धूमकेतुओं से आया था पृथ्वी और मंगल पर कार्बन, फिर शुरू हुआ जीवन-शोध

पृथ्वी पर पानी और जीवन के आने की वजह धूमकेतुओं (comet) के होने को ज्यादा तरजीह नहीं दी गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: @NASA)

पृथ्वी पर पानी और जीवन के आने की वजह धूमकेतुओं (comet) के होने को ज्यादा तरजीह नहीं दी गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: @NASA)

पृथ्वी (Earth) और मंगल (Mars) पर कार्बन (Carbon) के पदार्थ धूमकेतुओं (Comets) से आए थे. जिनके कारण जीवन की शुरुआत हो सकी थी.

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पृथ्वी (Earth) पर जीवन (Life) कैसे आया इस बात पर हमारे वैज्ञानिक एकमत नहीं हैं. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी तत्व बाहर से आए हैं. इनमें पानी भी शामिल है. वहीं कई वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर ही सभी तरह के तत्व मौजूद थे जो धीरे धीरे जीवन के लिए विकसित होते गए. हालिया शोध से पता चला है कि पृथ्वी और मंगल (Mars) जैसे ग्रहों पर कार्बन (Carbon) के स्रोत धूमकेतु (Comet) थे.

कार्बन का सवाल
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और अमेरिकी की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के प्रोफेसर चार्ल्स वुडवर्ड का कहना है कि जीवन की शुरुआत को समझने के लिए कार्बन का अध्ययन बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया,”हम अब भी सुनिश्चित नहीं कर सके हैं कि क्या पृथ्वी पर इसके निर्माण के दौरान इतना कार्बन जमा हो गया होगा कि वह उन पदार्थों में संपन्नता से रहा होगा जिससे जीवन का विकास हो सका. या फिर कार्बन संपन्न धूमकेतुओं के जरिए जीवन के लिए जरूरी तत्वों के निर्माण के कार्बन उपलब्ध हुआ होगा.

विमान पर लगे टेलीस्कोप से हुआ अवलोकन
यह अध्ययन हाल ही में प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसके नजीते एक वायुयान पर लगे स्ट्रैटोस्फियरिक ऑबजर्वेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी ( SOFIA) टेलीस्कोप के अवलोकन पर आधारित हैं. यह नासा और जर्मन एरोस्पस सेंटर की सयुंक्त परियोजना थी.



कैटलीना धूमकेतु का अध्ययन
इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने कैटेलीना नाम के धूमकेतु का अध्ययन किया. जब यह बर्फीला पिंड हमारे सौरमंडल के किनारे से होता हुआ पृथ्वी के पास से साल 2016 में गुजरा, तब बहुत सारे लोगों को इसे देखने का मौका मिला. इसकी झलक सोफिया ने भी कैद की थी. सोफिया ने तब इसकी पूंछ की धूल की चमक में कार्बन के होने के संकेत पाए थे.

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पृथ्वी पर कार्बन (Carbon) की बहुलता कैसे हुई यह एक उलझा हुआ सवाल था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


धूमकेतु में इतिहास के संकेत
सौरमंडल में सुदूर स्थित ऊर्ट बादलों से निकलने वाले कैटलीना और उसके जैसे अन्य धूमकेतु की कभा इतनी ज्यादा लंबी है कि वे  हमारे पास बिना बदलाव के आ पाते हैं. इससे उनमें पुराने समय के संकेत बर्फ के साथ जमे रह जाते हैं कभी नहीं बदलते. इससे शोधकर्ताओं को उस समय के सौरमंडल के बारे में जानकारी मिलने का मौका मिलता है जिसमें ये बने होते हैं.

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कार्बन के बहुलता का अर्थ
सोफिया के इंफ्रारेड अवलोकनों से शोधकर्ताओं धूमकेतु की धूल और गैस के वाष्पीकृत होने से उनकी संचरचना जानने में सक्षम हो सके जो धूमकेतु की पूंछ बनाते हैं. उन्हें पता चला कि कैटलीना कार्बन संपन्न है. इसका अर्थ यह हुआ कि यह पुरातन सौरमंडल के बाहरी इलाके में बना था जहां कार्बन के भंडार थे जो जीवन के अंकुरण के लिए बहुत अहम थे.

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शुरुआती दौर में गुरू ग्रह (Jupiter) ने कार्बन (Carbon) को सौरमंडल के अंदरूनी ग्रहों तक आने से रोका होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कैसे मिला होगा कार्बन को रास्ता
शुरुआत में पृथ्वी और दूसरे पथरीले आंतरिक ग्रह इतने गर्म थे कि उनके निर्माण के दौरान ही कार्बन या तो खो गया है या टिक नहीं सका. बाह्य सौरमंडल में गुरू और नेप्च्यून जैसे विशाल गैस के ग्रहों में कार्बन हो सकता था. वहीं गुरू के विशाल आकार के कारण उसका गुरुत्व कार्बन को सौरमंडल के आंतरिक भाग में आने से रोक रहा होगा.

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ऐसे में सवाल उठा कि अंतरिक पथरीले ग्रहों में कार्बन संपन्नता कैसे आई जो आज भी पाई जाती है. शोधकर्ताओं को लगता है कि गुरू ग्रह की कक्षा में थोड़ा सा बदलाव आने से शुरुआत में कुछ कार्बन संपन्न धूमकेतुओं को अंदर आने का मौका मिल गया होगा जहां वे पृथ्वी और मंगल जैसे ग्रहों से टकरा पाए होंगे. कैटलीना की कार्बन संपन्न संरचना वैज्ञानिकों को यह व्याख्या करने में मदद करती है कि कैसे जो ग्रह शुरुआत में कम कार्बन वाले ग्रह थे बाद में वे जीवन का समर्थन करने वाला कार्बन पदार्थों से संपन्न कैसे हो सके.
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