पाकिस्तान में WhatsApp के जरिए हो रहा ब्लड प्लाज्मा का अवैध कारोबार

पाकिस्तान में WhatsApp के जरिए हो रहा ब्लड प्लाज्मा का अवैध कारोबार
पाकिस्तान में कोरोना के दौर में ब्लड प्लाज्मा का अवैध कारोबार चल निकला है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

पाकिस्तान में कोरोना के दौर में ब्लड प्लाज्मा का अवैध कारोबार (black marketing of blood plasma in Pakistan amid coronavirus) चल निकला है. डॉक्टरों का मानना है कि ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज होती हैं. ऐसे लोगों का प्लाज्मा कोरोना से बचा सकता है.

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कोविड-19 का ग्लोबल आंकड़ा 1 करोड़ 10 लाख से ऊपर जा चुका है. प्रभावित देशों में भारत चौथे नंबर पर है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान की भी खास बेहतर नहीं. बारहवें नंबर पर खड़े इस देश में सवा 2 लाख लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. पहले से ही आर्थिक तंगी झेल पाकिस्तान में इसी बीच ब्लड प्लाज्मा का कारोबार जोरों पर है. गरीब और रिकवर हो चुके लोग इसे 2 से 8 लाख रुपए में बेच रहे हैं. वहीं खुद डॉक्टर मान रहे हैं कि पाकिस्तान का हेल्थरकेयर सिस्टम जल्दी ही गिर सकता है.

क्या है प्लाज्मा थैरेपी और कैसे करती है काम
जब वायरस शरीर पर हमला करता है तो मरीज के शरीर में उससे लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम सक्रिय हो जाता है. इस प्रोसेस में प्रोटीन बनता है, जिसे एंटीबॉडीज कहते हैं. ये एक बार बीमार हो चुके व्यक्ति को एक तय वक्त तक बीमारी के दोबारा हमले से बचाए रखती है. माना जा रहा है कि इस एंटीबॉडी को ब्लड प्लाज्मा के जरिए अगर बीमार के शरीर में डालें तो वो जल्दी ठीक हो जाएगा. या फिर वायरस का हमला हो तो भी तो काफी हद तक सुरक्षित रहेगा. इसे कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी कहते हैं. यानी इसके तहत ठीक हो चुके शख्स के एंटीबॉडीज से युक्त ब्लड बीमार या स्वस्थ के शरीर में डाला जा रहा है.

कोविड-19 का ग्लोबल आंकड़ा 1 करोड़ 10 लाख से ऊपर जा चुका है (Photo-pixabay)

अब पाकिस्तान में ब्लड प्लाज्मा का ब्लैक मार्केट चल निकला है. द गार्डियन में आई रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से बताया गया है. इस्लामाबाद का एक डॉक्टर कहता है कि ऐसी घटनाएं काफी हो रही हैं. मरीज के घरवाले किसी ऐसे व्यक्ति का रिकॉर्ड निकलवाते हैं जो कोरोना से रिकवर हो चुका हो. उससे मिलते हैं और ब्लड प्लाज्मा का सौदा करते हैं. अगर रिकवर हो चुका शख्स और उसका परिवार राजी हो जाते हैं तो वे एक प्राइवेट लैब में जाकर प्लाज्मा निकलवा लेते हैं. बदले में उन्हें 2 से 8 लाख रुपए तक की रकम दी जाती है. व्हाट्सएप पर भी खरीद-फरोख्त हो रही है. व्हाट्सएप मैसेज में रिकवर्ड व्यक्ति अपना प्लाज्मा बेचने की बात कहता है और इसके बाद खरीददार उससे वहीं पर मोलभाव करते हैं.



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वैसे पाकिस्तान सरकार के मुताबिक वो ऐसे पांच अस्पताल बना चुकी है, जहां वैध तरीके से ब्लड प्लाज्मा लिया जा सकता है. कराची, लाहौर, रावलपिंडी और पेशावर के इन अस्पतालों में एक्सपर्ट की निगरानी में सबकुछ हो रहा है और इन्हीं जगहों पर प्लाज्मा डोनेट करने और उसे दिए जाने की इजाजत मिल रही है.

रिकवर हो चुका शख्स राजी हो जाए तो वे एक प्राइवेट लैब में जाकर प्लाज्मा निकलवा लेते हैं (Photo-pixabay)


प्लाज्मा के इस अवैध कारोबार के बारे में फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसी का कहना है कि उन्हें पहले से ही इसकी जानकारी है लेकिन ये पुलिस का काम है कि ऐसे मामले पहल करे. पाकिस्तान में न केवल ब्लड प्लाज्मा, बल्कि कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए जरूरी कई सारी चीजों की कालाबाजारी हो रही है. द गार्डियन के मुताबिक इस्लामाबाद के लगभग सारे ही अस्पतालों में कोरोना के लिए दी जा रही दवाओं के साथ-साथ मास्क, ग्लव्स, ऑक्सजीन सिलेंडर तक चोरी जा चुके. अब वही चीजें मार्केट में 25 गुना ज्यादा कीमत पर बेची जा रही हैं. इससे अस्पताल के साथ मरीजों पर बहुत ज्यादा भार पड़ रहा है.

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बता दें कि पाकिस्तान की सरकार पहले से ही लॉकडाउन के खिलाफ थी. पीएम इमरान खान लगातार इस तरह के बयान दे रहे थे कि गरीब लोग घरों में बंद रहना अफोर्ड नहीं कर सकते. इन्हीं बातों के बीच 18 मई को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोरोना पाकिस्तान में महामारी नहीं बना है. और इसके साथ ही लॉकडाउन में ढिलाई दे दी गई. तब से पाकिस्तान के हालात खराब होते गए.

पहले से ही डार्क नेट पर ब्लड प्लाज्मा की खरीद-फरोख्त चल रही है (Photo-pixabay)


यहां तक कि World Health Organization को चिट्ठी लिखकर देश से गुजारिश करनी पड़ी कि वहां लॉकडाउन दोबारा लगा दिया जाए वरना हालात बहुत खराब हो सकते हैं. इसके बाद कुछ शहरों में बंदी हुई, जो दोबारा हटा दी गई.

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वैसे पाकिस्तान ही नहीं, इससे पहले से ही डार्क नेट पर ब्लड प्लाज्मा की खरीद-फरोख्त चल रही है. साइबर क्रिमिनल्स प्लाज्मा को इसे "passive vaccine" की तरह शो करते हुए भारी कीमतों पर बेच रहे हैं. ये 25 मिलीलीटर से लेकर एक लीटर तक भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी कीमत लगभग 10 लाख है. बता दें कि डार्क नेट इंटरनेट दुनिया का ऐसा सीक्रेट संसार है, जहां कुछ ही ब्राउजर के जरिए पहुंचा जा सकता है और ये सर्च इंजन में भी नहीं आता है. डार्क नेट का इस्तेमाल अक्सर अपराधी गलत कामों के लिए करते हैं. डार्क वेब पर प्लाज्मा ही नहीं, कोरोना से जुड़ी कई चीजों की बिक्री जोरों पर है. इसमें personal protective equipment भी हैं, जैसे N95 मास्क, ग्लव्स और बॉडी सूट. माना जा रहा है कि ये फैक्ट्रियों से चुराए गए हैं, या फिर गोदाम से चुराए गए हैं. चोरी के बाद ये भारी कीमत पर नेट पर बेचे जा रहे हैं.
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