Covid-19 का कितनी जल्दी निकल सकेगा इलाज, जानिए सारी संभावनाएं

Covid-19 का कितनी जल्दी निकल सकेगा इलाज, जानिए सारी संभावनाएं
करोना संकट से निपटने केलिए दुनिया भर में हर संभव प्रयास हो रहा है.

कोरोना वायरस ( Corona virus) के इलाज के लिए दुनियाभर में तमाम तरह की कोशिश हो रही हैं. इसमें वैक्सीन, इलाज, दवाओं के ट्रायल जैसे कई उपाय शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2020, 6:22 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) के खिलाफ जंग तेज होती जा रही है. इसके इलाज के लिए-वैज्ञानिकों को सबसे कठिन लड़ाई समय से लड़नी पड़ रही है. हर दिन उन पर कोविड-19 (Covid-19) बीमारी के इलाज के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है. यह वायरस कैसे काम करता है और अब तक इसके इलाज के लिए क्या क्या हो रहा है इस पर खास जानकारी दी जा रही है.

क्या कोरोना वायरस के हमले से हम खुद को बचा सकते हैं?
नोवल कोरोना वायरस या सार्स कोव-2 एक खास स्पाइक यानि नुकीले खूंटो वाले ताज की तरह दिखने वाला एक प्रोटीन से घिरा वायरस होता है. इसका आकार क्राउन की तरह होने के कारण इसे कोरोना वायरस नाम मिला है.  इसी प्रोटीन की वजह से यह मानवीय कोशिकाओं में प्रवेश कर पाता है.





यह नया वायरस (सार्स कोव-2) अपने पूर्ववर्ती कोरोना वायरस सार्स या मर्स से मिलता जुलता है. इसी वजह से वैज्ञानिक उन बीमारियों पर हुए शोध को भी खंगाल रहे हैं. सार्स 2003 में भी सार्स कोव-2 की तरह बीमारी फैलाई थी. दोनों वायरस मानवीय कोशिका के एक नाम ACE2 के प्रोटीन से चिपक जाते हैं. और फिर यह फेफड़ों और छोटी आंतों में फैल जाते हैं.



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कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्प्रसीन सबसे कारगर उपाय माना जा रहा है .तीकात्मक तस्वीर


सार्स कोव-2 की इस घुसपैठ को बढ़ने से रोका जा सकता है यदि उसे ACE2  से जुड़ने से रोक लिया जाए. ऐसा ही हमारा इम्यून सिस्टम भी वायरस को रोकने के लिए करता है. यह एंटीबॉडी बनाता है जो वायरस के स्पाइक को ACE2 पर चिपकने से रोकते हैं. इसके अलावा भी इसे रोकने के कई तरीके हैं.

वैक्सीन है इस तरह की समस्या का सबसे कारगर समाधान
इस समस्या का हमेशा के लिए इलाज है वैक्सीन यानि टीका. वैक्सीन में नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु, जीवाणु आदि का सबसे कमजोर रूप होता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षित कर सकता है यानि उससे लड़ने में मदद कर सकता है. लेकिन इसमें एक खतरा यह भी है कि यह खुद संक्रमण का कारण बन सकता है. लेकिन शोधकर्ता ऐसी वैक्सीन तैयारी करने  रहे हैं जिसमें पूरा वायरस न होकर केवल वही स्पाइक प्रोटीन हो. ऐसी वैक्सीन एड्जूवेंट्स के साथ देने से एंटीबॉडी ताकतवर जवाब देंगी, एड्जूवेंट्स हमारे प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने वाला पदार्थ होता है.

फिलहाल दुनिया में करीब 70 से ज्यादा वैक्सीन को विकसित किया जा रहा है. इनमें से एक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में विकसित एक वैक्सीन भी शामिल है जिसपर गुरुवार को ही ट्रायल शुरू हुआ है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि वैक्सीन अक्टूबर तक विकसित हो सकती है. लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन को लोगों तक पहुंचने में कम से कम 18 महीने लगेंगे.

एक प्रभावी समाधान एंटीबॉडी भी
 किसी खतरनाक बीमारी का एक प्रभावी समाधान यह होता है कि मरीजों में एंटीबॉडी इंजेक्ट की जाएं. एंटीबॉडी संक्रमण से बचे लोगों का प्लाज्मा होता है. वैक्सीन के विपरीत प्लाज्मा हमारे इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षिण नहीं देती, लेकिन इम्यून सिस्टम की सेना का साथ देकर वायरस को कमजोर कर देती हैं. प्लाज्मा थैरेपी का दिल्ली के कुछ मरीजों में प्रयोग किया गया है. इसे मुंबई में प्रयोग किया जाएगा.

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कोरोना से निपटने के लिए दुनिया में ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने पर जोर दिया जा रहा है.


क्या हम वायरस को ही नहीं मार सकते?
इंसानी शरीर के बाहर वायरस के ऊपर के फैट वाली सतह साबुन से धोने पर, या सैनेटाइजर के इस्तेमाल से हट जाती है जिससे यह वायरस जल्दी ही खत्म हो जाता है,लेकिन शरीर के अंदर यह अपने आप खत्म होने के बजाए, अपने जैसे और वायरस बनाने लगता है. अब तक दूसरी बीमारियों के खिलाफ बनी दवाएं कोविड-19 के खिलाफ अधिक प्रभावी नहीं रही हैं.

क्या है यहां दवाओं की संभावना
इसका इलाज ढूंढते समय कुछ दवाओं का भी परीक्षण किया गया. कुछ मलेरिया की दवाओं पर ट्रायल चल रहा है लेकिन उनके नतीजे बहुत उत्साहजनक नहीं हैं. इसके अलावा इन दवाओं  के साइड इफेक्टस भी बहुत जोखिम भरे हैं. इनके अलावा प्रोटीज इनहिबिटर्स हैं, जो एचआईवी या हैपिटाइटिस सी जैसी बीमारियों में उपयोग में लाई जाती हैं. यह वायरस की संख्या को बढ़ने से रोकने में काम आती हैं. इसके अलवा पॉलीमरेस , (इबोला के बनी) रेमडिसिविर , और  (इन्फ्लूएंजा के बनी) फैवीपिराविर जैसी दवाओं का भी भी विभिन्न स्तरों पर ट्रायल चल रहा है.

तो भारत में क्या हो रहा है
भारत में काउंसि ऑफ साइंटिफिक और इंड्रस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने फैविपिराविर का एंड टू एंड सिंथेसिस पूरा कर लिया है. संस्थान के डायरेक्टर जनरल डॉ शेखर सी मंडे ने न्यूज18 को बताया कि अब इस दवा की भारत में टेस्टिंग जल्द शुरू होगी. यह इंफ्लूएंजा के खिलाफ कारगर दवा है और इसका चीन जापान, रूस आदि देशों में ट्रायल चल रहा है. इसके अलावा सेपिस बीमारी में कारगर सेप्सीवाक नाम की दवा का भी सीमित ट्रायल दिल्ली और भोपाल के एम्स और चंडीगढ़ में शुरू करने की इजाजत दी गई है.

(News18.com से पद्मजा वेंकटरमन की रिपोर्ट)

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