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क्या है कोयले का विकल्प; किन-किन स्रोतों से बिजली पैदा करता है भारत?

कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की वजह से देश में बिजली संकट पैदा होने के आसार बन गए हैं,

कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की वजह से देश में बिजली संकट पैदा होने के आसार बन गए हैं,

Coal Shortage In India, power crisis in india 2021: देश संभावित बिजली संकट की वजह से कोयला आधारित ताप बिजली उत्पादन क्षमता को लेकर बहस छिड़ी हुई है. सवाल किए जा रहे हैं कि अगर कोयले की सप्लाई की यही स्थिति रहती है तो क्या भारत के सामने इससे उबरने के लिए कोई रास्ता है.

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    Coal Shortage In India: देश संभावित बिजली संकट की वजह से कोयला आधारित ताप बिजली उत्पादन क्षमता को लेकर बहस छिड़ी हुई है. सवाल किए जा रहे हैं कि अगर कोयले की सप्लाई की यही स्थिति रहती है तो क्या भारत के सामने इससे उबरने के लिए कोई रास्ता है. दरअसल, आज देश में जो ऊर्जा संकट की स्थिति बनती दिख रही है वो कोई एक दिन की स्थिति नहीं बल्कि इसके दीर्घकालिक असर होने वाले हैं.

    आखिर क्यों है संकट
    यह बात सभी को पता है कि थर्मल पावर प्लांट्स को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण देश में बिजली संकट पैदा होता दिख रहा है. दूसरी तरफ कोरोना काल में बंद पड़े उद्योगों में फिर से पूरी क्षमता के साथ काम शुरू हो गया है इसलिए बिजली की मांग में भारी वृद्धि हुई. ऐसे में मांग और सप्लाई के बीच यह का अंतर बिजली संकट पैदा कर रहा है.

    क्यों नहीं हो रही कोयले की आपूर्ति
    भारत में कोयले का विशाल भंडार होने के बावजूद यह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेश के कोयले का आयात करता है. ऐसा इसलिए भारत में कोयला खनन के काम में लगी कंपनियां जरूरत को पूरा करने के लिए खनन नहीं कर पाती है. दूसरी तरफ, दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडार वाला देश चीन भी परेशान है. वहां के भी खदानों में पर्याप्त मात्रा में कोलये का खनन नहीं हो रहा है. दरअसल, चीन ने अपने बड़े खदानों की सुरक्षा ऑडिट करवा रहा है. पिछले दिनों खदानों में हुई दर्घटना को देखते हुए ऐसा करवाया जा रहा है. इससे वहां उत्पादन घटा है.

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में चार गुना तक बढ़े दाम
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की आपूर्ति कम हो गई है. इंडोनेशिया और कई अन्य देशों में भारी बारिश की वजह से वहां उत्पादन प्रभावित हुआ है. दूसरी तरफ चीन अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोयला खरीदने को उतारू है. इस कारण बीते कुछ महीनों में कोयले के दाम में चार गुना तक की वृद्धि हुई है.

    भारत में कोयले की जरूरत
    आप कोलये की जरूरत को इसी से समझ सकते हैं कि भारत अपनी कुल बिजली जरूरत में से आधे से अधिक का उत्पादन कोयले से करता है. भारत सरकार के बिजली मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कोयले से 52.6 फीसदी बिजली का उत्पादन किया जाता है.

    इसके अलावा इग्नाइट से 1.7 फीसदी, गैस से 6.5 फीसदी और डीजल से 0.1 फीसदी बिजली का उत्पादन किया जाता है. ये सभी जीवाश्म ईंधन के तहत आते हैं. इसके 12 फीसदी बिजली का उत्पादन पनबिजली संयंत्रों से और 25 फीसदी बिजली का उत्पादन पवन, सोलर और अन्य रिन्यूएबल स्रोतों से किया जाता है. देश में अब भी केवल 1.7 फीसदी परमाणु बिजली का उत्पादन किया जाता है.

    कोयले का विकल्प
    देश की आर्थिक विकास की दर और तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के पास अब भी कोयले का कोई पुख्ता विकल्प नहीं है. भारत ही नहीं बल्कि चीन का भी यही हाल है. चीन में भी ऊर्जा की मांग बेहद तेजी से बढ़ रही है और वह भी अपनी आधी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से कोयले पर निर्भर है.

    भारत में ऊर्जा उत्पादन के अन्य विकल्पों पर काम हो रहा है और उसमें तेजी से वृद्धि भी हो रही है लेकिन भविष्य की मांग और लागत को देखते हुए कोयले पर निर्भरता जरूरी है. दरअसल, कोलये के अलावा ऊर्जा उत्पादन के तमाम अन्य स्रोत काफी महंगे हैं. ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था महंगी ऊर्जा के इस बोझ को ढोने में सक्षम नहीं है.

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