हम सभी में छिपा है एक जीनियस, क्या सक्रिय किया जा सकता है उसे?

हम सभी में छिपा है एक जीनियस, क्या सक्रिय किया जा सकता है उसे?
दिमाग में दर्द को लेकर बहुत से हिस्से प्रतिक्रिया करते हैं.

शोध बताते हैं कि हमारे दिमाग की क्षमता को प्रयोगात्मक तरीकों से भी सक्रिय किया जा सकता है जैसे कुछ सावैंट सिंड्रोम (Savant syndrome) के मामलों में पाया गया है.

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नई दिल्ली:  कहा जाता है कि इंसान अपने दिमाग (Brain) का एक प्रतिशत से भी बहुत कम हिस्से का उपयोग कर पाता है. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन जो दुनिया से सबसे बुद्धिमान व्यक्ति माने जाते थे, वे भी अपने दिमाग के एक प्रतिशत हिस्से का ही उपयोग कर पाते थे. मनोविज्ञान सहित अन्य वैज्ञानिकों में भी यह बहस का विषय हो गया है कि क्या इंसान की क्षमताओं (powers of brain) को सक्रिय किया जा सकता है?

सिर पर गहरी चोट के बाद तेज हो गया दिमाग
साल 2002 में वॉशिंगटन के जेसन पैडगेट को मारपीट में सिर पर चोट लगी जिसके बाद वे बेहोश हो गए और उनकी गंभीर कनकशन की स्थिति हो गई. जेसन इस हादसे बच तो गए लेकिन जल्दी ही उन्होंने महसूस किया कि  उनका दिमाग खुल गया और उनकी गणितीय क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ गई. वे हर चीज में एक गणतीय स्वरूप देखने लग गए थे. यूनिरवर्सिटी ड्रॉप आउट होने के बावजूद वे यूनिवर्सिटी में नंबर थ्योरी समझने लौटे.

क्या है यह स्थिति



जेसन की स्थिति को सावैंट सिंड्रोम कहा जाता है जहां मस्तिष्क को कुछ नुकसान पहुंचने से उसकी कुछ क्षमताएं खुल जाती हैं. गार्जियन की खबर के मुताबिक आज तक ऐसे 100 मामले सामने आए हैं. ऐसे लोग होते हैं और इसी वजह से कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि हम सभी में एक छिपा हुआ जीनियस है. और वे उन तरीकों की खोज कर रहे हैं जिनसे यह छिपी हुई क्षमता खुल सके.शोधकर्ताओं का मानना ह कि ऑटिज्म के 10 में से एक रोगी में सावैंट सिंड्रोम हो सकता है. लेकिन यह सिंड्रोम अर्जित नहीं किया जा सकता, किसी तकनीक से हासिल नहीं किया जा सकता. इसकी संभावना नहीं के ही बराबर है.



ऐसे असर देखे गए हैं
मनोवैज्ञानिक डारोल्ड ट्रेफर्ट  ने इस तरह के 70 मामलों की जानकारी हासिल की है, लेकिन ऐसे केवल 25 मामलों की आधिकारिक जानकारी दर्ज की गई है. लेकिन  अर्जित मामलों में नतीजे बहुत ही ज्यादा अलग होते हैं एक न्यूयार्क सर्जन पर बिजली गिरने के बाद पियानो बजाने का जुनून सवार हो गया था, एक मरीज को स्ट्रोक आने के बाद पेंटिंग और कविता लिखने का शौक हो गया था. ट्रेफर्ट का कहना है कि आमतौर पर ऐसे मामलों में कला और संगीत की ओर गहरा झुकाव हो जाता है, कुछ लोगों में डांस और या पिनबॉल में गहरी रुचि हो जाती है.

Brain
सावैंट सिंड्रोम के कई लोगों में दिमांग का आगे का बायां हिस्सा बेकार हो गया था. .


क्या होता है दिमाग में चोट लगने से
ट्रेफर्ट ने इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी के जरिए समझाते हुए बताया कि चोट के बाद दिमाग में दूसरे हिस्सों से बचे हुए कॉर्टेक्स की भर्ती होने लगती है. इसके बाद बचे हुए हिस्से की एक तरह की दोबारा वायरिंग शुरू हो जाती है और छुपी हुई क्षमता बाहर आ जाती है. यह एक तरह की क्षतिपूर्ति के जैसी होने वाली प्रक्रिया है. न्यूरोप्लास्टिसिटी में इस बात का अध्ययन किया जाता है कि दिमाग चोट और अन्य सदमों में कैसे खुद को ढालता है.

एक खास हिस्से में लगी थी उन लोगों को चोट
पाया गया है कि सावैंट सिंड्रोम वाले लोगों में जिन्हें सिर में चोट लगी थी उनके सिर के आगे का बायां हिस्सा चोट में खराब हुआ था.  इससे शोधकर्ताओं को लगा कि शायद सावैंट सिंड्रोम जैसे ये प्रभाव पैदा किए जा सकते हैं. एक अन्य शोध में एलन स्नाइडर ने पाया की दिमाग के इन हिस्सों में मैग्नेटिक पल्सेस देने से कुछ लोगों में कलात्मक और पढ़ने की क्षमताओं में वृद्धि हुई. स्नाइडर के मुताबिक सावैंट लोगों में सेंस करने की क्षमता बढ़ जाती है जो आम लोगों के बाएं हिस्से की सक्रिय न होने के कारण उनमें नहीं होती.

कई तरह से जाग सकती हैं क्षमताएं, लेकिन
मैग्नेटिक ब्रेन सिम्यूलेशन छिपी हुई क्षमताएं उजागर करने का केवल एक सक्षम तरीका है. ट्रेफर्ट का कहना है कि दूसरा तरीका रासायनिक है. उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि एम्फेटामाइन्स का शॉर्ट टर्म मेमोरी पर कारगर असर होता है. लेकिन  इसके साथ समस्या है कि यह एडेक्टिव है यानि की इसका सेवन नशा में बदल जाता है. मनोवैज्ञानिक जगत में बहुत सी दवाएं लेकिन उनके साइड इफेक्ट्स ऐसे होते हैं कि उन्हें केवल उपचार में ही प्रयोग में लाया जाता है. वहीं बाजार में भी ऐसे लुभावने वादों वाली दवाओं की कमी नहीं है.

Brain
वैसे तो कई तरीके से दिमागी क्षमताएं जगाई जा सकती है,लेकिन उनके साइड इफेक्ट्स भी देखे गए हैं.


शोधकर्ताओं का मानना है कि बेशक सभी में अपार क्षमताएं होती हैं, उनमें से कुछ को हम जगा भी सकते हैं, लेकिन हममें से सभी को तो आइंस्टीन या पिकासो  जैसा होने की जरूरत तो नहीं है और फिर कमजोरउम्मीदों का जोखिम भी तो ज्यादा होता है.
First published: May 28, 2020, 9:46 PM IST
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