पृथ्वी और भारत के लिए कितना मायने रखता है चीन का यह संकल्प

शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने दोनों घोषणाएं कर जलवायु परिवर्तन (Climate change) के चिंचित लोगों को हैरान कर दिया है.
शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने दोनों घोषणाएं कर जलवायु परिवर्तन (Climate change) के चिंचित लोगों को हैरान कर दिया है.

चीन (China) ने हाल ही में घोषणा की है कि वह साल 2060 तक अपना कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission)संतुलित कर लेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 8:21 PM IST
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जलवायु परिवर्तन (Climate change) के खतरे से पर्वयावरणविदों (Environmentalists) की चेतावनियां बढ़ती जा रहा है. वहीं इस समय दुनिया के बहुत सारे देश साल के अंत में होने वली संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बैठक की तैयारी कर रहे हैं.  इससे पहले ही चीन (China)ने एक अप्रत्याशित घोषणा करते हुए यह वादा किया है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर उसका उत्साह कम नहीं हुआ है. जलवायु परिवर्तन को लेकर चीन ने दो घोषणा की है जिसे पर्यावरणविदों को हैरानी हुई है.

क्या है पहली घोषणा
चीन की ओर से यह घोषणा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में की. उन्होंने कहा कि चीन साल 2060 तक कार्बन नेट जीरो हो जाएगा. नेट जीरो वह अवस्था होती है जिसमें देश के ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन उसके अवशोषित करने, कम करने की प्रक्रिया के बीच का संतुलन कायम हो जाती है.

अवशोषण बढ़ाने के तरीके
अवशोषण कार्बन सिंक जैसे की जंगल बनाने की गतिविधि बढ़ाने से बढ़ता है, तो वहीं ग्रीन हाउस गैसों को ऐसी तकनीकों से हटाया जा सकता है जिससे कार्बन कहीं एक जगह लंबे समय के समय के लिए जमा हो जाए, लेकिन यह जगह वायुमंडल खुद नहीं होना चाहिए क्योंकि यहां पहले से ही काफी कार्बन मौजूद है.



क्या है दूसरी घोषणा
चीनी राष्ट्रपति ने दूसरी घोषणा में कहा कि चीन अब अपने सर्वाधिक उत्सर्जन 2030 तक रोकने के बजाए उससे पहले ही करने का प्रयास करेगा. यानि चीन अब ग्रीनहाउस गैसों को उत्सर्जन एक स्तर से आगे नहीं बढ़ने देगा और  यह स्तर 2030 से पहले का ही समय होगा. चीनी राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि वह समय साल 2030 से कितने साल पहले का होगा.

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चीन (China) के इस कदम को दुनिया (World) में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है.. सांकेतिक फोटो (flickr)


क्या होगा इसका दुनिया पर असर
चीन की इन घोषणाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रति चिंचित होने वाले लोग सकारात्मक नजरिए देख रहे हैं. पिछले दो सालों से इस बात पर जोर देने के लिए आंदोलन चलाए जा रहे हैं बड़े पैमाने पर उत्सर्जन करने वाले देश साल 2050 तक जलवायु तटस्थता का लक्ष्य हासिल करने का खुद संकल्प लें. ऐसे में चीन की यह पहल एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखी जा रही है.

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क्या है जलवायु तटस्थता
इसे नेट जीरो उत्सर्जन की स्थिति को कहा जाता है जिसमें देशों को अपने उत्सर्जन बड़ी मात्रा में कम करने होंगे वहीं कार्बन सिंक वाली जगहों को बढ़ाना होगा जहां कार्बन हवा में न रह कर पेड़ पौधो, जीवों और अन्य पदार्थों में रहता है जिससे वायुमंडल में कार्बन की मात्रा कम होती है.

सिंक और संतुलन
जंगल एक प्रमुख सिंक माना जाता है, इसके बढ़ने से कार्बन की मात्रा में संतुलन की स्थिति बनने में मदद मिलती है. पर्याप्त सिंक होने से उत्सर्जित कार्बन को अवशोषण हो जाता है. फिलहाल उत्सर्जन और अवशोषण में असंतुलन बहुत गहरा है. वैज्ञानकों का दावा कि अगर यह संतुलन कायम नहीं किया गया तो साल 2050 तक दुनिया का तापमान पूर्व औद्योगिक काल के समय की तुलना में 2 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक हो जाएगा.

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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे अधिक प्रभाव ध्रुवो पर पड़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या है चीन की घोषणा की अहमियत
चीन दुनिया का सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाला देश है. उसके बाद अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और भारत तीन सबसे अधिक उत्सर्जन करने वाले देश हैं. पर्यावरणविद चीन की ओर से इस दिशा में संकल्प को एक बहुत ही अहम और सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इसे वे एक प्रमुख देश की पर्वयावरण सुधार के लिए सक्रिय होना मानते हैं. दुनिया के लिये अच्छा संकेत मान रहे हैं.

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चीन की कोशिश इस घोषणा से दुनिया के निगाहों में पर्यावरण की चिंता करने वाला देश बनने की है. इसके साथ ही इससे भारत पर एक तरह का दबाव बढ़ेगा कि वह भी अपने लक्ष्यों की घोषणा करे. वहीं भारत के अपने लक्ष्य हैं जिस पर वह काम कर रहा है. भारत इस बात पर जोर दे रहा है कि इस मामले में विकसित देशों की जिम्मेदारी अधिक है.  फिर भी लोगों को साल के अंत में होने वाली बैठक होने तक काफी उम्मीदें हैं.
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