जानिए, लॉकडाउन खत्म होने के बाद क्या बदला है चीन के वुहान में

जानिए, लॉकडाउन खत्म होने के बाद क्या बदला है चीन के वुहान में
पूरे 76 दिनों की बंदी के बाद खुला ये शहर अब बुरी तरह से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है

कोरोना वायरस (coronavirus) के कारण घरों में बंद लोग अब लॉकडाउन (lockdown) खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं लॉकडाउन खुलने के बाद भी चीन के वुहान (Wuhan in China) की हालत खराब है. पूरे 76 दिनों की बंदी के बाद खुला ये शहर अब बुरी तरह से आर्थिक संकट (economic crisis) में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 1:54 PM IST
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पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 32 लाख पार कर चुका है, वहीं 2 लाख 25 हजार से ज्यादा जानें जा चुकी हैं. असरदार दवा या टीके की खोज में लगे देश अपने यहां आंशिक या पूरी तरह से लॉकडाउन लगाए हुए हैं. हफ्तों की बंदी के बाद कई देश धीरे-धीरे इसे खोलने की तैयारी में हैं. लेकिन बंदी खत्म होने के बाद भी चीन के वुहान शहर की हालत खस्ता है. ये वही शहर है, जहां से इंफेक्शन पूरी दुनिया में फैला. शहर के हाल से साफ हैं कि ये कोरोना संकट की सिर्फ शुरुआत ही है.

क्या शहर में पटरी पर लौट आई जिंदगी?
दिसंबर में कोरोना के शुरुआती मामले दिखने पर वुहान में इसे फ्लू ही समझा गया. लेकिन जल्दी ही ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने पर पता चला कि ये कोई नया संक्रमण है जो फ्लू से खतरनाक है. आनन-फानन यहां 23 जनवरी को लॉकडाउन का एलान किया गया जो 8 अप्रैल को खुला. इसके बाद भी यहां मामले पूरी तरह से खत्म नहीं हुए. यही वजह है कि लॉकडाउन हटने के बाद भी सारी दुकानें नहीं खुलीं. जो रेस्त्रां खुले, उनमें टेकअवे यानी खाना पैक कराके ले जाने की मनाही है. लोग बिना मास्क के बाहर नहीं निकल सकते और निकलने पर भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना जरूरी है.

स्थानीय प्रशासन ने हालांकि 25 अप्रैल को नागरिकों को आश्वस्त किया कि जल्दी ही शहर के नुकसान की 100% भरपाई हो जाएगी लेकिन खुद सरकारी मीडिया का मानना है कि ऐसा मुमकिन नहीं.
लोग बिना मास्क के बाहर नहीं निकल सकते और निकलने पर भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना जरूरी है




स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बंदी हटने के बाद से वे जीरो प्रॉफिट पर हैं और तब भी दुकान का किराया देना पड़ रहा है. सीएनएन से बात करते हुए वुहान के अर्थशास्त्री लैरी ह्यू (Larry Hu) ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से लंबे समय तक शहर को नुकसान झेलना पड़ सकता है, शायद तीन सालों तक हालात ऐसे ही रहें.

क्या है वुहान की खासियत
लगभग 11 मिलियन की आबादी वाला ये शहर वैसे तो अमेरिका के ज्यादातर स्टेट्स से बड़ा है लेकिन चीन के भीतर ये टू-टियर शहर कहलाता है. हुबई प्रांत में बसा ये शहर पूरे देश के लिए मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्टेशन का केंद्र है. कोरोना के मामले बढ़ने के साल शहर को तो लॉकडाउन किया ही गया, साथ ही इसे पूरे चीन से काट दिया गया. शहर की सीमाएं सील रहीं. रातोंरात हालात बदल गए और लोग राशन-दूध के लिए सरकारी मदद पर निर्भर हो गए. अब लॉकडाउन खुलने के साथ शहर के प्रशासन पर दबाव है कि वो सबकुछ सामान्य करे. ज्यादा दबाव बीजिंग की ओर से आ रहा है क्योंकि मैन्युफैक्चिरिंग हब होने के कारण वुहान के लॉकडाउन का पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा था.

विशेषज्ञों का ये है मानना
एक्सपर्ट लॉकडाइन का फैसला देने में हुई देरी को भी चरमराई इकनॉमी की वजह बता रहे हैं. जैसे कि S&P Global Ratings के एशिया पैसिफिक अर्थशास्त्री शौन रॉअचे (Shaun Roache) कहते हैं कि वुहान की हालत देखते हुए दूसरे देशों को सबक मिला कि जल्दी लॉकडाउन थोड़े समय के लिए अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है लेकिन यही सही है. इसके बाद रीओपनिंग आसान हो जाती है. ये भी माना जा रहा है कि लॉकडाउन के कारण छोटे और मध्यम साइज के बिजनेस पर ज्यादा असर होगा क्योंकि इसके बाद रिकवरी के लिए उनके पास पर्याप्त क्रेडिट नहीं होता है. ऐसे में दुकानें खुल भी जाएं तो मांग पर पूरी नहीं उतर पाती हैं. खुद स्टेट न्यूज एजेंसी Xinhua के मुताबिक पूरे प्रदेश की जीडीपी में अभी से 40 प्रतिशत की गिरावट आई है.

दुकानों के न खुलने या लोगों के बाहर न निकलने की एक वजह ये भी है कि उन्हें कोरोना के दोबारा हमले का डर है


अब भी लोग जी रहे डर में
हालांकि अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए सरकार ने वादा किया कि सरकारी संस्थानों से अगले 3 महीनों के लिए किराया नहीं लिया जाएगा. लेकिन इससे प्राइवेट काम कर रहे लोगों को कोई फायदा नहीं. यही वजह है कि अब भी आधे से ज्यादा दुकानें बंद पड़ी हुई हैं. इनमें रेस्त्रां के अलावा जिम और सिनेमा हॉल भी शामिल हैं. दुकानों के न खुलने या लोगों के बाहर न निकलने की एक वजह ये भी है कि उन्हें कोरोना के दोबारा हमले का डर है. एक वक्त पर वायरस से बुरी तरह से प्रभावित हो चुके इस शहर में कोरोना के इक्का-दुक्का मामले आ भी रहे हैं. साथ ही चीन के दूसरे हिस्सों में कोरोना संक्रमण दिख रहा है. हालांकि चीन इसे अब फॉरेन वायरस की तरह देख रहा है. उसका दावा है कि सारे मामले विदेश से चीन आए या आ रहे लोगों से फैल रहा है.

क्या दोबारा है कोरोना का खतरा?
कोरोना के संक्रमण (corona infection) पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) ने 20 अप्रैल की चेतावनी दी है कि इस वायरस का सबसे घातक रूप दिखना अभी बाकी है. WHO प्रमुख Tedros Adhanom Ghebreyesus ने साल 1918 में फैले स्पैनिश फ्लू से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वो बीमारी एक के बाद एक करके तीन बार लौटी थी. जैसे ही लोग असावधान होंगे, कोरोना का घटता कहर फिर लौटेगा और ज्यादा प्रभावी होकर लौटेगा. लंदन के Imperial College में भी कोरोना पर रिस्पॉन्स टीम ने अनुसार कोरोना भी चरणों में आ सकता है, जैसे दूसरी महामारियां आई थीं. माना जा रहा है कि वुहान ने सोशल डिस्टेंसिंग खत्म की है तो वहां भी वायरस अगस्त में आ सकता है जो अक्टूबर में पीक पर होगा.

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