सोनिया गांधी को इतने सालों बाद क्यों आई पूर्व पीएम नरसिंह राव की याद?

सोनिया गांधी को इतने सालों बाद क्यों आई पूर्व पीएम नरसिंह राव की याद?
शुक्रवार को कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी ने पूर्व पीएम नरसिंह राव की तारीफों के पुल बांध दिए

देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव (Former Prime Minister PV Narsimha Rao) की हाल ही में कांग्रेस आलाकमान ने पहली बार खुलकर तारीफ की.

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देश में आर्थिक सुधारों के लिए बड़ा श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव (Former Prime Minister PV Narsimha Rao) को दिया जाता है. हालांकि प्रधानमंत्रित्व काल के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनसे एक तरह किनारा कर लिया. यहां तक कि पार्टी की उपलब्धियों में उनका जिक्र तक नहीं हुआ. अब राव की मृत्यु के 16 सालों बाद शुक्रवार को पहली बार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने खुलकर उनकी तारीफ की. इस बारे में सियासी गलियारों में कई तरह की बातें हो रही हैं.

क्या है मामला
24 जुलाई को कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी ने पूर्व पीएम नरसिंह राव की तारीफों के पुल बांध दिए. ये तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से शुरू हुए जन्म शताब्दी समारोह का मौका था. इसपर सोनिया ने अपने संदेश में राव के बारे में कहा कि उनकी लीडरशिप में देश कई चुनौतियों से पार पा सका, और उनकी उपलब्धियों पर पार्टी को गर्व है. सोनिया ने कहा, 'नरसिंह राव एक सम्मानित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हस्ती थे और कांग्रेस को उनकी उपलब्धियों और योगदान पर गर्व है.'

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उन्होंने कहा, 'पीवी नरसिंह राव का जन्म शताब्दी वर्ष हम सभी के लिए मौका है कि हम एक बहुत विद्वान व्यक्तित्व को याद करें और उन्हें श्रद्धांजलि दें. राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में लंबा जीवन बिताने के बाद, वह ऐसे वक्त में देश के पीएम बने जब गंभीर आर्थिक संकट था.'



राव की विदेश नीति और खासकर चीन से संबंध अच्छा करने की कोशिश का भी जिक्र हुआ


पूर्व पीएम सिंह ने भी की तारीफ
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने भी राव को देश का महान सपूत बताते हुए कई उपलब्धियां गिनाईं. खासकर तौर जुलाई 1991 के बजट का उल्लेख किया. इस दौरान राव ने बाजार को खोला था क्योंकि वे जानते थे कि देश की आर्थिक उन्नति के लिए उदारीकरण जरूरी है. साथ ही उन्होंने राव की विदेश नीति और खासकर चीन से संबंध अच्छा करने की कोशिश का भी जिक्र किया. तब देश विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा था, जिसे सुधारने के लिए राव ने कड़े फैसले लिए, जबकि वो अल्पमत की सरकार थी.



क्यों हो रही है चर्चा
वैसे पार्टी का अपने वरिष्ठ नेताओं को याद करना कोई नई बात नहीं लेकिन सोनिया के राव को याद करने की काफी चर्चा हो रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि पहली बार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राव की तारीफ की है. इससे पहले लगातार कथित तौर पर उन्हें पार्टी में हाशिये पर ही रखा गया. यहां तक कि खुद राव ने 10 जनपथ जाना लगभग बंद कर दिया था. साल 2004 में राव की मृत्यु के बाद All India Congress Committee के बाहर ही उनका शव रखा गया, न कि उसे अंदर रखने की इजाजत मिली. केवल पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने उन्हें आंध्रा भवन जाकर श्रद्धांजलि दी थी. यहां तक कि राव के अलावा सभी पूर्व पीएम का स्मारक नई दिल्ली में बनाया गया था. मृत्यु के बाद भी कांग्रेस ने अपनी कोई उपलब्धि गिनाते हुए राव का कभी जिक्र नहीं किया.

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह राव को गुरु माना करते थे


तब अचानक कांग्रेस को क्यों उमड़ा प्रेम
सालों बाद एकाएक राव को देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बताने के पीछे सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है. वैसे इसके पीछे कांग्रेस की तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में पकड़ मजबूत करने की रणनीति मानी जा रही है. बता दें कि राव का जन्म आंध्रप्रदेश में हुआ था और यहां के लोगों का उनसे काफी जुड़ाव रहा. अब इन क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने को पार्टी पहली बार राव की तारीफ करती दिख रही है. यहां तक कि खुद राव के पोते एनवी सुभाष ने आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा उन्हें नजरअंदाज किया.

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किताब में जिक्र
खासकर सोनिया गांधी और राव के बीच रिश्ते सहज न होने की बात हमेशा हुई. माना जाता है कि सोनिया गांधी राजीव गांधी की हत्या की जांच को धीमा मानती थीं और इसकी नाराजगी वे राव पर उतारती थीं. इस बात का जिक्र कांग्रेस नेता केवी थॉमस ने अपनी किताब में भी किया है. 'सोनिया- द बीलव्ड ऑफ द मासेज' नाम की किताब में थॉमस ने लिखा है कि सोनिया और राव के बीच रिश्ते नॉर्मल नहीं थे. यहां तक कि राव ने कई बार उनसे शिकायत की थी कि सोनिया उनका अपमान करती हैं. कई बार 10 जनपथ में बुलाकर राव को काफी लंबा इंतजार करवाया जाता था.

सोनिया गांधी और राव के बीच रिश्ते सहज न होने की बात हमेशा हुई


थॉमस ने अपनी किताब में ये भी लिखा है कि राव ने खुद कहा था कि बार-बार जाकर इंतजार करना आत्मसम्मान पर चोट है और इसका असर उनकी सेहत पर हो रहा है. राव के कार्यकाल में रथयात्रा और बाबरी मस्जिद विवाद ने सिर उठाया. इसे लेकर भी पार्टी आलाकमान राव को आड़े हाथ लेता रहा. साल 1996 के चुनावों में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा. इसके लिए भी पार्टी आलाकमान ने राव को दोषी माना. इसके बाद से कथित तौर पर राव ने खुद भी पार्टी से दूरी बरतनी शुरू कर दी.

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पुरानी बातों को छोड़ दें तो भी राव के साथ उपेक्षा का ताजा उदाहरण भी मिलता है. द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने ही राव के जन्मदिन पर तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने राव की शख्सियत को दिखाने के लिए सालभर के उत्सव की घोषणा की. हालांकि तब भी कांग्रेस ने कोई सेलिब्रेशन नहीं किया और न किसी आयोजन में हिस्सा लिया था.
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