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जलवायु परिवर्तन: 2030 तक पानी में समा सकते हैं मुंबई-कोलकाता के ये इलाके

जलवायु परिवर्तन: 2030 तक पानी में समा सकते हैं मुंबई-कोलकाता के ये इलाके

Due to Climate Change These Indian Cities Could Be Underwater:  तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया में जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है. धरती का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ऐसे में अलगे कुछ ही दशक के भीतर दुनिया के कई अहम शहर पानी में समा जाएं तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं करना चाहिए. यह भारत के लिए भी खतरे का संकेत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 9 सालों के भीतर मुंबई, कोलकाता सहित देश के कई तटीय शहरों के इलाके समंदर के टाइड लेवल के नीचे आ सकते हैं.

Due to Climate Change These Indian Cities Could Be Underwater: तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया में जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है. धरती का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ऐसे में अलगे कुछ ही दशक के भीतर दुनिया के कई अहम शहर पानी में समा जाएं तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं करना चाहिए. यह भारत के लिए भी खतरे का संकेत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 9 सालों के भीतर मुंबई, कोलकाता सहित देश के कई तटीय शहरों के इलाके समंदर के टाइड लेवल के नीचे आ सकते हैं.

Due to Climate Change These Indian Cities Could Be Underwater: तमाम कोशिशों के बावजूद दुनिया में जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है. धरती का तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ऐसे में अलगे कुछ ही दशक के भीतर दुनिया के कई अहम शहर पानी में समा जाएं तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं करना चाहिए. यह भारत के लिए भी खतरे का संकेत है. एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 9 सालों के भीतर मुंबई, कोलकाता सहित देश के कई तटीय शहरों के इलाके समंदर के टाइड लेवल के नीचे आ सकते हैं.

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    एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन पर काबू पाने के सभी मौजूदा प्रयास प्रभावी साबित होते हैं तो भी अगले कुछ दशक में दुनिया के कई अहम शहरों को पानी में समाने से नहीं रोका जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बेहतर स्थिति होने पर भी करीब तीन दशक बाद यानी 2050 के आसपास से ही वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन शून्य हो पाएगा. ऐसा तब होगा जब इस दिशा में आज से ही कटौती शुरू की जाए. अभी तक अनुमानों के मुताबिक उत्सर्जन में कटौती शुरू होने के बावजूद वैश्विक स्तर पर तापमान में 1.5 डिग्री तक की वृद्धि होगी.

    संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2040 तक तापमान में 1.5 डिग्री तक की वृद्धि होने का अनुमान है. इस कारण भारत के कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ तो कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होगी.

    मुंबई के कई इलाकों पर खतरा
    देश की वित्तीय राजधानी कहे जाने वाले शहर मुंबई के कई इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है. बीते कुछ सालों से यहां के बारिश के पैटर्न में बदलाव हुआ है और यहां भारी बारिश हो रही है. इस कारण पूरा शहर बाढ़ की चपेट में आ जा रहा है. इसमें जानमाल का भी नुकसान हो रहा है. ऐसा वैश्विक जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है.

    पश्चिम बंगाल में कहर
    मुंबई से इतर पश्चिम बंगाल का मामला है. यहां पर बीते महीनों के दौरान दो तुफान अम्फान (Amphan) और यास (Yaas) का असर देखा गया. इस कारण राज्य के सुंदरबन इलाके के दो द्वीपों- घोरमारा और मौसुनी से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. इस तुफान में इन द्वीपों को भारी नुकसान हुआ. इन द्वीपों के इलाके समंदर की चपेट में आ चुके हैं. अब जलवायु परिवर्तन ने सुंदरबन के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया है. वही सुंदरबन जिसे यूनेस्को के वर्ल्ड हैरिटेड लिस्ट में शामिल किया गया है.

    सुंदरबन को खतरा
    केंद्र सरकार की ओर से बीते साल जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बंगाल की खाड़ी के जिस इलाके में सुंदरबन स्थित है उसे जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है. समंदर के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ के कारण खतरा पैदा होगा. वर्ष 1891 से 2018 के बीच के आंकड़ों के विश्लेषण के पता चलता है कि बंगाल की खाड़ी में 41 बार भीषण चक्रवाती तूफान आ चुके हैं.

    एक गैर सरकारी संस्था क्लाइमेट सेंट्रल के एक नए अध्ययन के मुताबिक दुनिया के 50 बड़े तटीय शहरों के सिकुड़ने का खतरा है. इसी संस्था की कोस्टल रिस्क स्क्रीनिंग टूल के जरिए 2150 तक कौन-कौन से शहर समंदर समा जाएंगे, इसकी भी सूची जारी की गई है. इसमें 2030 तक महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है.

    कोस्टल रिस्क स्क्रीनिंग टूल
    कोस्टल रिस्क स्क्रीनिंग टूल एक आधुनिक उपकरण है. इससे ताजा अनुमानों के आधार पर तटीय इलाकों की मैपिंग की जाती है. इसी मैपिंग पता चलता है कि कब तटीय शहर के आसपास क्या बदलाव देखा जा सकता है. इस टूल के जरिए तैयार मैप को बारीकी से देखने पर पता चलता है कि 2030 तक देश के कई शहरों के तटीय इलाके टाइड लेवल के नीचे आ जाएंगे. इसमें मुंबई के कुछ इलाके, पूरा नवी मुंबई, सुंदरबन का तटीय इलाका, कोलाकात से लगे इलाके और ओडिशा कटक शहर के कई इलाके टाइड लेवल के नीचे आ जाएंगे. इतना ही नहीं अगर समंदर में पानी के स्तर में बढ़ोतरी नहीं रुकी तो केरल के कोच्चि और अन्य तटीय इलाके भी इसके चपेट में आ जाएंगे.

    इस मैप के अनुसार आज के करीब 100 साल बाद 2120 में स्थित बेहद खराब हो सकती है. उस वक्त तक ये इलाके पाने में समा सकते हैं.

    Tags: Climate Change, Climate change in india, Climate change report

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