• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • दूषित पानी से विषैली धातु साफ करने वाला बैक्टीरिया खोजा भारतीय वैज्ञानिकों ने

दूषित पानी से विषैली धातु साफ करने वाला बैक्टीरिया खोजा भारतीय वैज्ञानिकों ने

यह बैक्टीरिया (Bacteria) दूषित पानी से हेक्सावेलेन्ट जैसे भारी धातु प्रभावी तरीके से साफ करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यह बैक्टीरिया (Bacteria) दूषित पानी से हेक्सावेलेन्ट जैसे भारी धातु प्रभावी तरीके से साफ करता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भारतीय वैज्ञानिकों (Indian Scientists) ने ऐसा बैक्टीरिया (Bacteria) खोजा है जो दूषित पानी में से हेक्सावेलेन्ट क्रोमियम (Hexavalent chromium) जैसे भारी धातुओं को प्रभावी तरीके से साफ कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    वैसे तो पृथ्वी की सतह का तीन चौथाई हिस्सा पानी (Water) से घिरा है, लेकिन फिर भी दुनिया का केवल एक प्रतिशत पानी ही इंसानों के पीने के योग्य (Drinking Water) है. आज भी दुनिया के बहुत से हिस्सों में पीने लायक पानी उपलब्ध कराना एक बहुत बड़ी चुनौती है. वहीं बहुत सी जगहों पर साफ पानी भी उलब्ध नहीं है. पानी साफ करने की तकनीकों पर भी बहुत काम हो रहा है. अब भारतीय शोधकर्ताओं ने ऐसे नए बैक्टीरिया (Bacteria) की खोज की है जिसमें पानी से हानिकारक घातु हटा कर उसे पीने योग्य बनाने की क्षमता है.

    इस बैक्टीरिया की खोज बनारस हिंदू यूनिवर्सी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने की है. इस अध्ययन में दर्शाया गया है कि कैसे बैक्टीरिया की छन्नी संक्रामक जगहों पर पानी में से जहरीले हेक्सावेलेन्ट क्रोमियम को हटा देती है. हेक्सावेलेन्ट क्रोमियम वह भारी धातु का आयन है जो इंसानों में कई तरह के कैंसर के अलावा किडनी और लीवर की गड़बड़ी सहित बहुत सारी स्वास्थ्य जटिलताएं ला सकता है.

    कहां से मिला बैक्टीरिया
    शोधकर्ताओं ने मध्य प्रदेश में सिंगरौली के बला नाला से दूषित पानी लिया और उसमें से यह बैक्टीरिया अलग किया. इस नाले में कोयले की खदान से निकला हुआ पानी उपचार के  बाद छोड़ा जाता है. इस अध्ययन में खोजए गए बैक्टीरिया को माइक्रोबैक्टीरियम पैरा ऑक्सीडैन्स स्ट्रेन (VSVM IIT (BHU)) नाम दिया गया है.

    परंपरागत तरीकों से ज्यादा कारगर
    इस अध्ययन की अगुआई करने वाले डॉ विशाल मिश्र ने और उसने पीएचडी छात्र वीर सिंह ने बताया कि नया बैक्टीरिया स्ट्रेन बड़ी तादात में हेक्सावलेन्ट क्रोमियम अवशोषित करने की क्षमता रखता है. इस बैक्टीरिया को दूषित पानी में से हेक्सावेलेंट क्रोमियम हटाने के लिए परंपरागत तरीकों की तुलना में बहुत ही ज्यादा प्रभावी माना गया है.

    Health, Bacteria, Indian Scientists, Contaminated Water, Heavy Metal, Hexavalent chromium

    यह बैक्टीरिया (Bacteria) दूषित पानी में ही खोजा गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    परीक्षणों में खरा
    वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि बैक्टीरिया स्ट्रेन पानी वाले माध्यम के क्रोमियनम VI में तेज वृद्धि दिखाता है. और उपचार प्रक्रिया के बाद आसानी से वह उस पानी के माध्यम से अलग भी हो जाता है. इस बैक्टीरिया की खोज के बाद शोधकर्ताओं ने उद्योगों और कृत्रिम दूषित पानी से हेक्सावेलेंट क्रोमियम हटाने का परीक्षण किया और संतोषजनक नतीजे पाए.

    जलशोधन प्रक्रिया में उपयोगी
    शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने बैक्टीरियाई कोशिकाओं में हेक्सावेलेंट क्रोमियम को हटाने की प्रणाली का भी परीक्षण कर लिया है. कहा जाता है कि यदि बैक्टीरिया के स्ट्रेन को पानी के उपचार प्रक्रिया में जाल दिया जाए तो अतिरिक्त रूप से यह धातु हाटाने की प्रक्रिया हटाया जा सकता है. मिश्रा ने बयान में बताया कि कैसे भारी धातु की प्रणालियां बैक्टीरिया कोशिकाओं में सक्रिय हो जाती हैं जब वे हेक्सावेलेंट क्रोमियम वृद्धि माध्यम में विकसित होती हैं.

    Climate Change: 2050 तक 21 करोड़ से ज्यादा लोगों हो जाएंगे विस्थापित- रिपोर्ट

    इस खोज के साथ कम लागत वाली प्रभावी जलशोधन पद्धतियों में हेक्सावेलेन्ट क्रोमियम हटाने की प्रक्रिया को शामिल किया जा सकता है. चूंकि बैक्टीरिया को बनाना आसान है और वह जलशोधन के उद्देश्य को पूरा भी करता है, यह रोजमर्रा के लिए उपयोग में लाए जाने वाले जलशोधन संयंत्रो में उपयोग में लाया जा सकता है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज