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CO2 अवशोषित करने की क्षमता तेजी से खो रहे हैं उष्णकटिबंधीय वन

शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट के जरिए पृथ्वी के जंगल (Forest) वाले इलाकों का अध्ययन किया.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट के जरिए पृथ्वी के जंगल (Forest) वाले इलाकों का अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Climage Change: शोध में पाया है कि उष्णकटिबंधीय (Tropical) इलाकों में शोतोष्ण (Temperate) और उत्तरी क्षेत्रों की तुलना में चार गुना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन होता है.

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    दुनिया हमेशा से परिवर्तनशील रही है. लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Chagne) ने दुनिया को उस दिशा में धकेल दिया है जिससे दुनिया में जीवन के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया है. इन बदलावों का असर केवल इंसानों और उसके जीवन पर ही नहीं बल्कि पेड़ों पोधों (Plants) से लेकर जंगलों पर भी हुआ है. एक अध्ययन ने पता लगाया है कि उष्णकटिबंधीय वन (Tropical Forests) तेजी से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसों के अवशोषित करने की क्षमता खोते जा रहे हैं.

    हाल ही में हुए अध्ययन में पाया गया है कि पिछले दो दशकों में उष्णकटिबंधीय वनों की कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने की क्षमता तेजी से कम हुई है. नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के शोधकर्त जंगलों और वनस्पतियों में कार्बन के भंडार और स्रोत का अध्ययन कर रहे हैं. ये स्रोत कार्बन उत्सर्जित करने से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित किया करते थे. इसलिए इन्हें कार्बन सिंक कहा जाता है.

    कार्बन सिंक कैसे
    शोधकर्ता यह अध्ययन कर रहे हैं कि उस दुनिया में जहां उत्सर्जन बढ़ रहे हैं और ग्लोबल वार्मिंग आकार ले रही है, वहां पौधे कैसे कार्बन के स्रोत या सिंक की तरह काम करते हैं, वह भी जंगलों के पैमाने पर. साइंड एडवांसेस में प्रकाशित अध्ययन बताता है कि वैश्विक स्तर पर कार्बन चक्र में इतनी बड़ी अनिश्तता कैसे है.

    दो दशकों तक
    अध्ययन में पाया गया कि दो दशकों के समय के दौरान जीवित पेड़-पौधे जमीन पर 80 प्रतिशत कार्बन का स्रोत या सिंक थे, जबकि मिट्टी, पत्तों के कचरे आदि बाकी का हिस्सा थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि उष्णकटिबंधीय इलाकों में कुल उत्सर्जित और अवशोषित किया गया कार्बन, शीतोष्ण इलकों और उत्तरी इलाकों को मिलाकर होने वाले उत्सर्जन और अवशोषण से चार गुना ज्यादा था.

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    शीतोष्ण जंगल (Temperate Forests) उष्णकटिबंधीय वनों की तुलना में ज्यादा अब भी ज्यादा कार्बन अवशोषित करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    क्षमता में कमी का कारण
    शोधकर्ताओं ने उष्णकटिबंधीय वनों की कार्बन डाइऑक्साइड की अवशोषित करने की क्षमता में कमी का बड़ा कारण वनों की कटाई, आवासीय अघटन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को माना है. इस अध्ययन ने दर्शाया कि है कि दुनिया भर के जंगलों के द्वारा वायुमंडल से अवशोषित किया गया 90 प्रतिशत कार्बन वनों की कटाई और सूखे जैसे बड़े व्यवधानों के कारण पैदा हुए कार्बन की मात्रा से संतुलित होता है.

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    कार्बन के स्रोतों का नक्शा
    शोधकर्ताओं ने नासा के जियोसाइंस लेजर ऑल्टीमीटर सिस्टम (GLAS) का उपयोग किया जो IECSat पर लगा था. इसके साथ उन्होंने नासा के ही मॉडरेट रिजोल्यूशन इमेजिंग स्पैक्टोरेडियोमीटर (MODIS) को भी उपयोग कि या जो टेरा और एक्वा सैटेलाइट पर लगा था. इससे उन्होंने कार्बन के स्रोतों और सिंक का नक्शा बनाने में मदद मिली.

    कैसे कहां अशोषण और उत्सर्जन
    बदलती जलवायु के लिए प्रति जंगल और अन्य वनस्पति कैसे प्रतिक्रिया कर रहे हैं, इसकी निगरानी के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि पेड़-पौधे कहां कार्बन अवशोषित कर रहे हैं और कहां उत्सर्जित कर रहे हैं. अमेजन के जंगलों को भी पहले कार्बन सिंक के विशाल स्रोत के तौर पर देखा जाता था क्योंकि इसका विशाल  हिस्सा बहुत सारी कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है. लेकिन पाया यह गया है कि अमेजन के जंगल भी कार्बन अशोषण की तुलना में ज्यादा उत्सर्जन कर रहे हैं.

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    इस अध्ययन में सैटेलाइट आधारित कार्बन नक्शों में एक बार में 100 वर्ग किलोमीटर का इलाका शामिल किया गया. लेकिन इस में जरूरी तरह छोटे पैमाने पर हुए बदालवों को शामिल नहीं किया जा सका. शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि ज्यादा व्यवस्थित और नियमित तरीकों से इन इलाकों की निगरानी  बेहतर हो सकेगी.

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