coronavirus: क्‍या पलायन कर इटली वाली गलती कर बैठे हैं भारतीय?

coronavirus: क्‍या पलायन कर इटली वाली गलती कर बैठे हैं भारतीय?
दिल्‍ली-उत्‍तर प्रदेश की सीमा पर स्थिति आनंद विहार बस अड्डे पर घर जाने को आतुर लोगों की भीड़.

भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus in India) मरीजों की संख्‍या अब तक 1,254 हो गई है. इनमें 35 लोगों की जान जा चुकी है. बताया जा रहा है कि इटली में संक्रमण लोगों के पलायन के कारण ही तेजी से फैला. सवाल उठता है कि क्‍या भारत में लोग इटली वाली गलती कर चुके हैं? क्‍या भारत में भी संक्रमण विस्‍फोटक स्थिति में पहुंच सकता है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2020, 3:41 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण दुनिया में सबसे ज्‍यादा मौतें इटली (Italy) में हो रही हैं. 6 करोड की आबादी वाले इटली में अब तक 1,01,739 लोग संक्रमित हो चुके हैं. इनमें 11,591 लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना वायरस के संक्रमण से लॉम्बार्डी, वेनेटो और एमिलिया रोमागा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इटली में संक्रमित 85 फीसदी मरीज इसी क्षेत्र से आते हैं. यहीं 92 फीसदी मौतें हुई हैं. ये संख्‍या कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत वाले चीन (China) से करीब-करीब 4 गुना हो चुकी है. चीन में अब तक 81,518 पॉजिटिव केस सामने आए हैं, जिनमें 3,305 लोगों की मौत हुई है. संक्रमितों की संख्‍या के मामले में अमेरिका (US) चीन से काफी आगे निकल चुका है. अमेरिका में अब तक 1,64,252 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें 3,167 की मौत हो चुकी है. इस बीच भारत (India) में भी संक्रमितों की संख्‍या 1254 हो गई है. इनमें 35 लोगों की जान जा चुकी है. बताया जा रहा है कि इटली में संक्रमण लोगों के एक से दूसरे शहर जाने के कारण (Migration) से तेजी से फैला. अब सवाल उठता है कि क्‍या भारत में लोग इटली वाली गलती कर चुके हैं?

लापरवाही और संक्रमण को हलके में लेने से इटली में हुई बर्बादी
सवाल यह उठता कि आखिर कोरोना वायरस चीन से करीब 7,500 किमी दूर इटली में कैसे पहुंचा और फिर पूरे देश में कैसे फैल गया. दरअसल, इटली में कोरोना वायरस के बर्बादी फैलाने का कारण प्रशासन के साथ ही आम लोगों की लापरवाही और संक्रमण को हलके में लेना माना जा रहा है. दरअसल, इटली में सबसे पहले दो मामले 31 जनवरी 2020 को रोम में सामने आए थे. ये दोनों लोग चीन के वुहान के रहने वाले थे और 23 जनवरी को इटली पहुंचे थे. दोनों को इलाज के लिए भेज दिया गया. इसके बाद उनके सपंर्क में आए लोगों को क्‍वारंटीन कर दिया. इसके बाद 6 फरवरी को इटली का एक नागरिक वुहान से लौटा. उसे लोम्‍बार्डी के एक अस्‍पताल में भर्ती कराया गया. ये इटली में संक्रमण का तीसरा मामला था. इटली ने चीन से आने वाली सभी फ्लाइट्स रद्द कर दीं. इसके बाद 21 फरवरी तक लोम्‍बार्डी में 16 पॉजिटिव मामले समेत इटली में संक्रमण के 76 मामले सामने आ चुके थे.

लॉकडाउन की अफवाह पर लोगों ने किया पलायन



लोम्‍बार्डी के एक मरीज की पत्‍नी ने 19 फरवरी को अधिकारियों को बताया कि वह 21 जनवरी को चीन से लौटे अपने एक मित्र से मिली थी. जांच में उसे निगेटिव पाया गया. हालांकि, 20 जनवरी को फिर की गई जांच में वह प्रेग्‍नेंट महिला, उसका दोस्‍त और उसका पति तीनों पॉजिटिव पाए गए. इसी दिन तीन और केस पॉजिटिव मिले. एक बडी विमान निर्माता कंपनी की इटली टीम के एक अधिकारी ने बताया कि इस बीच लोम्‍बार्डी में अफवाह फैली कि सरकार वुहान की ही तरह लंबे समय के लिए राज्‍य में लॉकडाउन करने वाली है. इसके बाद वहां से लोगों ने इटली के दूसरे राज्‍यों की ओर पलायन शुरू कर दिया. इसी का नतीजा निकला कि मार्च की शुरुआत तक कोरोना वायरस इटली के हर राज्‍य में पहुंच चुका था. इसके बाद इटली में पॉजिटिव मामलों की संख्‍या लगातार बढती चली गई. 21 फरवरी को ही लोम्‍बार्डी में मरीजों का इलाज करने वाले एक डॉक्‍टर को भी पॉजिटिव पाया गया. इटली मे संक्रमण के कारण पहली मौत 22 फरवरी को हुई थी.



कोरोना वायरस के शुरुआती मामलों के बाद इटली के लोम्‍बार्डी में लंबे लॉकडाउन की अफवाह फैली. इसके बाद लोग दूसरे शहरों में पलायन कर गए और संक्रमण तेजी से दूसरे राज्‍यों में भी फैल गया.


