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भारत के पड़ोसियों में पाकिस्तान को छोड़ बाकी मुल्कों में है कोरोना पर काबू, जानें कैसे

News18Hindi
Updated: April 1, 2020, 6:33 PM IST
भारत के पड़ोसियों में पाकिस्तान को छोड़ बाकी मुल्कों में है कोरोना पर काबू, जानें कैसे
पाकिस्तान की इमरान सरकार अब भी लॉकडाउन से बच रही है

पाकिस्‍तान में कोरोना पॉजिटिव (corona positive) मरीजों की संख्‍या बढ़कर 2,042 हो गई है. भारत के पड़ोसी देशों में ये आंकड़ा सबसे ज्यादा है. जानें, आखिर किस वजह से पाकिस्तान (Pakistan) इस पर कंट्रोल में असफल हो रहा है.

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एक तरफ जहां दुनिया के ज्यादातर मुल्क लॉकडाउन में हैं, वहीं पाकिस्तान की इमरान सरकार अब भी लॉकडाउन से बच रही है. उनका मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा और 25 फीसदी जनता को खाने की भी तंगी हो जाएगी. लेकिन इसी बीच वहां पर वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ा है.

पाकिस्तान में 5 हफ्ते पहले कोरोना वायरस का पहला केस दर्ज किया गया था और पिछले 1 हफ्ते में कोरोना पॉजिटिव केस बढ़े हैं. पाकिस्तान में कुछ दिनों पहले तबलीगी जमात का कार्यक्रम हुआ, जहां हजारों लोग इकट्ठा हुए. बाद में जांच में अब तक 30 लोग कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हो रही है लेकिन लोग पकड़ में नहीं आ सके हैं. इसके बाद से इमरान सरकार की लगातार आलोचना हो रही है. वहीं सरकार का कहना है कि कोरोना संकट को देखते हुए उन्होंने जमात के धर्मगुरुओं से यह बैठक कैंसिल करने की अपील की लेकिन जमात ने उनकी नहीं मानी. ग्लोबल खतरे पर सरकार के ऐसे कमजोर तर्क पर ये भी पूछा जा रहा है कि जलसे में शिरकत करने वालों की स्क्रीनिंग क्यों नहीं करवाई गई.

हो रहे इंतजाम
इधर लगातार बढ़ रहे आंकड़ों के बीच पीएम इमरान का कहना है कि वे कोरोना रिलीफ टाइगर फोर्स (Corona Relief Tiger Force) बना रहे हैं ताकि अगर कंप्लीट लॉकडाउन हो तो दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों को खाना मिल सके. सरकार ने International Monetary Fund से भी आर्थिक मदद मांगी है. इमरान से पहला केस आने के बाद से तीसरी बार जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हम सबको खाना नहीं दे सकते इसलिए हम लॉकडाउन भी नहीं कर सकते हैं. हालांकि यहां पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिलहाल 4 अप्रैल तक के लिए बंद हैं. इस बीच चीन से भी मदद ली जा रही है. बता दें कि अब तक देश की 207 मिलियन की आबादी में से लगभग साढ़े 7 हजार टेस्ट ही किए गए हैं. इस पर National Disaster Management Authority (NDMA) का कहना है कि आने वाले दिनों में चीन से 50 हजार के लगभग टेस्ट किट आएंगे ताकि ज्यादा लोगों की जांच हो सके.



वहां पर वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ा है




चीन ने किया काबू
भारत के पड़ोसी देश चीन से ही दिसंबर के अंत में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी. चीन के हुबई प्रांत के वुहान शहर में पहला मामला आने के बाद से संक्रमण तेजी से बढ़ा और कुछ ही हफ्तों में यहां संख्या हजारों में पहुंच गई. ताजा आंकड़े बताते हैं कि अब तक यहां 81,554 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं. वहीं 3,312 लोगों की मौत हो चुकी है. माना जा रहा है कि वायरस (Coronavirus) फैलने के शुरुआती दौर में चीन (China) इसके असर का सही आकलन नहीं कर पाया. इससे बीमारी बढ़ी. लेकिन कोरोना वायरस की भयंकरता का अंदाजा लगने के साथ ही हुबई प्रांत को सील कर दिया गया. यहां के अस्पतालों में काम करने के लिए देशभर से डॉक्टर बुलाए गए. मरीजों की बढ़ती संख्‍या को ध्‍यान में रखकर रातों-रात 1,000 बेड की क्षमता वाला हॉस्पिटल तैयार कर दिया. सिर्फ हुबेई प्रांत में ही एक दर्जन से ज्‍यादा अस्‍थायी कोरोना वायरस अस्‍पताल बना डाले. हालांकि चीन से आने-जाने वाले सैलानियों या पढ़ने वालों की वजह से संक्रमण दुनियाभर के दूसरे देशों में फैल गया.

