क्या है चीन का राष्ट्रगान और किसलिए घिरा रहता है विवादों में?

क्या है चीन का राष्ट्रगान और किसलिए घिरा रहता है विवादों में?
चीन का राष्ट्रगान अकेले चीन तक सीमित नहीं, ये हांगकांग और मकाऊ में भी लागू है

वर्ल्ड पीस क्रॉफ्रेंस (World Peace Conference) के दौरान चीन के राष्ट्रगान (national anthem of China) की एक लाइन पर काफी विवाद हुआ था.

  • Share this:
चीन का राष्ट्रगान अकेले चीन तक सीमित नहीं, बल्कि ये हांगकांग और मकाऊ में भी लागू है. "मार्च ऑफ द वॉलंटियर्स" नाम से इस नेशनल एंथम को जिन खराब हालातों में लिखा गया, वो शायद ही किसी देश में हुआ हो. इसके गीतकार तियान हान चीन के ख्यात कवि और नाटककार थे. जापान के हमले पर बोलने के कारण वे शंघाई में जेल में थे, जब इस गीत की लाइनें उन्हें सूझीं. जेल में लिखने को कुछ नहीं था तो कवि ने सिगरेट के पैकेट पर बारीक अक्षरों में लिखना शुरू कर दिया. इस तरह से तैयार हुआ चीन का नेशनल एंथम.

जेल में हुई गीतकार की मौत
इसके बाद भी ट्रेजडी चलती रही. जिस संगीतकार को गीत के बोल देने के लिए बुलाया गया, लौटते हुए समुद्र में डूबने से उसकी मौत हो गई. बाद में इस गीत के बोल को एक फिल्म चिल्ड्रेन ऑफ ट्रबल टाइम्स का थीम गीत बनाया गया. गाना धीरे-धीरे इतना लोकप्रिय हो गया कि जापान के खिलाफ चीन की लड़ाई में इसने चीनियों में नया जोश भर दिया था. ये साल 1937 की बात है. ये पूरी तरह से युद्ध में डूबा हुआ देशभक्ति गीत था. हालांकि इसके बाद भी गीतकार को छुटकारा नहीं मिला.

ये भी पढ़ें: भारत और चीन के बीच अगली भिड़ंत क्यों कश्मीर पर हो सकती है? 
साल 1949 में नया चीन तैयार हुआ. बाद का दौर चीन में बदलाव और कल्चरल क्रांति का दौर था. तब भी तियान हान को विवादों के कारण जेल में डाल दिया गया. उन्हीं हालातों में जेल के भीतर राष्ट्रगान लिखने वाले इस कवि की मौत हो गई. तब वे 70 साल थे.



चीनी राष्ट्रगान के गीतकार (दाएं) और संगीतकार (बाएं)


सालों बाद कहलाया राष्ट्रगान
आखिरकार साल 1978 में चीन की पीपल्स कांग्रेस ने मार्च ऑफ द वॉलंटियर्स को आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान माना. इसके लगभग 10 सालों बाद तियानमेन चौक में लोकतंत्र की मांग करते हुए 10 हजार से ज्यादा युवा यही गीत गा रहे हैं. पूरा चीन हिल गया था. तब खुद ही चीन की सरकार ने अपने ही लोगों पर गोलियां और तोपें चलवा दीं. इस तरह के राष्ट्रगान के साथ ही लोगों का कत्लेआम भी जुड़ता चला गया.

ये भी पढ़ें:- चीन में तीन सालों के भीतर 435 उइगर विद्वान लापता, हो रहा ब्रेनवॉश 

गीत पर उठती रही है आपत्ति
चीन के राष्ट्रगान को क्लासिकल चीनी भाषा की बजाए स्थानीय भाषा में लिखा गया है ताकि इसे सारे लोग अपना सकें. वैसे इस एंथम के बोल ठीक वैसे ही हैं, जैसे देश युद्ध के हालात में हो. इसमें चीन की प्राकृतिक संपदा और संस्कृति का जिक्र नहीं मिलता, बल्कि मुकाबला करने का संदेश है. यहां तक कि इसके बोल पर दूसरे देश आपत्ति भी उठा चुके हैं. जैसे एक लाइन है- The Chinese nation face their greatest peril... इसपर वर्ल्ड पीस क्रॉफ्रेंस में काफी बवाल मचा था. तब लाइनें बदली गई थीं. इस तरह से गीत के बोलों में कई बार छोटे-मोटे लेकिन अहम बदलाव होते रहे.

साल 1978 में चीन की पीपल्स कांग्रेस ने मार्च ऑफ द वॉलंटियर्स को आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान माना


क्यों है गीत में युद्ध का भाव
असल में देखें तो चीन का ये राष्ट्रगान युद्धकाल में ही बना था, और उसी भावना के साथ रहा. ये साल 1930 के वक्त की बात है, जब जापान और चीन के बीच लड़ाइयों की शुरुआत हुई थी. तब चीन के युवाओं ने खुद आगे आकर जापान के आक्रमण का विरोध किया था. माना जाता है कि उन लोगों को हथियारों से लैस सेना ने क्रूर तरीके से मार दिया था. जापान ने साल 1937 में नानजिंग शहर को अपने कब्जे में लेकर वहां भी काफी मारकाट मचाई थी. तब भी विरोध के लिए खड़ी चीनी सेना यही एंथम गाती थी.

ये भी पढ़ें:- खतरनाक है चीनी जासूसों का नेटवर्क, हार्वर्ड प्रोफेसर से लेकर नेता तक इसके एजेंट 

हांगकांग और मकाऊ में भी लागू
बाद में साल 1997 में जब ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को वापस लौटाया, और जब पुर्तगाल ने मकाऊ को वापस किया, तब तुरंत ही चीन ने इसे उन देशों का भी राष्ट्रगान घोषित कर दिया. मकाऊ में तो ये गान बिना किसी विरोध के अपना लिया गया लेकिन हांगकांग में लगातार इसका विरोध चलता रहता है. यहां तक कि विरोध को रोकने के लिए चीन को नेशनल एंथम बिल तक पास करना पड़ा.

चीन में राष्ट्रगान का अपमान करने वाले को तीन साल की कैद दी जा सकती है


अनादर पर सजा का प्रावधान
अगर चीन में किसी भी तरीके से 'मार्च ऑफ द वॉलंटियर्स' का अनादर होता है तो ऐसा करने वाले को तीन साल की कैद दी जा सकती है. साथ ही अंतिम संस्कार, निजी अवसरों, विज्ञापनों में या सार्वजनिक स्थानों पर पार्श्व संगीत के रूप में राष्ट्रगान का प्रयोग अनुचित होगा.

क्या लिखा है गीत में 
अब जाते-जाते ये भी समझ लें कि चीन के राष्ट्रगान में लिखा क्या है जो इसपर इतना बवाल मचा. ये मूल रूप से स्थानीय चीनी भाषा में है, जिसका शीर्षक है- मार्च ऑफ द वॉलंटियर्स. बदले हुए वर्तमान रूप में इसका भाव है - वे लोग उठ खड़े हों, जो दास बनने से इनकार करते हों. अपनी मांस-मज्जा से हम एक नई ग्रेट वॉल बनाएंगे. क्योंकि चीन सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है तो हम सबके लिए जरूरी है कि हम आगे बढ़ें. उठो. उठो. उठो. यानी मूल तौर पर ये लड़ाई का जोश जगाने वाला गीत है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading