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जानें ब्‍लैकलिस्‍ट किए जाने के बाद अब तबलीगी जमात के विदेशी नुमाइंदों को दी जा सकती है ये सजा

News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 5:08 PM IST
जानें ब्‍लैकलिस्‍ट किए जाने के बाद अब तबलीगी जमात के विदेशी नुमाइंदों को दी जा सकती है ये सजा
तबलीगी जमात के विदेशी नुमाइंदों को ब्‍लैकलिस्‍ट किए जाने के बाद सजा के मामले में भी कठोर कानून है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) से संबंधित 960 लोगो को ब्‍लैकलिस्‍ट में डालकर उनके पर्यटक वीजा (Tourist VISA) रद्द कर दिए हैं. आइए जानते हैं कि क्‍या भारत में लागू लॉकडाउन (Lockdown) का उल्‍लंघन कर 2,000 से ज्‍यादा लोगों को इकट्ठा करने के आरोपी इन विदेशी नागरिकों को कोई सजा दी सकती है या यूं ही लौटा दिया जाएगा.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन (Lockdown) के बीच दिल्‍ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के मरकज में 2,000 से ज्‍यादा लोग पाए गए थे. इनमें काफी लोग विदेशी नागरिक थे. इसके बाद मरकज में शामिल होने वाले लोगों में कोरोना वायरस पाए जाने के मामले सामने आने लगे. इस पर केंद्र सरकार ने सख्‍त कदम उठाते हुए तबलीगी जमात के विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. गृह मंत्रालय ने तबलीगी जमात से संबंधित 960 विदेशी नागरिकों के पर्यटक वीजा (Tourist VISA) रद्द कर दिए. ब्लैक लिस्ट में डाले गए विदेशियों में 4 अमेरिकी, 9 ब्रिटिश और 6 चीनी नागरिक शामिल हैं. अब सवाल ये उठता है कि भारत में इन विदेशी नागरिकों को सजा दी सकती है या यूं ही लौटा दिया जाएगा.

विदेशी नागरिकों को 5 साल कैद, शरण देने वालों को भी सजा
गृह मंत्रालय के मुताबिक टूरिस्‍ट वीजा पर भारत आए इन सभी विदेशी नागरिकों पर फॉरेन एक्‍ट 1946 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इस कानून की धारा-3 के तहत एफआईआर दर्ज होने पर विदेशी नागरिकों को 5 साल तक कैद (imprisonment) की सजा का प्रावधान है. यही नहीं, इस कानून के तहत उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है, जिन्‍होंने विदेशी नागरिकों को गलत तरीके से छुपाया हुआ है. आसान शब्‍दों में समझें तो इन विदेशी नागरिकों को शरण देने वाले भारतीय नागरिकों पर भी कार्रवाई की जा सकती है. फॉरेन एक्‍ट 1946 के मुताबिक, भारत में विदेशियों का प्रवेश और यात्रा वहीं होना चाहिए जहां उन्हें अनुमति दी गई है. यह कानून भारत में विदेशियों पर नजर रखने और नियंत्रित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए और अवैध प्रवेश व रहने पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था.

फॉरेन एक्‍ट 1946 के मुताबिक, भारत में विदेशियों का प्रवेश और यात्रा वहीं होना चाहिए जहां उन्हें अनुमति दी गई है.




विदेशी पर्यटक को वैकल्पिक नाम के इस्‍तेमाल की अनुमति नहीं


भारत में रहने के दौरान विदेशी नगारिकों को किसी भी तरह का वैकल्पिक नाम इस्‍तेमााल करने की अनुमति नहीं है. साथ ही होटल मालिकों को भी इस कानून के तहत विदेशी मेहमानों के पासपोर्ट और वीजा की कॉपी अपने पास रखनी होती है. कानून का उल्‍लंघन पाए जाने पर पांच साल की जेल और जुर्माने की सजा दी जाती है. इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद जमात के विदेशी सदस्यों में 379 इंडोनेशियाई, 110 बांग्लादेशी, 63 म्यामांर और 33 श्रीलंकाई नागरिक हैं. इनमें से कुछ के कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि तबलीगी जमात के जिन प्रतिनिधियों के नाम ब्लैक लिस्ट में डालकर वीजा रद्द किया गया है उनमें 77 किर्गिस्तान, 75 मलेशिया, 65 थाइलैंड, 12 वियतनाम, 9 सऊदी अरब और 3 फ्रांस के नागरिक भी शामिल हैं.

डॉक्‍टरों और पुलिसकर्मियों पर हमला किया तो लगेगी एनएसए
केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया था कि पिछले 2 दिनों में देश के 17 राज्‍यों में तबलीगी जमात से जुड़े 647 लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया है. यह सभी मामले अंडमान-निकोबार, असम, दिल्‍ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्‍मू-कश्‍मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, तमिलनाडु, उत्‍तराखंड और उत्‍तर प्रदेश में दर्ज किए गए हैं. वहीं, यूपी में जमातियों के यूपी में हंगामा करने पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्‍ता मोहम्मद इरशाद अहमद का कहना है कि देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने और ऐसा लगे कि कोई इंसान देश के लिए खतरा बन सकता है तो एनएसए के तहत कार्रवाई की जाती है. अगर पहली स्टेज में राज्य सरकार कोर्ट में इसे साबित कर देती है तो गुनाहगार को एक साल से पहले जमानत नहीं मिलती है.

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First published: April 4, 2020, 4:49 PM IST
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