अफगानिस्तान के क्या हैं हाल
यहां पर कुल 196 मामले आज तक आए हैं. सबसे पहले 24 फरवरी को सबसे पहला मामला आया था. जिसके बाद से केस बढ़ते जा रहे हैं. अफगानिस्तान के हेल्थ मिनिस्टर Ferzoddin Feroz ने कोविड-19 पर चिंता जताते हुए कहा कि यहां केस बहुत बढ़ने का डर है, खासकर काबुल में. यही वजह है कि पश्चिमी अफगानिस्तान, जो कि ईरान से सटा हुआ है, की सीमाओं को आनन-फानन सील कर दिया गया. बता दें कि ईरान फिलहाल मिडिल ईस्ट में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है, जहां लगभग 33 हजार मामलों के साथ ढाई हजार से ज्यादा मौतें दर्ज हो चुकी हैं. ईरान में काम कर रहे 1 लाख से ज्यादा मजदूर भागकर अफगानिस्तान लौटे. इससे यहां पर वायरस फैलने का खतरा और भी ज्यादा हो गया. ऐसे में तेजी से टेस्ट पर काम शुरू हुआ. काबुल में यहां पहली लैब है, जहां कोरोना का टेस्ट होता है. साथ ही हेरात में भी आननफानन एक नई लैब बनकर तैयार है. ईरान से लौटने वाले का तुरंत टेस्ट होता है और स्वस्थ पाए जाने पर ही उन्हें लिखित अनुमति के साथ अस्पताल से छोड़ा जाता है. कोरोना की जांच और इलाज के लिए प्रेसिडेंट Ashraf Ghani ने $25 मिलियन के फंड की घोषणा की है. दूसरे देशों से भी आर्थिक सहायता मांगी जा रही है.

चीन से आने वाले दिनों में टेस्ट किट आएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच हो सके


भूटान में संभला हुआ है मामला
भारत के पड़ोसी देश भूटान में अब तक COVID-19 के 4 केस आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार कोरोना पॉजिटिव ये मरीज स्टूडेंट है, जिनकी फॉरेन हिस्ट्री है. Ministry of Health ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी. बाहर से आए या मरीज से मिले अधिकांश लोग क्वारेंटाइन में रखे गए हैं. इससे पहले कोरोना पॉजिटिव मिले दोनों मरीज यूएसए से हैं. यहां के प्राइम मिनिस्टर Lotay Tshering ने 23 मार्च से अपने देश के बॉर्डर सील करवा दिए. फिलहाल लगभग 9 लाख की आबादी वाले इस देश ने पान के पत्तों समेत फल, सब्जियों और मांस के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. सिर्फ अनाज, दवा, टेस्ट किट और ईंधन ही देश में आ सकता है.

नेपाल ने की सीमाएं बंद
चीन और भारत की सीमा से लगे देश नेपाल में अब तक कोरोना के 5 मामले ही दर्ज हुए हैं. कड़े लॉकडाउन के बीच नेपाल ने 21 मार्च से भारत के लिए अपनी सीमाएं सील कर दी हैं. इससे पहले नेपाल और भारत ने अपने देशों के बॉर्डर एक-दूसरे के लिए खुले रखने का निर्णय लिया था. लेकिन फिर लगभग 1800 किलोमीटर बॉर्डर पर किसी की तैनाती न होने और दोनों देशों के लोगों की लगातार आवाजाही से घबराकर नेपाल कैबिनेट ने अपनी सीमा को बंद करने को निर्णय लिया. ये खबर Kathmandu Post में छपी है.

चीन से ही दिसंबर के अंत में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी


नया साल नहीं मनाएंगे बांग्लादेशी
बांग्लादेश में अब तक 54 लोग कोविड-19 पॉजिटिव मिले हैं. यहां पर 26 मार्च से शुरू हुआ लॉकडाउन 9 अप्रैल तक रहने वाला है. स्थानीय कयासों के अनुसार ये आगे भी बढ़ सकता है. चीन और भारत का पड़ोसी देश होने की वजह से यहां पर कोरोना के खिलाफ पहले ही कदम उठा लिए गए. हेल्थ मिनिस्टर Zahid Malik के अनुसार देश के सरकारी अस्पतालों में 500 वेंटिलेटरों की व्यवस्था है और 300 वेंटिलेटर दूसरे देशों से खरीदे जा रहे हैं. इसके अलावा निजी अस्पतालों के पास भी 700 वेंटिलेटर हैं, जिन्हें इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने अफसरों से कहा कि वे बंगाली नया साल पोइला बैशाख (14 अप्रैल) मनाने के लिए कोई भी कार्यक्रम न करें. साथ ही हसीना ने यह भी कहा कि ट्रैवल पर लगी पाबंदियां भी एक साथ खत्म नहीं की जाएंगी.

म्यांमार पहले था वायरस-फ्री
म्यांमार में अब कोरोना पॉजिटिव मामले बढ़कर 15 हो चुके हैं, जबकि 2 ही हफ्तों पहले तक ये देश खुद को वायरस-फ्री बता रहा था. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे एक टाइटल तक दे दिया था- most populous country yet to report any infections यानी सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में कोई संक्रमण नहीं. मीडिया के लगातार संदेह पर कि छोटे देश कैसे संक्रमण मुक्त हो सकते हैं- म्यांमार ने 23 मार्च को अपने यहां पहला मामला दर्ज किया. कोरोना पॉजिटिव हुए लोगों में अधिकतर की ट्रैवल हिस्ट्री रही है. शुरुआती मामले के बाद ही देश ने अपनी सीमाएं बंद कर दीं और लोगों को होम क्वारेंटाइन होने को कह दिया. इसके बाद से यहां की 54 मिलियन आबादी होम क्वारेंटाइन है. हालांकि म्यांमार में भी अब कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ता महसूस हो रहा है. यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 30 मार्च को कहा कि थाइलैंड से चूंकि हजारों की संख्या में मजदूर वापस लौट रहे हैं इसलिए हो सकता है कि देश में भी बीमारी का विस्फोट हो.

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First published: April 1, 2020, 6:16 PM IST
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