्रांति के समय के स्तर से दोगुनी हो जाएगी. हाल ही में हुए इस शोध में कहा गया है कि इसके बाद भी कुछ राहत की बात यह है कि पिछले कुछ समय से जलवायु के मॉडल्स तापमान वृद्धि का जो अनुमान लगा रहे हैं तामपान उतना ज्यादा नहीं बढ़ेगा.

क्या असर होगा इसका
फिलहाल और भविष्य में हो रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में, झुलसा देने वाली गर्मी में इजाफा, वर्षा और सूखे के स्वरूप में बदलाव, महासागरों का बढ़ता जलस्तर शामिल हैं. इन प्रभावों की भविष्य में वृद्धि की तीव्रता इस बात पर निर्भर करेगी कि तापमान में वृद्धि की मात्रा कितनी ज्यादा होती है.



कितना बढ़ेगा तापमान
वैज्ञानिक इसका अध्ययन इंक्विलिब्रियम क्लाइमेट सेंसिटिविटी यनि जलवायु संवेदनशीलता संतुलन के तौर पर करते हैं. यह इस बाद का अध्ययन करता है कि अगर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा दोगुने स्तर तक पहुचने के लिए इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो तापमान में वृद्धि किस अनुपात में होगी. अभी तक जलवायु संवेदनशीलता संतुलन का अनुमान 1.5 से 4.5 डिग्री सेल्सियस तक लगाया गया है, लेकिन ताजा शोध बताया है कि 2.6 से 3.9 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है.

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साल 2060 के बाद कार्बनडाइऑक्साइ़ड की मात्रा दोगुनी हो जाएगी. (सांकेतिक फोटो, PTI)


कम हुआ है तापमान वृद्धि का अनुमान
ताजा अध्ययन कहता है कि यह अनुमान हाल के कुछ अध्ययनों के अनुमानों के मुकाबले कम हुआ है. सभी वैज्ञानिक और उनके अध्ययन इस बात पर सहमत हैं कि मानवीय गतिविधियां ही तापमान में हो रही इस वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं. इस नुकसान को रोकने के लिए हमारे पास ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित कर उसे कम करने के अलावा कोई उपाय नहीं हैं.

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तो क्या वाकई बढ़ जाएगा तापमान
कहा तो जा सकता है कि सारा खेल अनुमानों का है, लेकिन अनुमान चाहे जो हो सभी वैज्ञानिकों में इस बात पर मतैक्य है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता रहा तो तापमान वृद्धि निश्चित है. जलवायु संवेदनशीलता संतुलन का आधार केवल यह है कि वायुमंडल में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा एक समय में दोगुनी अवश्य हो जाएगी. उस स्तर पर तापमान की स्थिति का ही इसके जरिए अनुमान लगाया जाता है.

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ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से ही तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या था सबसे पहला अनुमान
साल 1979 में एक रिपोर्ट में सबसे पहले जलवायु संवेदनशीलता संतुलन का अनुमान लगाया गया था. उस समय इसका अनुमान 1.5 डिग्री से 4.5 डिग्री के बीच का लगया गया था. इसलिए यदि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा दो गुनी हो गई तो वैश्विक तापमान इसी रेंज में बढ़ेगा.

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सारा दारोमोदार इस बात पर है कि आने वाले सालों में दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कैसा होता है. क्या दुनिया के देश अपने यहां यह उत्सर्जन रोकने के लिए कारगर कदम उठा पाते हैं या फिर विकास के नाम पर, या किसी और वजह से यह उसर्जन और ज्यादा बढ़ेगा.
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