WHO ने कहा, बार-बार संक्रमित कर सकता है कोरोना वायरस, इम्‍युनिटी पासपोर्ट जारी करने से बचें देश

WHO ने कहा, बार-बार संक्रमित कर सकता है कोरोना वायरस, इम्‍युनिटी पासपोर्ट जारी करने से बचें देश
वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन ने चेतावनी दी है कि सरकारें कोरोना वायरस से उबर चुके संक्रमितों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट जारी न करें.

वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, यह कहना बिलकुल ठीक नहीं होगा कि संक्रमण से एक बार ठीक हो चुके और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग कोरोना वायरस (Coronavirus) से पूरी तरह सुरक्षित हैं. इसलिए कोई भी देश इम्यूनिटी पासपोर्ट (Immunity Passport) जारी न करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 10:02 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया में 29,38,308 लोगों को चपेट में ले चुका है. इनमें 2,03,797 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 8,41,515 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं. अब तक ये माना जा रहा था कि जो लोग ठीक हो चुके हैं, उनमें कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी (Antibody) बन गई हैं और वे दोबारा बीमार नहीं होंगे. अब वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने कहा है कि ठीक हो चुके मरीजों में एंटीबॉडीज बन जाने के कारण दोबारा संक्रमित नहीं होने का कोई सबूत नहीं मिला है.

इसके उलट काफी लोगों के ठीक होने के कुछ समय बाद फिर बीमार होने की सूचनाएं आ रही है. डब्‍ल्‍यूएचओ ने चेतावनी दी है कि संक्रमित व्‍यक्ति ठीक हो जाने के बाद भी कई बार कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है. आसान शब्‍दों में समझें तो कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के भी दोबारा संक्रमित होने का खतरा बरकरार है. ऐसे में सरकारें एक बार संक्रमण से उबर चुके लोगों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट (Immunity Passports) जारी करने से परहेज करें.

'साबित नहीं हुई एंटीबॉडी टेस्‍ट की सटीकता और विश्‍वसनीयता'
डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक, यह कहना बिलकुल ठीक नहीं होगा कि संक्रमण से एक बार ठीक हो चुके और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग सुरक्षित हैं. इसलिए कोई भी देश इम्यूनिटी पासपोर्ट जारी न करे. बता दें कि कुछ देशों की सरकारों ने इलाज के बाद ठीक हो चुके लोगों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट या इससे मिलता-जुलता कोई दूसरा प्रमाणपत्र जारी किया है ताकि लोग यात्रा कर पाएं. इसके अलावा ऐसे प्रमाणपत्रों के साथ लोग अपने काम पर भी लौट पाएं.
डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा है कि एंटीबॉडी टेस्‍ट की सटीकता और विश्वसनीयता को अभी साबित करना होगा.




डब्‍ल्‍यूएचओ ने इस पर कहा है कि इंसान में कोविड-19 के एंटीबॉडी का पता लगाने वाले परीक्षणों की सटीकता और विश्वसनीयता को अभी साबित करना होगा. लिहाजा, अभी इम्यूनिटी पासपोर्ट देने से संक्रमण का खतरा बढ़ेगा. प्रमाणपत्र मिलने पर ठीक हो चुके लोग कोरोना वायरस के खिलाफ मानक एहतियात बरतने की सलाह को नजरअंदाज कर सकते हैं.

संक्रमण से ठीक होने में कोशिका प्रतिरक्षा भी हो सकती है अहम
वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन कोरोना वायरस पर एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया के सबूतों की समीक्षा कर रहा है. कई अध्ययनों में कहा गया है कि संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में वायरस के प्रति एंटीबॉडी विकसित हो गई हैं. संगठन का कहना है कि उनमें कुछ लोगों के खून में निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी का स्तर बहुत कम है. इसका मतलब है कि कोविड-19 से ठीक होने के लिए कोशिका प्रतिरक्षा भी अहम हो सकती है.

बता दें कि पिछले हफ्ते चिली ने कहा था कि वह संक्रमण से उबर चुके लोगों को हेल्थ पासपोर्ट देना शुरू करेगा.ताकि वे काम पर लौट सकेंगे. वहीं, ब्रिटेन (Britain) के हेल्‍थ सेक्रेटरी मैट हैंकॉक ने हाल में कहा था कि संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोग अब वायरस के लिए काफी हद तक इम्यून हो चुके होंगे. ऐसे में उनके लिए इम्युनिटी सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए. मैट खुद इसके कुछ दिन पहले ही संक्रमण से ठीक होकर काम पर लौटे थे.

ब्रिटेन समेत कई देश ठीक हो चुके संक्रमितों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट देने की येाजना बना रहे हैं.


सार्स के कई मरीजों में एंटीबॉडी कुछ समय बाद हो गई थीं बेअसर
चीन (China) में इम्युनिटी सर्टिफिकेट की तर्ज पर कलर कोड बन चुका है. ये लाल, पीले और हरे रंग के होते हैं. इनमें लाल कोड का मतलब है कोरोना कन्फर्म, संदिग्ध या ऐसा व्यक्ति जिसमें लक्षण न हों लेकिन बीमार है. पीला रंग उनके लिए है, जो संक्रमितों के संपर्क में आए हों. वहीं, हरे रंग का मतलब है कि वह ठीक है और यात्रा कर सकता है.

इम्‍यूनिटी पासपोर्ट या सर्टिफिकेट से पता चलेगा कि अब व्‍यक्ति में कोरोना वायरस का कोई खतरा नहीं है. इस पासपोर्ट वाले व्‍यक्ति को बाहर घूमने या काम करने की अनुमति मिल सकती है. डब्‍ल्‍यूएचओ का कहना है कि सार्स (SARS) के मरीजों के दोबारा बीमार होने के कई मामले आए थे. सार्स के मरीजों के शरीर में एंटीबॉडी बनीं तो, लेकिन एक वक्त के बाद बेअसर हो गईं. अब इस मामले में कोविड-19 के नतीजे आने बाकी हैं.

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