पाकिस्तान में ईद के चांद पर क्यों चढ़ीं मौलवियों की त्यौरियां

पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री ने चांद के आधार कैलेंडर तैयार करने के लिए एक ऐसी नई कमेटी की घोषणा की है, जो वैज्ञानिक तौर पर इसे तैयार करेंगे. इसे लेकर खासा विवाद भी है

News18Hindi
Updated: May 14, 2019, 1:13 PM IST
पाकिस्तान में ईद के चांद पर क्यों चढ़ीं मौलवियों की त्यौरियां
मौलवी आजकल इस तरह दूरबीन से देखते हैं चांद और तय करते हैं ईद का दिन
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Updated: May 14, 2019, 1:13 PM IST
पाकिस्तान ने रमजान का चांद देखने और इसी अनुसार कैलेंडर तय करने के लिए एक नई कमेटी का गठन किया है. यही कमेटी सांइटिफिक कैलेंडर के आधार पर ईद उल फितर, ईद उल अजहा और मोहर्रम की तारीखों की घोषणा करेगी. हालांकि पाकिस्तान सरकार के एक मंत्री की इस घोषणा के बाद मौलवी और धर्मगुरु नाराज़ हो गए हैं.

पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीक मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने चांद की गति के आधार पर नया कैलेंडर तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय नई कमेटी बना दी है. दरअसल पाकिस्तान में हर चांद देखने को लेकर विवाद भी होता रहा है.



विज्ञान मंत्री की घोषणा पर मौलवियों का गुस्सा फूटा
विज्ञान और तकनीक मंत्रालय का कहना है कि इससे कोई शिकायत नहीं होगी और एकदम मुकम्मल तिथियों की घोषणा की जा सकेगी. साइंटिफिक आधार पर जो कैंलेंडर तैयार किया जाएगा., वो सौ फीसदी परफेक्ट होगा. लेकिन ये घोषणा होते ही पाकिस्तान में मौलवियों के बीच मानो गुस्सा फूट पड़ा है.

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पाकिस्तान में इस काम के लिए सरकार की बनाई रोहेते हिलाल कमेटी (चांद देखने वाली कमेटी) है जो ये ऐलान करती है कि रोजे कब से शुरू होंगे या कब ईद मनाई जाएगी.

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नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर
विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी की इस दलील पर भी मजहबी लोग नाराज हैं कि "जब आधुनिक तरीके मौजूद हैं और हम आखिरी तारीख तय कर सकते हैं तो फिर सवाल यही है कि हम इस तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं करते?"
पुरानी कमेटी के प्रमुख मुफ्ती मुनीब उर रहमान ने चेतावनी दे डाली कि चौधरी को अपनी हद में रहना चाहिए. धार्मिक मामलों में सिर्फ संबंधित मंत्रियों को ही बोलना चाहिए. हर मंत्री जो धर्म की संवेदनशीलता को नहीं जानता, नहीं समझता उसे धार्मिक मामलों में बोलने का कोई हक नहीं. पुरानी कमेटी का भी दावा है कि उसकी कमेटी में भी अंतरिक्ष और मौसम विज्ञान से जुड़े लोग हैं तो नई कमेटी का क्या औचित्य.

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हर बार पाकिस्तान में चांद पर होता है मतभेद
पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों से एक और चीज होती है, जो त्योहारों के मौके पर चांद को लेकर मतभेद को बढ़ा देते हैं. उत्तर पश्चिमी सूबे खैबर पख्तूनख्वाह की राजधानी पेशावर में रहने वाले मौलाना शहाबुद्दीन पोपलजई काफी प्रभावशाली हैं. वो रमजान और ईद के दिन का ऐलान पाकिस्तान सरकार की पुरानी रोहेते हिलाल कमेटी की तुलना में एक दिन पहले कर देते हैं. कई सालों से मौलवी पोपलजई को मनाने की कोशिश हो रही है लेकिन वो टस से मस नहीं होते.

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युवा सराह रहे हैं विज्ञान मंत्री की घोषणा
दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री की घोषणा को देश के युवाओं ने सराहा है. सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने सरकार का शुक्रिया अदा किया है. लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि ये काम मौलवियों के ही हाथ में रहना चाहिए. सरकार को इसमें दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए.

दुनियाभर में चांद देखने पर रहता है मतभेद
वैसे दुनियाभर में ईद, रमजान और मोहर्रम जैसे मौकों पर इमाम और मौलवी ही चांद देखे जाने की पुष्टि करते हैं, जिसके आधार पर इन्हें मनाया जाता है. लेकिन अलग अलग देशों में इनकी तारीख हमेशा आगे पीछे रहती है. ये भी बहस को मौका देता है कि ऐसा क्यों होता है.

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