CoronaVirus: इस उम्र के लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

CoronaVirus: इस उम्र के लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा
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चीन (China) से होते हुए कोरोना वायरस (corona virus) दुनिया के 61 देशों में पहुंच चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 1, 2020, 11:43 AM IST
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चीन में शुरू हुआ कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया में पैर पसार चुका है. इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी (AFP) ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि चीन से होते हुए यह वायरस दुनिया के 61 देशों में पहुंच चुका है. हजारों मौतों के बीच ये भी देखा गया कि कोरोना वायरस का खतरा एक निश्चित उम्र के लोगों को ज्यादा है.

AFP ने 29 फरवरी को एक आंकड़ा दिया, जिसके अनुसार लगभग 86 हजार लोग कोरोना वायरस  से प्रभावित हैं और 3000 से ज्यादा की मौत हो चुकी है. हालांकि कुल मौतों पर अब भी कोई पक्का डेटा जारी नहीं हो सका है. दूसरी ओर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) ने कोरोना वायरस पर रिस्क एसेसमेंट करते हुए ये देखने की कोशिश की कि इसका खतरा किन्हें ज्यादा है.

इसके शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि चीन में ही जो लोग इस खतरनाक वायरस से जूझ रहे हैं, उनमें से अधिकतर मरीज बुजुर्ग हैं, जो पहले से ही किसी न किसी किस्म की दिल की बीमारी का भी शिकार हैं, जैसे हाइपरटेंशन. फरवरी के मध्य में चीन में ही लगभग 70 हजार मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया. इसमें देखा गया कि लगभग 44,700 मरीजों में से 80 प्रतिशत लोगों की उम्र कम से कम 60 साल से ज्यादा थी और इसमें से भी आधे मरीज 70 साल या इससे अधिक उम्र के थे.



कोरोना का खतरा एक निश्चित उम्र के लोगों को ज्यादा है (प्रतीकात्मक फोटो)

ये स्टडी China CDC Weekly में प्रकाशित हुई. चीन से बाहर दूसरे देशों में मिलते-जुलते आंकड़े नजर आते हैं. जैसे इटली में सामने आए पहले 12 मरीजों में से सभी 80 साल की उम्र के आसपास थे. इनमें से कइयों को दिल की बीमारी थी.

स्टडी में सबसे दिलचस्प तथ्य बच्चों को लेकर सामने आया. इसके अनुसार बच्चों को कोरोना का खतरा बहुत कम है. चीन में हुई प्राथमिक स्टडी में पाया गया कि 10 से 19 साल के बच्चों में केवल 1 प्रतिशत ही संक्रमण से प्रभावित निकले. वहीं 10 से कम उम्र के बच्चों में ये इंफेक्शन 1 प्रतिशत से भी कम दिखा और कोई भी मौत रिपोर्ट नहीं की गई.

इस बारे में US National Institute of Health's Fogarty International Centre के एपिडेमियोलॉजिस्ट Cecile Viboud ने कहा कि हम अभी ये समझने की कोशिश में हैं कि 20 साल से कम उम्र के लोगों में वायरस का खतरा कम रहने की क्या वजह हो सकती है. Cecile के अनुसार ये हैरानी की बात है कि बच्चों में इसका खतरा कम है, जबकि श्वसन तंत्र या फेफड़ों से जुड़ी दूसरी सारी बीमारियों को खतरा बच्चों में ही सबसे ज्यादा दिखता है. वहीं कोरोना भी फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है लेकिन बच्चे इससे अपेक्षाकृत सुरक्षित नजर आ रहे हैं.

चीन में ही लगभग 70 हजार मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया (प्रतीकात्मक फोटो)


इससे पहले भी साल 2002-03 में SARS जैसी जानलेवा बीमारी फैली थी लेकिन कमउम्र बच्चों में इसका खतरा भी कम देखा गया. Severe acute respiratory syndrome के नाम से जानी जाने वाली इस बीमारी से भी हजारों जानें गईं, जिसमें बच्चों का प्रतिशत नहीं के बराबर दिखा. बता दें कि सार्स भी कोरोना वायरस फैमिली से आता है, जिससे अकेले चीन के एक प्रांत Guangdong में 774 से ज्यादा जानें गईं और हजारों मरीज संक्रमित पाए गए. हाालंकि वैज्ञानिकों का बड़ा तबका ये भी मानता है कि सार्स के कारण हुई मौतों का असल आंकड़ा सामने नहीं आ सका क्योंकि इससे मरीज कोरोना की तरह तेजी से नहीं मरता, बल्कि धीरे-धीरे मौत होती है.

शोध में ये भी पता चला है कि बड़ी उम्र के लोगों, पहले से ही बीमारी लोगों और दिल की बीमारी जैसे हाइपरटेंशन के मरीजों के अलावा बीमारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल टीम को भी संक्रमण का बहुत खतरा है. रिपोर्ट के अनुसार अब तक 3019 स्वास्थ्यकर्मी इसके शिकार हो चुके हैं, वहीं कइयों की जानें जा चुकी हैं.

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