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चार दशक में पहली बार भारत में कम हुआ है कार्बन उत्सर्जन

वित्‍त वर्ष 2019-20 के दौरान भारत में कार्बन उत्‍सर्जन में पहली बार कमी दर्ज की गई है. इसके लिए सिर्फ लॉकडाउन ही जिम्‍मेदार नहीं है.

वित्‍त वर्ष 2019-20 के दौरान भारत में कार्बन उत्‍सर्जन में पहली बार कमी दर्ज की गई है. इसके लिए सिर्फ लॉकडाउन ही जिम्‍मेदार नहीं है.

अक्षय ऊर्जा में वृद्धि, कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण ठप हुईं कारोबारी गतिविधियों और आर्थिक सुस्‍ती के कारण भारत में बीते 40 साल में पहली बार कार्बन उत्‍सर्जन (Carbon Emissions) घटा है. मार्च 2020 में खत्‍म हुए वित्‍त वर्ष के दौरान पिछले साल के मुकाबले 1 फीसदी कम कार्बन उत्‍सर्जन हुआ है.

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    दुनियाभर में वैज्ञानिक कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण होने वाली खराब बातों के साथ ही अच्‍छे पहलुओं पर भी गौर कर रहे हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए दुनियाभर में लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown-4) से पर्यावरण पर काफी अच्‍छा असर पड़ा है. कहीं नदियां खुद-ब-खुद साफ हो रही हैं तो ओजोन लेयर (Ozone Layer) भी रिपेयर हो गई है. वहीं, अब पता चला है कि चार दशक में पहली बार भारत में कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) कम हुआ है.

    कार्बन ब्रीफ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लॉकडाउन के कारण ठप हुईं कारोबारी गतिविधियों, अक्षय ऊर्जा के इस्‍तेमाल में वृद्धि, बिजली की खपत में कमी और आर्थिक सुस्‍ती (Economic Slowdown) के कारण वित्‍त वर्ष 2019-20 के दौरान कार्बन उत्‍सर्जन कम हुआ है. रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि घटे कार्बन उत्‍सर्जन के लिए सिर्फ लॉकडाउन जिम्‍मेदार नहीं है.

    अक्षय ऊर्जा ने घटाई पारंपरिक ईंधन की मांग  
    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लॉकडाउन लागू होने से पहले ही बिजली की खपत (Electricity Consumption) कम हो गई थी. वहीं, अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक ईंधन की मांग कम हो गई थी. इस सब के बाद 24 मार्च की आधी रात से पूरे देश में एकसाथ लागू किए गए लॉकडाउन ने बीते 40 साल में पहली बार भारत में कार्बन उत्सर्जन बढ़ने के ट्रेंड को पलटकर रख दिया.

    बिजली की मांग में कमी होने से कोयला आधारित जेनरेटर प्रभावित हुए हैं. यही शायद कार्बन उत्सर्जन कम होने की वजह भी है.


    मार्च 2020 में 15 फीसदी घटा कार्बन उत्‍सर्जन
    शोध के मुताबिक, मार्च में भारत का कार्बन उत्सर्जन 15 फीसदी कम हुआ है. रिपोर्ट में उम्‍मीद जताई गई है कि अप्रैल में कार्बन उत्‍सर्जन 30 फीसदी कम होगा. फिलहाल अप्रैल के आंकड़ों का इंतजार है. बिजली की मांग में कमी होने से कोयला (Coal Consumption) आधारित जेनरेटर प्रभावित हुए हैं. यही शायद कार्बन उत्सर्जन कम होने की वजह भी है. मार्च में कोयले से बिजली उत्पादन 15 प्रतिशत और अप्रैल के पहले तीन सप्ताह में 31 प्रतिशत कम हुआ है.

    लॉकडाउन के पहले ही घटी कोयले की मांग
    कार्बन ब्रीफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले की मांग लॉकडाउन से पहले ही कम होने लगी थी. मार्च 2020 में खत्‍म हुए वित्त वर्ष में कोयले की बिक्री 2 फीसदी घट गई थी. वैसे तो ये आंकड़ा बहुत छोटा नजर आ रहा है, लेकिन पिछले साल की तुलना में इसे देखा जाए तो असली तस्‍वीर सामने आती है. बीते एक दशक में हर साल कोयले से बिजली उत्पादन में 7.5 फीसदी सालाना की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी. भारत में तेल की खपत में भी इसी तरह की कमी नजर आई है.

    मार्च में 18 फीसदी घट गई तेल की खपत
    भारत में साल 2019 की शुरुआत से ही ईंधन की खपत घटने लगी थी. मार्च में तेल की खपत में बीते साल के मुकाबले 18 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है. इस बीच अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली की आपूर्ति बढ़ी है, जो लॉकडाउन के दौरान स्थिर रही है. हालांकि, लॉकडउन की वजह से मांग में कमी के बावजूद अक्षय ऊर्जा स्रोतों के उत्पादन के स्थिर रहने का ये ट्रेंड भारत तक ही सीमित नहीं है. इंटरनेशनल इनर्जी एजेंसी (IEA) की ओर से अप्रैल के अंत में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में कोयले की खपत 8 फीसदी घटी है.

    देश में अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक ईंधन की मांग कम हो गई है. इससे भी कार्बन उत्‍सर्जन में कमी आई है.


    लॉकडाउन हटने पर बढ़ेगा कार्बन उत्‍सर्जन
    बिजली की मांग घटने का असर कोयले से बिजली उत्पादन पर पड़ना तय था. दरअसल, कोयले से बिजली उत्पादन काफी महंगा पड़ता है. इसके उलट सौर ऊर्जा उपकरण लगने के बाद प्रति यूनिट बिजली उत्‍पादन का खर्चा काफी कम आता है. यही कारण है कि सौर ऊर्जा को इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड में प्राथमिकता दी जाती है. तेल, गैस या कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट के लिए ईंधन खरीदना होता है.

    भारत सरकार शायद न दे नियमों में ढील
    ये भी कहा जा रहा है कि कोयले या तेल की खपत में कमी हमेशा नहीं रहेगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि लॉकडाउन हटने के बाद देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को फिर से चलाने की कोशिश करेंगे और थर्मल पावर की खपत बढ़ जाएगी. इसी के साथ कार्बन उत्सर्जन फिर से बढ़ेगा. अमेरिका ने पर्यावरण नियमों में ढील देनी शुरू भी कर दी है. ऐसे में डर है कि बाकी देश भी इस तरह की ढील देना शुरू ना कर दें. हालांकि, कार्बन ब्रीफ के विश्लेषक मानते हैं कि भारत सरकार शायद ऐसा न करे.

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