Home /News /knowledge /

COP26: क्या पर्याप्त हैं कार्बन उत्सर्जन कम करने लिए चीन द्वारा दिए गए लक्ष्य?

COP26: क्या पर्याप्त हैं कार्बन उत्सर्जन कम करने लिए चीन द्वारा दिए गए लक्ष्य?

पहले से ही उम्मीद की  जा रही थी कि चीन कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) कम करने लिए इसी तरह के लक्ष्य निर्धारित करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पहले से ही उम्मीद की जा रही थी कि चीन कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) कम करने लिए इसी तरह के लक्ष्य निर्धारित करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चीन (China) दुनिया का सबसे ज्यादा ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के लिए जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जनकर्ता है. ग्लासगो में शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (UN Climate Summit) के पहले चीन औपचारिक तौर पर उत्सर्जन कम करने वाले लक्ष्यों को जमा किया है. उसका कहना है कि वह साल 2060 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा. लेकिन इन दस्तावेजों से बहुत सारे जलवायु विशेषज्ञों को निराशा हुई है. उनका कहना है कि चीन के दस्तावेज में बहुत सारे अहम सवालों के जवाब नहीं मिले हैं इससे पहले चीन ने भी विकासशील देशों के लिए बनाए जाने वाले फंड की कारगरता पर भी संदेह जताया था.

अधिक पढ़ें ...

    रविवार से ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (UN Climate Summit) शुरु हो रहा है. दुनिया भर के लोगों के इस सम्मेलन पर निगाहें होंगीं कि दुनिया के नेता इससे निपटने के लिए कौन से और कैसे कदम उठाने का फैसला करते हैं. कई देशों ने अपने ओर से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के  लिए अपने लक्ष्य पेश भी कर दिए हैं. इसमें चीन (China) भी शामिल है. चीन ने गुरुवार को ही अपने लक्ष्यों को औपचारिक रूप जमा किए हैं. इन लक्ष्यों का अनुमान पहले ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बायानों और घरेलू नीति दस्तावेजों के आधार पर लगाए जा रहे थे.

    दुनिया का सबसे बड़ा उत्सर्जनकर्ता है चीन
    दुनिया में कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीन हाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जनकर्ता चीन का कहना है कि उसका लक्ष्य साल 2030 से पहले ही सर्वाधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के स्तर तक पुहंचने का है जो यातायात, विद्युत ऊर्जा और निर्माण में लगने वाले कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस से निकलेगी. इसमें बताया गया है कि चीन साल 2060 से पहले ही कार्बन तटस्थता या शून्य CO2 उत्सर्जन हासिल कर लेगा.

    क्या चीन की कम है इस सम्मेलन में दिलचस्पी
    अभी से कयास लगने लगे हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ग्लासगो सम्मेलन में खुद भाग नहीं लेंगे. वहीं अपने लक्ष्यों को जमा करने से पहले ही चीन के पर्यावरण अधिकारी ने बुधवार को कहा था कि ग्लासगो सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने की खातिर गरीब देशों के लिए फंड बनाना सबसे बड़ा रोड़ा होगा. चीन, जलवायु और ऊर्जा के विशेषज्ञ और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ जुआना लुईस का कहना है कि यह हैरानी की बात नहीं है लेकिन निराशाजनक बात है कि चीन के लक्ष्यों के प्रस्ताव में कोई नई बात नहीं है.

    क्या करेगा चीन
    लुईस ने कहा कि चीन की ओर से दाखिल किए गए दस्तावेजों में विस्तार से बताया गया है कि चीन कैसे इन लक्ष्यों को हासिल करेगा. इसमें पवन और सौर ऊर्जा के उपयोग की क्षमता को बढ़ाने साथ कार्बन अवशोषित करने वाले वन्य क्षेत्रों को भी बढ़ाया जाएगा. लेकिन विशेषज्ञ चीन के इस दस्तावेज से इससे संतुष्ट नहीं हैं.

    Climate Change, China, Global Warming, Carbon Emission, Carbon footprint, United Nations, Climate Summit, Glassgow, 2021 United Nations Climate Change Conference, CoP 26,

    विशेषज्ञों को चीन (China) के लक्ष्य संकल्पों में स्पष्टता का साफ तौर पर अभाव दिख रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    नहीं मिले हैं अहम सवालों के जवाब
    जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का कार्बन उत्सर्जन कैसा होगा इससे संबंधित प्रमुख सवाल के जवाब नहीं मिले हैं. दस्तावेज में देश के उत्सर्जन से संबंधित किसी भी बड़े खुले सवाल का जवाब नहीं मिला है. यह भी नहीं बताया गया है कि उत्सर्जन का शीर्ष स्तर किसे माना जाएगा और इस शीर्ष के बाद स्तर तेजी से नीचे कैसे गिरेगा.

    Global Warming से दुनिया के मुकाबले तीन गुना ज्यादा गर्म हो रहा है आर्कटिक

    देशों को देनी है स्पष्ट जानकारी
    संयुक्त राष्ट्र के इस सम्ममेलन को भागीदारों का 26वां सम्मेलन (COP26) कहा जा रहा है. इसमें भाग लेने वाले देश राष्ट्र निर्धारित योगदान की जानकारी देंगे और अपने उत्सर्जन कम करने की योजना की रूपरेखा रखेंगे. यह भी संभव है कि चीन जलवायु सम्मेलन में विदेशी अक्षय ऊर्जा को वित्तीय अतिरिक्त घोषणाएं भी कर सकता है.

    Climate Change, China, Global Warming, Carbon Emission, Carbon footprint, United Nations, Climate Summit, Glassgow, 2021 United Nations Climate Change Conference, CoP 26,

    इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर हर बार की तरह इस बार भी विकसित और विकासशील देशों के बीच असहमति कायम तो नहीं रहेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    और भी हैं संदेह
    कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के लक्ष्य राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इससे पहले के बयान से ही मेल खाते दिख रहे हैं और इनमें कुछ नहीं नया या उत्साहजन नहीं है. इन्हें चिंता है कि उत्सर्जन लक्ष्यों पर संकल्प देश कितना कायम रह सकेंगे. इसके अलावा उत्सर्जन कम करने के लिए विकसशील देशों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता के संकल्प पर भी वे संदेह की नजर से देख रहे हैं.

    फिर से बहुत बड़ा हो गया है अंटार्कटिका का Ozone Hole, भारत से 8 गुना बड़ा

    दिलचस्प बात यह है कि चीन अभी भी जलयवायु परिवर्तन के मामले में विकासशील देशों की सूची में रखा गया है. चीनी पारिस्थितिकी और पर्यावरण उपमंत्री ये मिन ने बुधवार को ग्लासगो में कहा कि उन्हें शक है कि क्या विकसित देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वाकई विकासशील देशों का सहयोग कर पाएंगे. केवल विकासशील देशों को अपनी उत्सर्जन जिम्मेदारियों को हस्तांतरित करना ही इस पूरी प्रक्रिया में  सबसे बड़ी बाधा बन गया है.

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर