बीजेपी सरकार को बचा चुके हैं संघ से जुड़े कर्नाटक के नए प्रो-टेम स्पीकर

जिन बोपैया को कर्नाटक के राज्यपाल ने प्रो-टेम स्पीकर बनाया है, वो खुद काफी विवादित स्पीकर रह चुके हैं. उन्हीं के चलते वर्ष 2011 में तत्कालीन येदुरप्पा सरकार को नया जीवनदान मिला था. हालांकि बाद में उनके इस कदम की आलोचना सुप्रीम कोर्ट तक ने की थी.

News18Hindi
Updated: May 18, 2018, 5:11 PM IST
बीजेपी सरकार को बचा चुके हैं संघ से जुड़े कर्नाटक के नए प्रो-टेम स्पीकर
जिन बोपैया को कर्नाटक के राज्यपाल ने प्रो-टेम स्पीकर बनाया है, वो खुद काफी विवादित स्पीकर रह चुके हैं. उन्हीं के चलते वर्ष 2011 में तत्कालीन येदुरप्पा सरकार को नया जीवनदान मिला था. हालांकि बाद में उनके इस कदम की आलोचना सुप्रीम कोर्ट तक ने की थी.
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Updated: May 18, 2018, 5:11 PM IST
कर्नाटक के राज्यपाल वैजुभाई वाला ने प्रो-टेम-स्पीकर की नियुक्ति पर एक और गुगली खेल दी है. उन्होंने विधानसभा के सबसे सीनियर विधायक आरवी देशपांडे की अनदेखी कर एक ऐसे विधायक केजी बोपैया को प्रो-टेम स्पीकर बना दिया है, जो न केवल वरिष्ठताक्रम में नीचे है बल्कि बीजेपी के विधायक भी हैं. बोपैया ऐसे विवादित पूर्व स्पीकर हैं, जिनके फैसले की आलोचना खुद सुप्रीमकोर्ट ने की थी

राज्य विधानसभा में नई विधानसभा की कार्यवाही को सुचारु तौर पर चलाने के लिए प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति की जाती है, जो शुरुआती तौर पर इसके कामों को देखता है. नए विधायकों को शपथ दिलाता है. और अगर शक्ति परीक्षण की जरूरत पड़े तो ये काम उसी की देखरेख में होता है, जैसा कि कर्नाटक विधानसभा में शनिवार शाम को होना है. उस कार्यवाही को संचालित करने का नया प्रो-टेम स्पीकर ही करेगा.

वरिष्ठताक्रम की अनदेखी से विवाद 
राज्यपाल वैजुभाई ने इसके लिए केजी बोपैया नाम के एक ऐसे बीजेपी विधायक को प्रो-टेम स्पीकर बनाया है जो अनुभव और वरिष्ठताक्रम में काफी नीचे हैं. वो केवल चार बार से ही विधायक हैं जबकि नई विधानसभा में कई ऐसे सदस्य हैं जो सात या आठ बार से विधायक हैं. खुद बीजेपी में एक सात बार के विधायक उमेश विश्वनाथ खट्टी मौजूद हैं. हालांकि नई विधानसभा में सबसे सीनियर सदस्य कांग्रेस आरवी देशपांडे हैं, जिन्होंने प्रो-टेम स्पीकर बनने के लिए अपना दावा पेश किया था. लेकिन राज्यपाल ने उनके दावे को किनारे कर दिया. हालांकि बोपैया वर्ष 2009 से 2013 तक कर्नाटक विधानसभा में स्पीकर रह चुके हैं.



पहली बार 2004 में चुने गए थे बोपैया
प्रो-टेम स्पीकर बनाए गए बोपैया पहली बार 2004 में वो बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए थे. तब से वो लगातार विधानसभा के लिए चुने जाते रहे हैं. 55 साल के बोपैया पेशे से वकील हैं. उन्होंने गोल्ड मेडल के साथ कानून की परीक्षा पास की थी.
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कर्नाटक विधानसभा


बोपैया संघ के सदस्य हैं 
बोपैया बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय सदस्य रहे हैं. आपातकाल में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. स्पीकर के रूप में उन्होंने वर्ष 2011 में येदुरप्पा सरकार के खिलाफ विद्रोह करने वाले बीजेपी के 11 विधायकों को अयोग्य करार देकर येदुरप्पा सरकार को नया जीवनदान दिया था. बाद में उनके फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट ने पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उनके काम की आलोचना की थी.

कौन करता है प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति 
अब राज्यपाल द्वारा नियुक्त केजी बोपैया ही विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बीजेपी की येदुरप्पा सरकार के बहुमत साबित करने की प्रक्रिया को अपनी देखरेख में अंजाम देंगे. प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल अल्पकाल के लिए करता है. ये नियुक्ति तब तक प्रभावी रहती है, जब तक कि नई विधानसभा अपना स्थायी स्पीकर नहीं चुन ले. प्रो-टेम स्पीकर को शपथ दिलाने का काम राज्यपाल द्वारा किया जाता है.
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