ICMR की रिपोर्ट: भारत में बिना संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए भी फैल रहा है कोरोना वायरस

कोरोना वायरस को लेकर आई आईसीएमआर की नई रिपोर्ट में अच्‍छे संकेत नहीं मिले हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने की रफ्तार को लेकर आई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नई रिपोर्ट में अच्‍छे संकेत नहीं मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 38.46 फीसदी संक्रमित लोग ना तो किसी कोरोना पॉजिटिव व्‍यक्ति के संपर्क में आए थे और ना ही विदेश (Travel History) गए थे.

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    दुनियाभर में कोरोना वायरस बर्बादी फैला रहा है. अब तक पूरी दुनिया में 16,05,279 लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो गए हैं. इनमें 95,752 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, भारत (Coronavirus in India) में भी संक्रमण तेजी से फैलना शुरू हो चुका है. पिछले 24 घंटे में देश में 809 नए मामले सामने आए हैं. इनमें 42 लोगों की मौत हो चुकी है. देश में अब तक संक्रमितों की संख्या 6,412 हो गई है, जिनमें 199 की मौत हो चुकी है. इस बीच सामने आई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नई रिपोर्ट में भी अच्‍छे संकेत नहीं मिल रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि अब देश में बिना संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए भी कोरोना वायरस फैल रहा है. साथ ही ऐसे लोग भी संक्रमित हो रहे हैं, जो कभी विदेश गए ही नहीं हैं. आईसीएमआर के लिए गए सैंपल में ऐसे मरीजों की संख्‍या 38.46 फीसदी है.

    कुछ पॉजिटिव लोगों ने कभी नहीं की थी विदेश यात्रा
    आईसीएमआर की टीम ने 15 फरवरी से 2 अप्रैल के बीच 5,911 सीवियर एक्‍यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) वाले मरीजों में कोरोना पॉजिटिव की जांच की. इनमें 20 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेश के 52 जिलों के 104 SARI मरीजों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया. आईसीएमआर की रिपोर्ट कहती है कि इन 104 SARI मरीजों में 40 लोग कभी भी कोरोना वायरस संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में नहीं आए. यहां तक कि इन लोगों ने कभी विदेश यात्रा से लौटे व्‍यक्ति से भी संपर्क नहीं किया था. वहीं, देश के 15 राज्यों के 36 जिलों में मिले पॉजिटिव मरीज कभी विदेश गए ही नहीं थे. आईसीएमआर ने SARI मरीजों की सेंटिनल सर्विलांस के जरिये पता करने की कोशिश की है कि देश में संक्रमण कहां तक और कितना फैल चुका है.

    आईसीएमआर की सेंटिनल सर्विलांस में 20 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेश के 52 जिलों के 104 मरीजों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया.


    आईसीएमआर ने शुरू कर दी थी सेंटिनल सर्विलांस
    आईसीएमआर ने 19 मार्च को कहा था कि काउंसिल ने कोरोना वायरस के कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की पहचान करने के लिए सेंटिनल सर्विलांस शुरू कर दिया है. वहीं, काउंसिल ने अपनी नई रिपोर्ट में निष्‍कर्ष में कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर कुछ भी नहीं कहा है. फिर भी पिछले 24 घंटे में तेजी से सामने आए नए मामलों और बिना कोरोना वायरस पॉजिटिव व्‍यक्ति के संपर्क में आए संक्रमण फैलने की रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि देश में वायरस का कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन (Community Transmission) का खतरा शुरू हो चुका है. ऐसे में लोगों को ज्‍यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, SARI मरीजों में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की आशंका पुरुषों और 50 साल से ऊपर उम्र वालों में ज्‍यादा है. काउंसिल ने कहा है कि उसकी टीम कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर देश में करीबी नजर रख रही है.

