जब चीन में लाखों कॉक्रोचों ने शहर पर एक साथ बोल दिया था हमला

जब चीन में लाखों कॉक्रोचों ने शहर पर एक साथ बोल दिया था हमला
चीन जंगली जानवरों को खाने के लिए तो कुख्यात रहा ही है, यहां पर जानवरों और कीड़े-मकोड़ों से दवाएं भी बनाई जाती हैं

कुछ समय पहले चीन के डाफेंग शहर की नर्सरी से 10 लाख से ज्यादा कॉक्रोच (more than ten million cockroaches escaped from china nursery in Dafeng) निकल भागे थे. तब स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और घरों के खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने की अपील की थी.

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चीन जंगली जानवरों को खाने के लिए तो कुख्यात रहा ही है, यहां पर जानवरों और कीड़े-मकोड़ों से दवाएं भी बनाई जाती हैं. ये दवाएं ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन (traditional Chinese medicine) के तहत आती हैं, जिनकी चीन में काफी मांग है. कॉक्रोच से भी यहां कई तरह की दवाएं (medicine from roaches) बनती हैं. इसके लिए वहां अरबों-खबरों की तादात में इनका पालन होता है. दवा निर्माता कंपनियां इसके एक किलोग्राम के बदले लगभग 6800 रुपए देती हैं. यही वजह है कि भारी संख्या में कॉक्रोच पालन के लिए नर्सरियां बनाई गई हैं. ऐसी ही एक नर्सरी से 10 लाख कॉक्रोच निकलकर शहरी आबादी की ओर चले गए थे.

यहां के डाफेंग शहर में 10 लाख से कुछ ज्यादा कॉक्रोचों का पालन हो रहा था. तभी एकाएक किसी वजह से नर्सरी का वो हिस्सा टूट गया, जहां कीड़े थे और वे निकल भागे. डिस्कवरी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार फार्म के मालिक Wang Pengsheng की नर्सरी में 102 किलोग्राम कॉक्रोचों ने अंडे दिए थे जो लालन-पालन के बाद बेचने लायक परिपक्व हो चुके थे. इसी दौरान ये घटना घटी. इससे नर्सरी के मालिक का तो नुकसान हुआ ही हुआ लेकिन इससे पास बसी आबादी भी खतरे में आ गई. बता दें कि कॉक्रोच के कारण कई किस्म की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

कॉक्रोच से भी यहां कई तरह की दवाएं बनती हैं (Photo-pixabay)




यही वजह है कि आनन-फानन स्थानीय प्रशासन ने घोषणा कराई कि लोग पैनिक न हों और अपने घरों के भीतर ही रहें. इस दौरान संक्रमण रोकने के लिए अभियान चला. हालांकि ये एक लंबी प्रक्रिया थी. इस दौरान छानबीन और फिर योजना बनाने के लिए Jiangsu Board of Health के पांच अफसर भेजे गए और लगभग 20 दिनों तक संक्रमण रोकने के लिए काम चलता रहा. काफी मुश्किल से निकले भागे कॉक्रोचों को मारा गया. इसके बाद इन्हें पैदा करने काम फिर चल निकला.
चीन में हर साल 6 बिलियन से ज्यादा कॉक्रोचों की खेती होती है. इनका उपयोग ट्रेडिशनल दवाएं बनाने में होता है. दक्षिणपूर्वी चीन के शिचांग शहर में भी काफी सारे फार्म इन्हीं की पैदावार के लिए हैं. ये किसी जेल की तरह सील्ड हैं और इनमें दिन में भी रात जैसा अंधेरा होता है.

जहां उन्हें पाला जा रहा है, उस लैब का नजारा किसी साइंस-फिक्शन की तरह का होता है. उन्हें पालने के लिए पूरी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है. लकड़ी के बोर्ड उनका घर हैं और कमरों में हल्की नमी और गर्मी है, यानी वही माहौल क्रिएट किया गया है जो कॉकरोच को पसंद है. यहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए भीतरी वातावरण को कंट्रोल किया जाता है. एक-एक फार्मर इसपर करोड़ों रुपए खर्च करता है. इसका मकसद कम से कम वक्त में ज्यादा कॉकरोच पैदा करना है.

दवा निर्माता कंपनियां इसके एक किलोग्राम के बदले लगभग 6800 रुपए देती हैं


कॉकरोच की जिंदगी लगभग छह महीने की होती है. जब वे यह वक्त पूरा करने वाले होते हैं तो उन्हें साफ किया जाता है, सुखाया जाता है और फिर परिपक्व होने के बाद इनसे एक खास तरह का द्रव्य बनाया जाता है. इस द्रव्य को चीन की एक बड़ी आबादी पीती है, खासकर बड़ी उम्र के लोग जो श्वसन तंत्र की समस्या या पेट की किसी बीमारी से जूझ रहे हों. चीन सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार 100 मिलीलीटर की एक बोतल की कीमत लगभग 285 रुपए होती है. ये भी माना जा रहा है कि कॉकरोच को दवा की तरह पीने वाले बहुत से लोग ये भी जानते होंगे कि वे दरअसल क्या पी रहे हैं. जो कंपनी इसकी दवा बना रही है, वो इनग्रेडिएंट्स में कॉकरोच का साइंटिफिक नाम लिखती है. यानी बोतल पर लिखा होता है Periplaneta americana, जो कि कॉकरोच की एक प्रजाति का नाम है. यानी चीन की वो आबादी जो शाकाहार को मानती होगी, वो उसे इस जूस के नाम पर अंधेरे में रखा गया है.

इनसे पेट की बीमारियों जैसे पेप्टिक अल्सर और दांतों की बीमारियों का भी इलाज होता है. यहां तक कि पेट के कैंसर के मरीज भी कॉकरोच खा सकते हैं. ये फायदा ही करता है. कॉकरोच पर लगातार शोध किए जा रहे हैं ताकि ब्यूटी इंडस्ट्री में भी उनका इस्तेमाल देखा जा सके. डाइट-पिल्स और ब्यूटी मास्क पर लगातार प्रयोग हो रहे हैं.

इस शहर में भारी संख्या में कॉक्रोच पालन के लिए नर्सरियां बनाई गई हैं (Photo-pixabay)


वैसे वेस्ट मैनेजमेंट में भी कॉक्रोच का उपयोग हो रहा है. अकेले बीजिंग में रोज लगभग 25 हजार टन खाना बर्बाद होता है, जिसका वेस्ट मैनेजमेंट एक टेढ़ी खीर है. इसके लिए चीन बड़े पैमाने पर कॉकरोच का उत्पादन कर रहा है, जो इस खाने को चट करेंगे. खा-पी चुके कॉक्रोचों का बाद में मारकर दवा भी तैयार कर ली जाएगी. इस तरह से एक साथ दो काम हो रहे हैं. इनसे वेस्ट मैनेजमेंट की खास प्रक्रिया है. रोज दिन शुरू होने से पहले ही शहरभर का बचा-खुचा खाना शानडोंग क्योबिन एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी कॉ के प्लांट में आ जाता है. यहां पर कॉकरोचअपनी सेल (कमरों) में खाने का इंतजार कर रहे होते हैं और पाइपों के जरिए खाना पहुंचते ही मिनटों में लाखों कॉकरोच उसे चट कर जाते हैं. बता दें कि पहले सुअर वेस्ट मैनेजमेंट करते थे लेकिन स्वाइन फ्लू फैलने के बाद इसपर रोक लग गई.

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