कोरोना के मामलों की घटती संख्या और रिकवरी रेट में वृद्धि का भारत के लिए क्या है मतलब?

(REUTERS/Anushree Fadnavis/Files- NEWS18.COM)
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Mohfw) के आंकड़ों के अनुसार देश में फिलहाल 7.88 फीसदी केस एक्टिव हैं जबकि ठीक और डिस्चार्ज हो चुके लोगों की संख्या 90.62 फीसदी है. वहीं 1.50 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है.

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  • Last Updated: October 27, 2020, 12:57 PM IST
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नई दिल्ली. देश में कोरोना के मामलों के सामने आने की रफ्तार कम हो रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में फिलहाल 7.88 फीसदी केस एक्टिव हैं जबकि ठीक और डिस्चार्ज हो चुके लोगों की संख्या 90.62 फीसदी है. वहीं 1.50 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,19 502 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 72,01,070 लोग ठीक हो चुके हैं और 6,25,857 केस एक्टिव है. मौजूदा आंकड़ों के संदर्भ में हम कुछ सवालों के जवाब खोजने की कोशिश करते हैं और यह पता लगाएंगे कि भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?

कोरोना के मामलों की घटती संख्या और रिकवरी रेट में वृद्धि का भारत के लिए क्या है मतलब?
देश में जून और सितंबर के बीच कोरोना वायरस (Corona virus) के मामलों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के बाद संक्रमण के नए मामले सितंबर के तीसरे सप्ताह से गिरना शुरू हो गए. यूरोपीय देशों (European Countries) और अमेरिका (America) के विपरीत, भारत में यह संक्रमण अपनी चरम सीमा पर बहुत बाद में पहुंचा, लेकिन नए मामलों में गिरावट के पीछे संभावित कारण क्या हो सकते हैं और क्या संक्रमण में गिरावट त्योहारों और सर्दियों के दिनों में और होगा? आइए न्यूज 18 की इस खबर के माध्यम से जानते हैं...

देश में कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति
बता दें कि देश ने 26 अक्टूबर तक कोरोना के 79,11,104 मामले दर्ज किए हैं जिनमें से 6,55,935 सक्रिय केस हैं. वहीं 71,34,769 यानी 90 फीसदी लोग ठीक हो चुके हैं. हालांकि देश में कोरोना से 1,19,507 लोग जान गंवा चुके हैं लेकिन कोरोना की सबसे ज्यादा मृत्युदर ब्राजील और अमेरिका में हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, देश में सोमवार को मृत्युदर 1.5 फीसदी है जो मार्च से अब तक सबसे कम है. वहीं, देश के 14 राज्यों जिसमें बिहार, असम, केरल, आंध्रप्रदेश और राजस्थान में मृत्युदर 1 फीसदी से भी कम है.



कोरोना के मामलों का उतार-चढ़ाव
कई यूरोपीय देशों के विपरीत, भारत में नए पुष्ट मामले मई और सितंबर के बीच लगभग चार महीनों की अवधि में धीरे-धीरे ही बढ़े हैं जबकि अगस्त और सितंबर में इनमें थोड़ी तेजी दर्ज की गई थी. 17 अगस्त को देश ने 55,079 मामले दर्ज किए और अगले सात दिन के औसत मामले 62,010 थे. एक महीने बाद 16 सितंबर को देश ने 97,894 मामले दर्ज किए जो नए दैनिक रिकॉर्ड किए गए मामलों में अब तक सबसे ज्यादा थे. वहीं, 16 सितंबर को सात दिन का औसत 93,199 था. 16 सितंबर से नए पुष्ट मामलों में गिरावट दर्ज होने लगी थी और 25 अक्टूबर को नए मामलों की सात दिन का औसत 51,384 था.

कोरोना मामलों में गिरावट के संभावित कारण
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इसके बारे में पूछे जाने के बावजूद सरकार ने अब तक देशभर में नए पुष्ट संक्रमणों की गिरावट पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है. जबकि, विशेषज्ञों ने देश में कोरोना के मामलों की चरम सीमा को पार करने पर अपने आकलन और सुराग पेश किए हैं. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा लगता है कि अतिसंवेदनशील लोगों की एक बड़ी आबादी संचरण में गिरावट की ओर अग्रसर है.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अशोक विश्वविद्यालय में भौतिकी और जीव विज्ञान के प्रोफेसर ने गौतम मेनन ने कहा, 'यह तस्वीर एक ऐसी बीमारी की है जिसने बड़े पैमाने पर प्रमुख भारतीय शहरों में अतिसंवेदनशील लोगों के मामलों में कमी लाई है जहां वायरस अब बड़े पैमाने पर विकसित होना बंद हो गया है, लेकिन भारत में अभी भी बड़े पैमाने पर ग्रामीण हिस्सों में अतिसंवेदनशील लोगों की बड़ी संख्या है जो कोविड-19 के जोखिम में हैं.
वहीं, ग्रामीण भारत में शहरों की तुलना में मधुमेह या कार्डियो-संवहनी रोग जैसे कॉमरेडिटी वाले लोगों की अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं, इस तरह की सह-रुग्णताएं संक्रमण और बीमारी पर प्रतिकूल परिणामों के जोखिम को बढ़ाती हैं.'

वायरस कंटेनमेंट रणनीति में बदलाव
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए पुष्ट मामलों में गिरावट के बावजूद, रोकथाम की नीतियां, परीक्षण, ट्रैकिंग, उपचार और नियंत्रण को जारी रखने को कहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को त्योहारों के दौरान परिवारों के भीतर मंडली से बचने की भी चेतावनी दी है और मास्क के लगातार उपयोग की सलाह दी है. यह भी कहा कि वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को मास्क का इस्तेमाल करने के बारे में विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है और वे हाथों को अच्छी तरह से साफ करें ताकि वे संक्रमण की चपेट में न आएं.
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