फूंक मारने पर 1 मिनट में रिजल्‍ट देगी ये कोरोना टेस्‍ट किट, बिना लक्षण वालों की भी करेगी सटीक जांच

फूंक मारने पर 1 मिनट में रिजल्‍ट देगी ये कोरोना टेस्‍ट किट, बिना लक्षण वालों की भी करेगी सटीक जांच
इजरायल ने फूंक मारकर जांच करने वाली कोरोना टेस्‍ट किट बनाने का दावा किया है. (सांकेतिक फोटो)

इजरायल (Israel) के शोधकर्ताओं का दावा है कि ये कोरोना टेस्‍ट किट (Corona Test Kit) 90 फीसदी सटीक नतीजे देती है. इस किट से जांच के लिए फूंक, नाक और गले से सैंपल लिया जाता है. महज 3800 रुपये वाली ये किट बिना लक्षण वाले लोगों (Asymptomatic) की भी सटीक जांच करती है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) जब पूरी दुनिया में तेजी से फैला तो इलाज के साथ ही इसकी जांच के लिए टेस्‍ट किट (Corona Test Kit) को लेकर भी काफी गहमा-गहमी रही. चीन (China) ने खुद इस मुसीबत से उबरने के बाद बाकी देशों को महंगी दरों पर कोरोना टेस्‍ट किट्स उपलब्‍ध कराईं. इनमें बहुत सी किट खराब निकलीं और उनके नतीजों को सटीक नहीं पाया गया. भारत समेत कई देशों ने ये खराब टेस्‍ट किट चीन को लौटा दीं. कभी एंटीबॉडी टेस्‍ट किट (Antibody Test Kit) तो कभी आरटी-पीसीआर टेस्‍ट (RT-PCR test Kit) को लेकर सवाल उठते रहे. कभी इनके नतीजों और कीमत तो कभी लगने वाले समय को लेकर हंगामा होता रहा. अब इजरायल (Israel) ने 3,800 रुपये कीमत वाली ऐसी कोरोना टेस्‍ट किट बनाने का दावा किया है, जिसमें फूंक मारने पर महज 1 मिनट में नतीजे मिल जाएंगे. शोधकर्ताओं ने ये भी दावा किया है कि इसके नतीजे 90 फीसदी तक सटीक हैं.

फूंक मारने पर पहुंचे ड्रॉपलेट्स में वायरस से की जाएगी जांच
इजरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी (Ben-Gurion University) के शोधकर्ताओं की बनाई इलेक्‍ट्रो-ऑप्टिकल कोरोना टेस्‍ट किट में जांच के लिए नाक, गले और फूंक से सैंपल लिया जाता है. इस किट से बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) कोरोना पॉजिटिव लोगों में भी संक्रमण की सटीक जांच की जा सकती है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, किट में लगाया गया खास तरह का सेंसर कोरोना वायरस को पहचानता है. जब मरीज टेस्ट किट में फूंक मारता है तो ड्रॉपलेट्स के जरिये वायरस सेंसर तक पहुंचते हैं. ये सेंसर एक क्लाउड सिस्टम से जुड़ा रहता है. सेंसर सिस्टम का विश्लेषण करके बताता है कि मरीज पॉजिटिव है या निगेटिव. शोधकर्ताओं का कहना है कि टेस्ट किट की कीमत दूसरे पीसीआर टेस्ट से कम है. यह टेस्ट कहीं भी किया जा सकता है. इसके लिए लैब की जरूरत नहीं है.

किट में लगाया गया खास तरह का सेंसर कोरोना वायरस को पहचानता है. ये किट बिना लक्षणाों वाले कोरोना पॉजिटिव लोगों में भी संक्रमण का पता लगा सकती है.

एयरपोर्ट, बॉर्डर, स्‍टेडियम, थियेटर में साबित होगी मददगार


शोधकर्ताओं का कहना है कि एयरपोर्ट, बॉर्डर, स्टेडियम जैसी जगहों पर यह टेस्ट किट बहुत मददगार साबित होगी. इन जगहों पर तत्‍काल रिजल्‍ट देने वाली कोरोना टेस्ट किट ही सबसे सफल होगी. बीजीयू के स्‍कूल ऑफ इलेक्ट्रिक एंड कंप्‍यूटर इंजीनियरिंग में शोध की उप-प्रमुख और इलेक्‍ट्रो-ऑप्टिकल इंजीनियरिंग में फैकल्‍टी प्रो. गैबी सारुसि ने इस कोरोना टेस्‍ट किट को बनाने का विचार पेश किया था. बायो वर्ल्‍ड की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी टीम किट को जल्द से जल्‍द लोगों तक पहुंचाने के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से मंजूरी लेने की तैयारी कर रही है. सारुसि के मुताबिक, क्‍लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) की शुरुआत से ही टेस्ट किट से अच्‍छे नतीजे मिले हैं. इसकी मदद से कम से कम समय में ज्‍यादा से ज्‍यादा मरीजों की जांच की जा सकती है.

कोविड-19 की अलग-अलग स्‍टेज पता करने का काम जारी
सारुसि की टीम ने इस किट का क्‍लीनिकल ट्रायल रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry) के साथ मिलकर किया है. क्‍लीनिकल ट्रायल के लिए 120 इजरायली लोगों को चुना गया. टीम को ट्रायल में 90 फीसदी सटीक नतीजे मिले. पीसीआर किट वायरस के आरएनए और डीएनए को पहचानकर रिपोर्ट देती है. लिहाजा, नतीजे आने में कई घंटे लगते हैं. वहीं, इजरायल की ये किट एक मिनट के अंदर रिजल्‍ट दे देती है. इसके अलावा पीसीआर किट से टेस्‍ट करने के लिए खतरनाक सैंपल को लैब तक ले जाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. इस नई किट से स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की ये समस्‍या भी खत्‍म हो जाएगी. सारुसि ने बताया कि अभी भी किट के क्‍लीनिकल ट्रायल जारी हैं. अब हम ये कोशिश कर रहे हैं कि किट से कोविड-19 की अलग-अलग स्‍टेज के बारे में भी इस किट से पता लगाया जा सके.

अब इस किट के जरिये कोविड-19 की अलग-अलग स्‍टेज के बारे में भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है.


सांस के साथ बाहर आने वाले ड्रॉपलेट्स में होता है कोरोना वायरस
हाल में किए गए एक शोध (New Study) में पता चला था कि अगर कोई व्‍यक्ति जोर से बात करता है तो उसके मुंह से निकलने वाले हजारों ड्रॉपलेट्स 14 मिनट तक हवा में टिके रह सकते हैं. वहीं, सामान्‍य तौर पर बात करने पर सांस के साथ बाहर निकलने वाले रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स 8 मिनट तक हवा में रह सकते हैं. यानी इतनी देर बाद ही रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स धूल कणों के साथ किसी सतह पर पहुंचेंगे. शोध रिपोर्ट में कहा गया कि अस्‍पताल, नर्सिंग होम, कांफ्रेंस रूम, सुपरस्‍टोर, क्रूज शिप जैसी जगहों पर मौजूद लोगों में कोरोना वायरस फैलने की एक वजह ये भी हो सकती है. इस अध्‍ययन में इंसानों के बोलते समय सांस के साथ मुंह से निकलने वाली हजारों ड्रॉपलेट्स पर शोध करने के लिए एक लेजर लाइट का इस्तेमाल किया गया था. शोधकर्ताओं ने पाया कि जोर से बोलने वाला व्‍यक्ति एक मिनट में कम से कम 1,000 ड्रॉपलेट्स निकलता है, जिनमें वायरस भी हो सकता है.

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