कोरोना की वजह से पहली बार नहीं रुकेगी हज यात्रा, जानिए कब-कब हुआ ऐसा

कोरोना की वजह से पहली बार नहीं रुकेगी हज यात्रा, जानिए कब-कब हुआ ऐसा
सऊदी अरब के प्रशासन ने कोरोना के मद्देनजर इस बार रमजान महीने में मक्का की यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखा है.

कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से दुनियाभर के श्रद्धालु (Pilgrims) मक्का (Mecca) की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं. इससे पहले भी कई बार युद्ध (War), महामारी (Epedemic) और राजनीतिक विवादों (Political Conflicts) ऐसे प्रतिबंध लगे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 11:32 PM IST
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इस्लाम धर्म की पवित्र मक्का (Mecca) और मदीना (Medina) मस्जिदों में इस वक्त आम लोगों के लिए नमाज अता करने पर पाबंदी है. माना जा रहा है कि मक्का मस्जिद अगले कई महीनों तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगी. पवित्र रमजान के महीने में दुनियाभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु सऊदी अरब पहुंचते हैं. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब मक्का मस्जिद में नमाज आम लोगों के लिए बाधित हुई हो. इससे पहले भी ऐसा कई बार हुआ है.

इस प्रतिबंध को देखते हुए ये भी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि जुलाई में प्रस्तावित हज यात्रा भी कैंसिल की जा सकती है. अमेरिका की Smithsonian Magazine में इस्लामिक मामलों के जानकार Ken Chitwood ने लिखा है कि हज कैंसिल करने से सऊदी अरब को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है. साथ ही दुनियाभर के श्रद्धालुओं की आस्था भी बाधित होगी. वर्तमान सऊदी राजवंश की 1932 में स्थापना के बाद कोरोना संकट की वजह से पहली बार हज यात्रा रोकी जा सकती है. लेकिन यह पहली बार नहीं है कि हज यात्रा बाधित हो सकती है, पिछले 1400 सालों में कई बार ऐसा हुआ है.

सशस्त्र संघर्ष
हज रुकने के शुरुआती साक्ष्य करीब 930 ईस्वी में मिलते हैं जब बहरीन के शिया शासक अबु ताहिर सुलेमान अल-जनाबी ने मक्का मस्जिद पर हमला कर दिया था. वो इस्मायली शिया संप्रदाय से ताल्लुक रखता था. कहा जाता है कि उस समय अबु ताहिर ने बड़ी संख्या में मक्का में श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी. कुछ आंकड़ों के मुताबिक हत्याओं का ये आंकड़ा 30 हजार तक जाता है. इस हमले के दौरान अबु ताहिर मक्का मस्जिद के पवित्र काले पत्थर को भी अपने साथ ले गया था.
पवित्र महीने रमजान के दौरान दुनियाभर से लाखों की तादाद में मुसलमान श्रद्धालु मक्का पहुंचते हैं. लेकिन इस साल कोरोना की वजह से चल रहे लॉकडाउन के कारण सऊदी सरकार ने मस्जिद आम लोगों के लिए बंद कर दी है. इस वक्त मस्जिद में बड़े स्तर पर सैनिटेशन कार्य जारी हैं.




इस पत्थर को अरबी भाषा में अल-हजरु अल-असद कहा जाता है. इस काले पत्थर को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं जैसे ये चांद का टुकड़ा है या फिर किसी धूमकेतु का टुकड़ा. खैर, तो अबु ताहिर इस पत्थर को लेकर उस समय के पूर्व अरब और वर्तमान के बहरीन लेकर चला गया. लंबे समय तक हज यात्रा बंद रही. फिर तकरीबन 20 सालों बाद Abbasid वंश के खलीफा ने पैसे देकर इस काले पत्थर को अबु ताहिर से वापस लिया.

राजनीतिक विवाद
राजनीतिक विवाद की वजह से भी हज यात्रा में खलल पड़ चुका है. 983ईस्वी में बगदाद और मिस्र के बीच युद्ध चल रहा था. ये युद्ध मिस्र के फातिमिद शासकों और Abbasid वंश खलीफा के बीच चल रहा था. फातिमिद शासक का कहना था कि वो ही इस्लाम के वास्तविक नेता हैं. इन दोनों की लड़ाई की वजह से मक्का और मदीना में करीब 8 सालों तक श्रद्धालु नहीं पहुंच सके थे. जब मिस्र में फातिमिद वंश का शासन खत्म हो गया तो उसके बाद देश के लोगों को मक्का में हज के लिए आने की मनाही कर दी गई थी. साथ ही 1258 में जब इराक पर मंगोलों का हमला हुआ था तब भी यहां के लोग सालों तक हज के लिए नहीं पहुंच सके थे.

कई सदी बाद जब इस इलाके में नेपोलियन ने ब्रिटिश शासन खत्म करने के लिए हमला किया तब भी हज यात्रियों को मक्का और मदीन की यात्रा से रोक दिया गया था. या कह सकते हैं तब मक्का और मदीना मस्जिद पहुंचना यात्रियों के लिए आसान नहीं रह गया था.

बीमारियां और हज यात्रा
कोरोना महामारी की वजह से वर्तमान में जैसे हालात बने हैं कुछ ऐसी ही परिस्थितियों में पहले भी हज यात्राएं रोकी जा चुकी हैं. पहली बार प्लेग की वजह से 967ईस्वी में हज यात्रा रुक गई थी. इसके बाद सूखे और अकाल के कारण भी 1046ईस्वी में ऐसा हुआ था. तब ताकतवर फातिमिद वंश ने हज रूट्स पर रोक लगा दी थी.

सऊदी अरब सरकार ने इस समय लोगों के धार्मिक जुटान पर सख्त नियम बना रखे हैं. लोगों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि धार्मिक जुटान से कोरोना वायरस का मास स्प्रेड लोगों के बीच हो सकता है. इससे स्थिति भयावह हो जाएगी.


कॉलरा महामारी की वजह से 1858 में मक्का और मदीना से हजारों की संख्या में मिस्र निवासी वापस चले गए थे. तब इन्हें देश में दाखिल होने से पहले लंबे समय तक क्वारंटीन किया गया था. वास्तविकत में 19वीं सदी के ज्यादातर हिस्से और 20वीं सदी की शुरुआत में हज यात्रा में कई बार बाधा पड़ी. 1831 में भारत में फैले प्लेग की वजह से हजारों हज यात्रियों की मौत बीच रास्ते में ही हो गई थी. दरअसल कई बार महामारियां फैलने की वजह से तकरीबन पूरी 19वीं सदी के दौरान हज यात्राओं में बाधा पड़ती रही.

हाल के सालों में कब पड़ी बाधा
हाल के सालों में भी कई बार हज में बाधा पड़ चुकी है. साल 2012-13 में सऊदी अरब प्रशासन ने Middle East Respiratory Syndome (MERS) की वजह से उम्रदराज और बीमार लोगों को आने की मनाही की थी. साल 2107 में कतर के करीब 18 लाख श्रद्धालुओं को हज पर आने से रोक दिया था क्योंकि तब कतर के साथ सऊदी अरब के डिप्लोमैटिक संबंध अच्छे नहीं थे.

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