28 मार्च को भारत में भी हुआ बड़े पैमाने पर पलायन
इटली में प्रशासन और लोगों की अपनी लापरवाही के कारण वायरस तेजी से फैलता चला गया. अब सवाल ये उठता है कि क्‍या भारत इस गलती को दोहरा चुका है. दरअसल, भारत में पहला मामला इटली से एक दिन पहले ही सामने आया था. भारत के दक्षिणी राज्‍य केरल में ये मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया था. ये तीनों संक्रमित व्‍यक्ति चीन की वुहान यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जिन्‍हें 27 फरवरी को भारत लाया गया था. इसके बाद मार्च में संक्रमितों की संख्‍या तेजी से बढती चली गई.

देश में 10 मार्च तक पहले 50 पॉजिटिव मामले सामने आए. इसके बाद अगले 5 दिन में यानी 15 मार्च तक पॉजिटिव मामलों की संख्‍या 100 हो गई. फिर 24 मार्च को ये संख्‍या 500 और 28 मार्च को 1000 हो गई. इस समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर चुके थे. लग रहा था कि अब भारत में संक्रमण फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएंगे. इसी बीच अफवाह फैली कि ये लॉकडाउन 3 महीने का होगा. इसके बाद 28 मार्च को दिल्‍ली के आनंद विहार बस अड्डे पर हजारों की तादाद में लोग अपने घरों को जाने के लिए जुट गए. इस दौरान ना तो सोशल डिस्‍टेंसिंग का ध्‍यान रखा गया और न ही सैनेटाइजेशन का. यहां जुटे लोगों में सबसे ज्‍यादा यूपी और बिहार से थे.

संक्रमण फैलने से रोकने को सख्‍त हुईं राज्‍य सरकारें
दिल्‍ली ही नहीं देश के सबसे ज्‍यादा संक्रमण की चपेट में आए महाराष्‍ट्र से भी लोगों का पलायन शुरू हो चुका था. महाराष्‍ट्र से निकले लोगों में मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्‍ली, यूपी और बिहार के लोग शामिल थे. इसके अलावा गुजरात और हरियाणा से भी लोग अपने शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस पलायन को नहीं रोका गया और इनमें कुछ लोग भी ऐसे संक्रमित हुए, जिनमें अभी लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं तो आने वाला कल बहुत भयावह होगा. इसी पलायन का नतीजा है कि अब बरेली, बुलंदशहर समेत यूपी के छोटे-छोटे शहरों से भी मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि, इस बीच पीएम मोदी ने तमाम राज्‍यों को अपनी सीमाएं सील करने और पलायन कर रहे लोगों को रोकने के निर्देश दे दिए हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मेट्रो औरर औद्योगिक शहरों से पलायन कर अपने शहरों में पहुंचे लोगों को बाहर ही क्‍वारंटीन कर रखा जा तो हालात इटली जैसे होने से बचाए जा सकते हैं.


ये किया तो इटली जैसे खराब नहीं होंगे हालात
देश की राज्‍य सरकारें भी अपने स्‍तर पर संक्रमण को फैलने से रोकने की कोशिशों में जुट गई हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने आदेश दे दिया है कि पलायन कर आने वाले लोगों को सीधे उनके गावों, कस्‍बों तक नहीं जाने दिया जाए. ऐसे लोगों को घर लौटने से पहले 14 दिन तक क्‍वारंटीन किया जाए. इस पर अमल भी शुरू हो गया है. बिहार सरकार ने स्‍पष्‍ट तौर पर कह दिया है कि राज्‍य में किसी की भी एंट्री नहीं होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी भी सरकार सख्‍ती से कदम उठाए और पलायन कर पहुंचे लोगों को सीधे उनके घरों तक पहुंचने से रोक ले तो हालात पर काबू किया जा सकता है. अगर ऐसा हो पाया तो भारत में अभी भी स्थिति इटली जैसी विस्‍फोटक नहीं होगी. अब तक की रिपोर्ट्स से ये भी साफ है कि चीन संक्रमण को हुबेई में ही रोके रखने के कारण जल्‍दी उबर पाया है.

बडी आबादी के संक्रमित होने का खतरा, लेकिन मॉर्टेलिटी रेट रहेगा कम
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च सेंटर (ICMR) के एंडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी सेंटर के पूर्व प्रमुख डॉक्टर टी. जैकब जॉन का कहना है कि भारत का मौसम और जनसंख्या कोरोना वायरस को फैलाने में बडी भूमिका निभाएगा. उनका तर्क है कि लोग इलाज और क्वारंटीन से बचने के लिए भाग रहे हैं. इससे खतरा और बडा हो गया है. वहीं, हर हफ्ते वायरस बड़ा रूप लेता जा रहा है, जिसका कभी भी भारत में विस्‍फोट हो सकता है.. एक आकलन के मुताबिक, भारत में प्रति वर्ग किलोमीटर 420 लोग रहते हैं, जबकि चीन में प्रति वर्ग किलोमीटर 148 लोग रहते हैं. अगर कोरोना वायरस ने भारत में कब्जा जमाया तो करीब तीन गुना ज्यादा असर होगा.

हालांकि, डब्‍ल्‍यूएचओ और चीन समेत दुनिया के कई वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत इस वायरस से आसानी से निपट लेगा. वहीं, इम्‍यूनोलॉजिस्‍ट डॉ. स्‍कंद शुक्‍ल का कहना है कि भारत में पलायन के बाद ये वायरस बहुत तेजी से फैलेगा, लेकिन इससे मरने वालों की संख्‍या बाकी देशों के मुकाबले कम रहेगी. उनका कहना है कि देश की बडी आबादी युवा है. इसलिए मॉर्टेलिटी रेट कम रहेगा. हालांकि, भारत में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अच्‍छी नहीं है. इसलिए बहुत ज्‍यादा लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं. इसमें लोगों के खानपान की अहम भूमिका रहेगी.

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First published: March 31, 2020, 11:56 AM IST
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