Coronavirus: आईआईटी रुड़की ने बनाया कम कीमत वाला पोर्टेबल वेंटिलेटर, जानें खासियत

Coronavirus: आईआईटी रुड़की ने बनाया कम कीमत वाला पोर्टेबल वेंटिलेटर, जानें खासियत
केरल में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 306 पहुंच गई है. (सांकेतिक फोटो)

कोरोना वायरस (Coronavirus) से मुकाबले के लिए आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के शोधकर्ताओं ने महज 25,000 रुपये कीमत वाला वेंटिलेटर (Ventilator) बनाया है. प्राणवायु नाम के इस वेंटिलेटर को एक से दूसरे वार्ड में आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 4, 2020, 12:59 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया में अब तक 11,18,059 लोगों को संक्रमित कर चुका है. इनमें 59,206 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, 2,29,153 लोग संक्रमण से उबरकर घर लौट चुके हैं. इलाज के दौरान बड़ी संख्‍या में लोगों को वेंटिलेटर (Ventilator) की जरूरत पड़ी है. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में इस समय केवल 48,000 वेंटिलेटर मौजूद हैं. इसमें भी ज्‍यादातर वेंटिलेटर्स का इस्‍तेमाल पहले से आईसीयू (ICU) में भर्ती दूसरी बीमारियों के मरीजों के इस्‍तेमाल में हो रहा है. ऐसे में अगर देश में कोरोना वायरस तेजी से फैला तो वेंटिलेटर्स की किल्‍लत हो जाएगी. इसको ध्‍यान में रखते हुए देश के अलग-अलग हिस्‍सों में इंजीनियर्स और रिसर्चर्स सस्‍ते वेंटिलेटर्स बनाने में जुटे हैं. इस बीच आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के शोधकर्ताओं ने कम कीमत वाला वेंटिलेटर तैयार कर लिया है.

एम्‍स के साथ मिलकर बनाए वेंटिलेटर में है रिमोट मॉन‍िटरिंग सुविधा
आईआईटी रुड़की के बनाए क्लोज-लूप वाले इस वेंटिलेटर को कम्प्रेस्ड एयर की जरूरत नहीं होगी. इसकी वजह से जब आईसीयू में वार्ड बदला जाता है तो यह काफी आसान होता है यानी ये वेंटिलेटर पोर्टेबल होगा. आईआईटी रुड़की ने इस वेंटिलेटर का नाम प्राणवायु रखा है. यह कम कीमत वाला वेंटिलेटर एम्स (AIIMS) के साथ मिलकर बनाया गया है. इसके फीचर्स काफी अच्छे हैं. आईआईटी रुड़की का कहना है कि इस वेंटिलेटर की रिमोट मॉनिटरिंग की जा सकती है. साथ ही इसमें टच स्क्रीन कंट्रोल भी दिया गया है. इसकी मदद से मरीज को दी जाने वाली एयर का तापमान भी कंट्रोल किया जा सकता है. इसके प्रेशर और फ्लो रेट को ऑटोमेटेड प्रोसेस से कंट्रोल किया जाता है. आईआईटी रुड़की के मुताबिक, इस वेंटिलेटर की कीमत सिर्फ 25,000 रुपये है.

आईआईटी रुड़की का कहना है कि इस वेंटिलेटर की रिमोट मॉनिटरिंग की जा सकती है.




पुणे में युवा इंजीनियर्स बना रहे हैं 50 हजार रुपये का वेंटिलेटर


महाराष्‍ट्र के पुणे में भी कुछ युवा इंजीनियर कोरोना वायरस को हराने के लिए सस्‍ता वेंटिलेटर बनाने में जुटे हैं. पुणे की जो कंपनी नोक्का रोबोटिक्स ये वेंटिलेटर बनाने की कोशिश कर रही है, उसमें काम करने वाले मेकैनिकल, इलेक्ट्रॉनिक और एरोस्पेस इंजीनियर्स की औसत उम्र 26 साल है. कंपनी का अनुमान है कि उनके वेंटिलेटर की कीमत महज 50,000 रुपये होगी. वहीं, डीआरडीओ निदेशक डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने बताया कि संस्थान में कोरोना वायरस से बचाव के लिए युद्धस्तर पर रात-दिन N99 मास्क बनाए जा रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि किसी भी स्तर पर इसकी कमी नहीं होने दी जाएगी. दिल्ली पुलिस को अभी तक 40 हजार मास्क की सप्लाई की जा चुकी है. दिल्ली पुलिस समेत देशभर में डीआरडीओ ने एक लाख लीटर सैनेटाइजर की सप्लाई भी की है.

डीआरडीओ ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे एक वेंटिलेटर से एक बार में चार मरीजों को मदद दी जा सकती है.


डीआरडीओ के वेंटिलेटर से 4 मरीजों को दी जा सकेगी मदद
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) भी कोरोना वायरस से बचाव के लिए देश के अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी को दूर करने के लिए आगे आया है. डीआरडीओ ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे एक वेंटिलेटर से एक बार में चार मरीजों को मदद दी जा सकती है. डीआरडीओ के डायरेक्‍टर का कहना है कि इसके लिए हम नया वेंटिलेटर नहीं बनाया जा रहा है. डीआरडीओ पहले से मौजूद वेंटिलेटर में कुछ बदलाव कर रहा है. इस तरह कोरोना वायरस से संक्रमित किसी भी मरीज को वेंटिलेटर की कमी नहीं होने दी जाएगी. इसके अलावा डीआरडीओ 20,000 पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (PPE) हर दिन बनाने की तैयारी में भी जुट गया है ताकि मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्‍टरों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाया जा सके.

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