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दुनियाभर में कैसे हो रहा है कोरोना के मृतकों का अंतिम संस्कार, क्या है भारत की तैयारी

इस बीमारी से मरने वालों का अंतिम संस्कार भी बहुत सावधानी से हो रहा है

इस बीमारी से मरने वालों का अंतिम संस्कार भी बहुत सावधानी से हो रहा है

कोरोना वायरस (coronavirus) से बढ़ती मौतों को देखते हुए शवदाहगृह (crematorium) चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं. यहां तक कि श ...अधिक पढ़ें

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार पूरी दुनिया में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या लगभग 2 लाख पहुंच चुकी है, वहीं 7,994 मौतें हो चुकी हैं. ऐसे में खांसने, छींकने से फैलने वाली इस बीमारी से मरने वालों का अंतिम संस्कार भी बहुत सावधानी से हो रहा है.

    रहस्यों में है वायरस
    Covid-19 वायरस अब भी रहस्यों के घेरे में है, सिवाय इसके कि वो दिखता कैसा है. 27 फरवरी को पहली बार ये जाना जा सका कि जिससे तमाम दुनिया मुकाबला कर रही है, वो दुश्मन आखिर कैसा दिखता है. इससे पहले कोरोना वायरस के बारे में केवल यही जानकारी थी कि वो राजसी मुकुट की तरह दिखता है, इसी वजह से उसे कोरोना नाम दिया गया, लैटिन भाषा में जिसका अर्थ है मुकुट. इसी 16 मार्च से सिएटल में कोरोना के टीके का ट्रायल शुरू हुआ है लेकिन फिलहाल इसकी सफलता के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता. यहां तक कि वैज्ञानिक ये भी नहीं बता पा रहे हैं कि कोरोना से मौत के बाद वायरस कितनी देर या दिनों तक मृत शरीर में रहता है.

    चीन में तुरंत जलाने का आदेश
    इसे देखते हुए चीन सरकार ने कोरोना संक्रमित मृतकों के शवों को दफनाने की बजाए जलाने के दिशा-निर्देश दिए. अस्पतालों को जारी नोटिस में National Health Commission ने कहा कि मृतकों को जितना जल्दी हो सके, जलाना होगा. परिवार इसकी इजाजत न दे तो भी अस्पताल खुद ये काम करें. मृत शरीर को अस्पताल से हटाते हुए कई औपचारिकाएं पूरी करनी होती है. अगर इन औपचारिकताओं को पूरा करने या कहीं भी हस्ताक्षर करने से परिवार के सदस्य आनाकानी करें, तो अस्पताल को ये अधिकार है कि वो खुद मृतक का अंतिम संस्कार कर दे. इसके पीछे ये सोच भी रही कि जलाना दफनाने से कम समय लेने वाली प्रक्रिया है. और चीन में कोरोना का संक्रमण और उससे होने वाली मौतें जितनी तेजी से बढ़ीं, उन हालातों में दफनाने की प्रक्रिया अपनाना व्यवहारिक रूप से मुमकिन नहीं थी.

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    अस्पताल को ये अधिकार है कि वो खुद मृतक का अंतिम संस्कार कर दे


    सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा
    लेकिन चीनी सरकार के इस सख्त रवैये पर आम लोगों का गुस्सा भी सोशल मीडिया पर दिखा. मृतकों के परिवार वाले सोशल मीडिया पर बताते दिखे कि कैसे शव को जलाने पर उनकी रजामंदी न होने के बाद भी अस्पताल वालों ने उन्हें दफनाने की बजाए जला दिया. बाद में ये सारी पोस्ट सेंसर्ड हो गईं और वॉल से गायब हो गईं. वैसे कोरोना वायरस के शुरुआती मामलों में चीन सरकार ने अंतयेष्टि पर कोई खास पाबंदी नहीं लगाई थी, सिवाय इसके कि अंतिम क्रिया जल्दी होनी चाहिए और ज्यादा लोग न जुटें लेकिन मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ सरकार को सख्ती लगानी पड़ी.

    शवदाहगृह कर रहे चौबीसों घंटे काम
    Covid-19 के मामले में इटली दूसरे नंबर पर आ चुका है. यहां अबतक 31 हजार से ज्यादा मामले और ढाई हजार से ज्यादा मौतें रिकॉर्ड में हैं. मरीजों के इलाज और संक्रमण रोकने के अलावा एक चुनौती ये भी है कि मृतकों का अंतिम संस्कार कैसे हो. इटली में ऐसे भी मामले आए हैं, जहां दाह-संस्कार स्थल ने भी अपने यहां मृतक को जलाने से इनकार कर दिया है. इटली के शहर Bergamo, जहां कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है, के हालात और भी खराब हैं. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस शहर के शवदाहगृह चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं. यहां तक कि शवों को जलाने के लिए वेटिंग लिस्ट तैयार हो चुकी है. अस्पतालों के मुर्दाघरों में मृतकों के शव बॉडी बैग में अपनी पारी का इंतजार करते पड़े हैं. बता दें कि 8 मार्च से इटली में सख्त लॉकडाउन हो चुका है. ऐसे में मृतक की अंतिम क्रिया के दौरान भी 10 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं.

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    अस्पतालों के मुर्दाघरों में मृतकों के शव बॉडी बैग में अपनी पारी का इंतजार करते पड़े हैं


    शवों को रखा जा रहा बॉडी बैग में
    WHO के दिशा-निर्देशों के आधार पर लगभग सभी देशों में कोविड-19 संक्रमण से मरे लोगों की अंतिम क्रिया पर गाइडलाइन तैयार हो चुकी है. इसके तहत मृतक को आइसोलेशन रूम से बाहर अंतिम संस्कार के लिए ले जाते वक्त किन बातों का पालन किया जाए, ये सब बताया गया है. हर काम करते हुए ध्यान रखना है कि किसी भी तरह से मृतक के शरीर का कोई भी द्रव्य हमारे संपर्क में न आए. मौत के बाद मृत शरीर को बिना छुए पूरी सावधानी से बॉडी बैग में डालना होता है. ये बॉडी बैग इस तरह से तैयार किए गए हैं कि इनमें किसी भी तरह से शरीर का कोई द्रव्य बाहर लीक न हो, जैसे, खून, या बगलम. इसके अलावा पोस्टमार्टम स्टाफ या मेडिकल स्टाफ को पूरी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है. उनके पास डिस्पोजेबल, पूरी आस्तीन वाले गाउन होने चाहिए. ये गाउन वॉटरप्रूफ भी होने चाहिए ताकि अगर मृत शरीर से स्टाफ का कोई संपर्क हो भी तो वायरस शरीर में प्रवेश न कर सकें. प्रक्रिया पूरी होने के बाद गाउन को तुरंत नष्ट करना होता है.

    क्या है भारत की तैयारी
    पिछले दिनों दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद उसके दाह संस्कार को लेकर काफी विवाद हुआ था. इसी के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Ministry of Health) ने एक गाइडलाइन तैयार की.

    गाइडलाइन के अनुसार अगर Covid-19 संक्रमण से किसी की मौत होती है तो उसके परिवारवाले और मित्र मृतक के अंतिम दर्शन तो कर सकते हैं लेकिन किसी भी तरह से उसके पास नहीं जा सकते. यानी मृत शरीर को छूना, चूमना या गले लगाना एकदम मना है.

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    पोस्टमार्टम स्टाफ या मेडिकल स्टाफ को पूरी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है


    इसके अलावा कई रीति-रिवाजों का भी पालन नहीं किया जा सकता. मसलन कई धर्मों में मृतक को नहला-धुलाकर उसके शरीर पर सुगंधित लेप किया जाता है, सजाया जाता है और नए कपड़े पहनाए जाते हैं. इसकी सख्त मनाही है.

    यहां तक कि किसी भी जांच के लिए शव की ऑटोप्सी यानी चीरफाड़ भी नहीं की जा सकेगी क्योंकि इस दौरान चीरफाड़ करने वालों के वायरस की चपेट में आने का खतरा होता है. लेकिन ऑटोप्सी अगर एकदम ही जरूरी हो तो स्वास्थ्य कर्मचारी इंफेक्शन रोकने के सारे उपाय अपनाते हुए ही ऑटोप्सी करेंगे.

    गाइडलाइन में यह भी साफ है कि अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा नहीं हो सकते. ज्यादा लोगों के जमा होने पर सोशल डिस्टेंसिंग का नियम टूट सकता है और हो सकता है कि आने वाले लोग भी किसी तरह से संक्रमित हो जाएं.

    अब भी ये साफ नहीं हो सका कि मृत शरीर में कोरोना वायरस कितने समय तक रहते हैं. ऐसे में World Health Organization (WHO) का कहना है कि शव को ठीक तरह से दफनाया या जलाया जाना चाहिए.

    भारत में हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि कोरोना के मृतक के अंतिम दर्शन के लिए बॉडी बैग को केवल एक ही बार खोला जा सकता है और ये काम भी सिर्फ मेडिकल स्टाफ ही कर सकता है, न कि परिवार के लोग. इस दौरान धार्मिक रिवाज जैसे कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़ना या फिर शरीर पर गंगाजल छिड़कना जैसे नियमों की इजाजत है क्योंकि इनमें शरीर को छूने की जरूरत नहीं पड़ती है.

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    Tags: China, Corona, Corona Virus, Italy, WHO

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