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दुुनिया का सबसे ठंडा गांव, जहां -60 डिग्री में महीनों रहते हैं लोग

दुनिया की सबसे ठंडी जगह का नाम ओइमाकॉन है. रूस के साइबेरिया की घाटी में बसा एक छोटा सा गांव. स्थानीय भाषा में ओइमाकॉन का मतलब होता है, जहां पानी न जमता हो.

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    दुनिया की सबसे सर्द जगह का नाम ओइमाकॉन है. रूस के साइबेरिया में बर्फ की घाटी में बसा एक छोटा सा गांव. दिलचस्प बात ये है कि स्थानीय भाषा में ओइमाकॉन का मतलब होता है, जहां पानी न जमता हो, लेकिन हकीकत ये है कि यहां पानी तो क्या जिंदगी भी जम जाती है.

    रूस की राजधानी मास्को से पूरब की तरफ 3000 मील के सफर के बाद दुनिया का वो कोना आता है, जिसका नाम है ओइमाकॉन है. साइबेरिया में बर्फ की घाटी में बसा एक छोटा सा गांव, यहां दूर-दूर तक जमीन नजर नहीं आती है। चारों तरफ सफेद बर्फ की चादर ही नजर आती है.

    तीन दिन की मेहनत के बाद नसीब होती है कब्र 
    यहां जबरदस्त ठंडी की वजह से जमीन इतनी सख्त हो जाती है कि उसे आग जला कर नरम करना पड़ता है. हर दिन काम खत्म करते हुए गड्ढे के कोने में सुलगता कोयला रख दिया जाता है ताकि बर्फ से गड्ढा भर न जाए. तीन दिन की मेहनत के बाद ही यहां मरने वाले को कब्र नसीब होती है.

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    आइमाकॉन का नजारा


    लोग 20-20 मिनट की शिफ्ट में काम करते हैं, क्योंकि इससे ज्यादा वक्त तक काम करने पर जिस्म का हाड़-मांस जमकर बर्फ बन सकता है. जी हां, यहां कब्र खोदने से लेकर सांस लेने तक के लिए खास ऐहतियात बरतना जरूरी है वर्ना जमजाने का खतरा हमेशा बना रहता है.

    आमतौर पर तापमान - 50 डिग्री रहता है
    जनवरी के महीने में आमतौर पर यहां पर औसत तापमान माइनस 50 डिग्री के आसपास बना रहता है. यहां पर सबसे कम तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है. ये इंसानों की बस्ती वाली दुनिया की सबसे ठंडी जगह है.

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    ओइमाकॉन को इसीलिए पोल ऑफ कोल्ड यानी ठंडा ध्रुव भी कहा जाता है. जब ठंड कुछ कम होती है तो कभी-कभी सूरज आसमान पर दिखाई दे जाता है लेकिन उसकी गर्मी लोगों को महसूस नहीं होती क्योंकि यहां पड़ी बर्फ की मोटी चादर सूरज की किरणों को वापस परावर्तित कर देती हैं.

    आमतौर पर जब यहां सालभर यूं ही बर्फ जमी होती है और जिंदगी चलती रहती है


    500 लोगों की बस्ती है आइमोकॉन
    आइमोकॉन एक छोटा सा गांव है, जहां बमुश्किल 800 लोग ही रहते हैं. ये लोग हर दिन जिंदगी से जूझते हैं. यहां देखते ही देखते पानी जम जाता है, चेहरा बर्फ से ढंक जाता है. फिर भी यहां लोग बसे हुए हैं. आइमोकॉन तक इस सूबे की राजधानी याकुत्स्क से दो दिन की यात्रा करने के बाद पहुंचा जा सकता है.

    याकुत्स्क दुनिया का सबसे ठंडा शहर है लेकिन आइमोकॉन का सर्द मौसम उससे भी चार कदम आगे है. यहां की सर्द जिंदगी इतनी मुश्किल है कि दौड़ने भागने जैसे सामान्य काम भी करने के लिए हिम्मत जुटानी पड़ती है. जरा सी लापरवाही से भी जान जोखिम में पड़ जाती है.

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    सूरज की गर्माहट भी यहां ज्यादा काम नहीं करती, क्योंकि उसकी किरणों को बर्फ की चादर परावर्तित कर देती हैं


    यहां केवल एक दुकान 
    टूर एंड ट्रैवेल कंपनी याकुत्स्क से आइमोकॉन लोगों को सैर कराने के लिए लेकर आती हैं. ताकि लोग महसूस कर सकें कि दुनिया की सबसे ठंडी रिहाइश में जिंदगी कैसी है. यहां पर सिर्फ एक दुकान है, जिंदगी की आस वो ट्रक हैं, जो रोजमर्रा के सामान दुनिया के इस कोने तक पहुंचाते हैं.

    आइमोकॉन तक बर्फ से पटे हाईवे पर ट्रक का ये सफर खतरे से भरपूर होता है. ट्रक का रास्ते में खराब हो जाना आफत से कम नहीं होता. इंजन रुकते ही अक्सर जम जाता है. उसे दोबारा स्टार्ट करने के लिए आग की जरूरत पड़ती है. ट्रकों ही नहीं गाड़ियों को भी यहां पर लगातार स्टार्ट की हालात में छोड़ दिया जाता है ताकि वो बंद न हो जाएं.

    आइमाकॉन में हर जगह इस तरह के तापमान मापने वाले मीटर पेडों पर लगे हैं, जहां तापमान रेड यानि खतरनाक स्थिति में ही दिखता है


    गर्म पानी घरों में सप्लाई होता है
    टैंकर यहां रोजाना पानी को एक ब्यॉलर प्लांट में पहुंचाते हैं, जहां पर पानी को गर्म कर गांव के घरों तक सप्लाई किया जाता है. ब्यॉलर को चौबीसों घंटे जलाए रखना पड़ता है. आग के ठंडे पड़ जाने के मतलब है आइमोकॉन की जिंदगी का ठंडा पड़ जाना.

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    घरों तक पहुंचने वाले पानी को फौरन गरम ड्रमों में खाली करना पड़ता है क्योंकि देरी का मतलब है पानी के खाली होने से पहले ही पाइप में जम जाना. जम जाना ही यहां की जिंदगी की हकीकत है, जिससे बचने के लिए हर दिन चौबीस घंटे संघर्ष जारी रहता है.

    तो यहां लोग रहते क्यों हैं
    सवाल ये है कि जब यहां पर जिंदगी इस कदर सर्द है तो लोग बसे ही क्यों हैं. इसके पीछे आइमोकॉन का अजीब इतिहास है. 1920 और 1930 में ये जगह फौज और गडरियों के लिए कुछ वक्त ठहरने की जगह थी. बाद में सोवियत सरकार ने यहां के नोमैडिक लोगों को नियंत्रित करने में मुश्किल के मद्देनजर उन्हें यहां हमेशा के लिए बसा दिया. तब से ऑइमोकॉन इंसानी बस्ती वाली दुनिया की सबसे ठंडी जगह बना हुआ है.

    वैसे यहां ये भी बताना जरूरी है कि जाड़ों में यहां तापमान आमतौर पर -60 डिग्री तक पहुंच जाता है. जाड़े यहां लंबे और खासे ठंड भरे होते हैं तो गर्मियां थोड़ी सुकून देने वाली. जुलाई में यहां जब गर्मियां आती हैं तो दिन का तापमान 18.7 डिग्री के आसपास हो जाता है.

     

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