भारत में कोरोना से उम्रदराज लोगों की तुलना में युवा ज्यादा संक्रमित

भारत में कोरोना से उम्रदराज लोगों की तुलना में युवा ज्यादा संक्रमित
युवाओं को कोरोना वायरस के संक्रमण का ज्यादा खतरा है

देश में कोरोना वायरस (coronavirus) का खास ट्रेंड नजर आ रहा है. इसके अनुसार 21 से 40 साल के युवाओं में संक्रमण का प्रतिशत सबसे ज्यादा है.

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लॉकडाउन के बावजूद भारत में कोरोना का मामला साढ़े 4000 पार कर चुका है. वहीं मरने वालों का आंकड़ा भी 111 हो चुका है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी हुए इन आंकड़ों से यह भी दिखता है कि इससे प्रभावित लोगों में 41.9% लोग 21 से 40 साल की उम्र के बीच हैं. इसके अलावा 32.8% मरीजों की उम्र 41 से 60 के बीच रही. वहीं केवल 16.7% लोग ही 60 से अधिक उम्र के हैं.

क्या लगता था शुरुआत में
भारत में जारी ये आंकड़े दूसरे देशों में कोरोना के ट्रेंड से काफी मिलते-जुलते हैं. हालांकि इससे ये भी साफ है कि कोरोना का खतरा सिर्फ उम्रदराज लोगों को नहीं, बल्कि युवाओं में इसके संक्रमण का ज्यादा डर है. इससे पहले चीन में हुई स्टडीज बताती थीं कि बुजुर्गों को ही इसका सबसे ज्यादा खतरा है. फरवरी के मध्य में चीन में ही लगभग 70 हजार मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया गया. इसमें देखा गया कि लगभग 44,700 मरीजों में से 80 प्रतिशत लोगों की उम्र कम से कम 60 साल से ज्यादा थी और इसमें से भी आधे मरीज 70 साल या इससे अधिक उम्र के थे.ये स्टडी China CDC Weekly में प्रकाशित हुई.

बाद के नतीजे अलग रहे



इसके बाद इटली से भी मिले-जुले ट्रेंड आते रहे लेकिन हाल ही में कोरोना मरीजों का औसत निकालने पर चौंकाने वाले नतीजे मिले. इसके अनुसार कोरोना संक्रमित कुल मरीजों में से एक तिहाई लोगों की उम्र 19 से 50 के बीच है. इसके बाद यूएस में भी पहले 4,226 मरीजों में से हर 5 में से 1 की उम्र 20 से 44 के बीच देखी गई. कैलीफोर्निया में भी यही नजर आया.



युवाओं में कोरोना से मरने की दर कम है लेकिन बीमार होने का खतरा उनमें ज्यादा ही है


क्या कहता है WHO
World Health Organization (WHO) ने रिस्क एसेसमेंट करने पर पाया कि युवाओं को कोरोना वायरस के संक्रमण का ज्यादा खतरा है. इसपर सैन फ्रांसिस्को में Department of Epidemiology and Biostatistics की प्रमुख Kirsten Bibbins-Domingo कहती हैं कि ये खतरे की घंटी है. इससे पहले युवा सोच रहे थे कि कोरोना वायरस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता और इसलिए वे लॉकडाउन के बाद भी लापरवाही बरत रहे हैं. युवाओं में कोरोना से मरने की दर कम है लेकिन बीमार और गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा उनमें ज्यादा ही है.

युवा फैला रहे वायरस
दक्षिण कोरिया, जहां पर लगातार टेस्ट हो रहे हैं, वहां के नतीजे और भी डरावने हैं. देखा गया कि 27% कन्फर्म मामलों के मरीज 20 से 25 की उम्र के हैं. ये बीमारी के बड़े वाहक हैं. इसकी सबसे ज्यादा खतरनाक बात ये है कि इनमें से बहुत ही कम लोगों में लक्षम दिखते हैं. ऐसे में अनजाने में ही ये लोग दूसरों से मिलते हुए अपनी बीमारी उन्हें दे रहे हैं.

जारी हुआ अलर्ट
कोरोना के लगातार खतरों के बीचWHO के हेडक्वार्टर जिनेवा में एक ऑनलाइन न्यूज कॉन्फ्रेंस हुई. इस दौरान इसके चीफ Tedros Adhanom Ghebreyesus कहते हैं- वैसे तो बड़ी उम्र के लोग इस वायरस का शिकार ज्यादा हैं लेकिन युवा लोग भी इससे बचे हुए नहीं हैं. जवान और पूरी तरह से स्वस्थ लगने वाले लोगों को भी ये वायरस चपेट में ले सकता है और हफ्तों अस्पताल में रख सकता है. हो सकता है कि संक्रमण ज्यादा होने पर मौत भी हो जाए. अगर जवान लोग उतने बीमार नहीं भी हो रहे तो भी वो बीमारी के वाहक का काम कर सकते हैं.

बुजुर्गों में संक्रमण होने पर उनकी हालत गंभीर हो जाती है और उनकी मृत्युदर भी ज्यादा है


उम्रदराज लोगों में मौत की वजह
कोविड-19 के दूसरे ट्रेंड को देखने पर पता चलता है कि बुजुर्गों को कोरोना संक्रमण होने पर उनकी हालत गंभीर हो जाती है और उनकी मृत्युदर भी सबसे ज्यादा है. भारत में 60 साल से अधिक आयु के 19% बुजुर्ग कोरोना वायरस से संक्रमित बताए जा रहे हैं, जिनमें से 63% बुजुर्ग कोरोना के हमले से बच नहीं पाए हैं और उनकी मौत हो गई है. बुजुर्गों में इस वायरस से मौत की भी कई वजहें हैं. जैसे उनका कमजोर हो चुका इम्यून सिस्टम. जब कोरोना या किसी भी वायरस का शरीर पर हमला हो तो सबसे पहले हमारे इम्यून को उसे फॉरेन एजेंट की तरह पहचानना होता है, तभी वो बीमारी से लड़ पाता है. उम्रदराज लोगों में चूंकि इम्यून सिस्टम कमजोर हो चुका होता है तो उनका शरीर वायरस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है.

इसके अलावा एक और बात है जिसकी वजह से 65 की उम्र से ज्यादा वालों पर कोरोना का खतरा ज्यादा है. हमारे इम्यून सिस्टम को न केवल वायरस को फॉरेन एजेंट की तरह पहचानना होता है और लड़ना भी होता है, बल्कि लड़ते हुए सफेद रक्त कोशिकाओं को ये ध्यान रखना होता है कि उनसे स्वस्थ लाल कोशिकाओं को खतरा न हो. स्वस्थ और बीमार कोशिकाओं में पहचान न कर पाने के लिए सफेद कोशिकाएं सबपर हमला करने लगती हैं, इसे "cytokine storm" कहते हैं. ये रोगी के लिए बहुत खतरनाक हालात है.

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