    संक्रमण को थामने के लिए खास जिलों पर ध्‍यान देना जरूरी
    सेंटिनल सर्विलांस के निष्‍कर्षों के आधार पर आईसीएमआर ने कहा है कि संक्रमण को फैलने से रोकने की तमाम गतिविधियों को उन जिलों पर केंद्रित करने की जरूरत है, जहां SARI Positive मरीज पाए गए हैं. पेपर में कहा गया है कि SARI मरीजों के बीच कोरोना वायरस फैलने को लेकर सेंटिनल सर्विलांस को बढाकर संक्रमण को फैलने से रोकने की कोशिश की जानी चाहिए. सर्विलांस के दौरान महाराष्‍ट्र के 21, गुजरात के 13, दिल्‍ली के 14, पश्चिम बंगाल के 9 और तेलंगाना के 8 व्‍यक्ति COVID-19 पॉजिटिव पाए गए. काउंसिल ने गुजरात में 792, तमिलनाडु में 577, महाराष्‍ट्र में 553 और केरल में 502 SARI मरीजों की जांच की. इनमें गुजरात में 1.6 फीसदी, तमिलनाडु में 0.9 फीसदी, महाराष्‍ट्र में 3.8 फीसदी और केरल में 0.2 फीसदी पॉजिटिव पाए गए. महाराष्‍ट्र के 8 जिलों में, पश्चिम बंगाल के 6, तमिलनाडु के 5 और दिल्‍ली के 5 जिलों में SARI मरीज COVID-19 पॉजिटिव पाए गए.

    काउंसिल का कहना है कि शुरुआती हफ्तों से सर्विलांस पूरा होने के बीच पॉजिटिव मामलों में शून्‍य से 2.6 फीसदी की वृद्धि हो चुकी थी.


    40 साल से ऊपर की उम्र वालों में संक्रमण का खतरा ज्‍यादा
    COVID-19 पॉजिटिव लोगों में SARI मरीजों की औसत आयु 54 साल थी. कुल 104 SARI मरीजों में 85 पुरुष थे. इनमें 83 की उम्र 40 साल से ज्‍यादा थी. रिपोर्ट में साफ किया गया है कि इस अध्‍ययन की अपनी सीमाएं थीं. हो सकता है कि ये डाटा पूरे जिले, राज्‍य या देश की वास्‍तविकता को ना दर्शाते हों, फिर भी इससे कोरोना वायरस को लेकर संवेदनशील इलाकों के बारे में भरोसेमंद जानकारी हासिल की जा सकती है. आईसीएमआर ने बताया कि उसकी टीम ने मार्च के दूसरे सप्‍ताह में SARI मरीजों की रैंडम सैंपलिंग की थी. इसके बाद 20 मार्च को टेस्टिंग स्‍ट्रैटजी में बदलाव किया गया और अस्‍पतालों में भर्ती सभी SARI मरीजों को इसमें शामिल किया गया. इसके बाद 15-29 फरवरी और 19 मार्च को 965 SARI मरीजों की जांच की गई. इनमें सिर्फ 2 यानी 0.2 फीसदी COVID-19 पॉजिटिव पाए गए.

    कौन हैं SARI मरीज, क्‍यों की जाती है सेंटिनल सर्विलांस
    आईसीएमआर ने जब अपनी टेस्टिंग स्‍ट्रैटजी में बदलाव किया तो 4,964 सैंपल में 102 यानी 2.1 फीसदी पॉजिटिव केस मिले. काउंसिल का कहना है कि शुरुआती हफ्तों से सर्विलांस पूरा होने के बीच पॉजिटिव मामलों में शून्‍य से 2.6 फीसदी की वृद्धि हो चुकी थी. काउंसिल के मुताबिक, सैंपल के लिए चुने गए SARI मरीज वो थे, जिनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्‍कत या निमोनिया के लक्षण थे. अमूमन सेंटिनल सर्विलांस किसी बीमारी के कम्‍युनिटी में फैलने की रफ्तार का आकलन करने के लिए की जाती है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक, किसी खास बीमारी का हाईक्‍वालिटी डाटा हासिल करने के लिए सेंटिनल सिर्वलांस सिस्‍टम का इस्‍तेमाल किया जाता है. इसके जरिये किसी देश में बीमारी की गंभीरता, समय के साथ उसके ट्रांसमिशन और फैलने के क्षेत्र का आकलन किया जाता है.

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