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Coronavirus: अब संक्रमण से उबर चुके मरीजों के फेफड़े हो रहे डैमेज, नहीं कर पा रहे हैं 100 फीसदी काम

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 7:13 PM IST
Coronavirus: अब संक्रमण से उबर चुके मरीजों के फेफड़े हो रहे डैमेज, नहीं कर पा रहे हैं 100 फीसदी काम
कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों के लंग्‍स की काम करने की क्षमता 0 फीसदी तक घट रही है.

चीन (China) और हांगकांग (Hong Kong) में कोरोना वायरस मरीजों के ठीक होने के बाद उन पर किए गए अध्‍ययन में पता चला कि उनके फेफड़े (Lungs) आंशिक रूप से क्षतिग्रस्‍त (Partially Damaged) हैं. इससे उन्‍हें तेजी से टहलते (Brisk) समय सांस फूलने की समस्‍या हो रही है. हालांकि, शोधकर्ताओं के मुताबिक अभी साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि ये परेशानी हमेशा के लिए बनी रहेगी या आगे चलकर ठीक हो जाएगी.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 7:13 PM IST
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चीन के वुहान (Wuhan) शहर से फैलना शुरू हुआ कोरोना वायरस (Coronavirus) अब तक 3,83,389 लोगों को संक्रमित कर चुका है. गंभीर संक्रमण के कारण इनमें 16,582 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, अब तक पूरी दुनिया में 1,02,548 संक्रमित लोग स्‍वस्‍थ होकर (Recovered) घर लौट चुके हैं. भारत में भी आज अब तक 12 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इससे देश में संक्रमितों (Infection) की संख्‍या 519 हो गई है. इनमें 10 की मौत हो चुकी है, जबकि 40 लोग ठीक कर लिए गए हैं. जहां हर दिन संक्रमितों की संख्‍या बढती जा रही है. वहीं, ठीक होने की तादाद में भी इजाफा हो रहा है. लेकिन, चीन (China) और हांगकांग (Hong Kong) में ठीक होकर घर लौटे मरीजों पर किए गए अध्‍ययन ने वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है. दरअसल, अध्‍ययन में पता चला है कि ठीक हो चुके लोगों के फेफड़े (Lungs) पहले की तरह काम नहीं कर रहे हैं.

ठीक हुए मरीज मानसिक तनाव से जल्‍द उबर गए
अध्‍ययन रिपोर्ट (Study Report) में कहा गया है कि ठीक होने वाले ज्‍यादातर मामलों में या तो मामूली संक्रमण था या मरीज को बेहतरीन स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा मिल गई. ठीक होने वाले लोगों का अध्‍ययन किया जाना जरूरी था ताकि पता किया जा सके कि उनके शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बाद में कोई असर तो नहीं पड़ रहा है. अध्‍ययन में पता चला कि आईसोलेशन, ठीक होने या नहीं होने की अनिश्चितता से निकलने के बाद उनके मनोवैज्ञानिक तनाव (Psychological Stress) में बेहतरीन बदलाव नजर आया. वे कोरोना वायरस से संक्रमण से उबरने को लेकर काफी खुश थे. उनमें काफी लोगों को ये भी संतोष था कि उन्‍होंने बाकी लोगों को संक्रमित नहीं किया.

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हांगकांग के शोधकर्ताओं ने अस्‍पताल से छुट्टी पाए 12 संक्रमितों पर किया अध्‍ययन.




अस्‍पताल से छुट्टी पाए 12 लोगों पर किया शोध
कोरोना वायरस के लक्षण सूखी खांसी (Dry Cough), सांस उखड़ना (Shortness of Breath) और निमोनिया (Pneumonia) तौर पर सामने आते हैं क्‍योंकि ये हमारे श्‍वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है. अब हांगकांग में ठीक हुए मरीजों पर अध्‍ययन करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि संक्रमण से उबर चुके लोगों के फेफड़े आंशिक तौर क्षतिग्रस्‍त हो सकते हैं. इससे उन्‍हें तेज चलने पर सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है. शोधकर्ताओं ने संक्रमण के इलाज के बाद अस्‍पताल से छुट्टी पाए 12 लोगों पर छोटा सा अध्‍ययन किया. इनमें 3 लोगों के फेफड़े पहले की तरह काम नहीं कर रहे थे.

फेफड़ों की क्षमता 20 से 30 फीसदी हो रही कम
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी इस छोटे से अध्‍ययन से कोई बड़ा मतलब निकालना जल्‍दबाजी होगा. अभी साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ये असर लंबे समय तक रहेगा या आगे चलकर ठीक हो जाएगा. हांगकांग में प्रिंस मार्गेट हॉस्पिटल में संक्रमण रोग सेंटर के मेडिकल डायरेक्‍टर डॉ. ऑवेन सांग ताकयिन ने डीडब्‍ल्‍यू से कहा कि ठीक हो चुके कुछ मरीजों के फेफड़ों के काम करने की क्षमता 20 से 30 फीसदी तक कम हो सकती है. कंप्‍यूटूर टॉमोग्राफी में फेफड़ों में फ्लूड और डिबरीज भरी हुई दिखाई दे रही हैं. जैसे-जैसे बीमारी बढती जाती है, वैसे-वैसे फेफड़ों की हालत खराब होती जाती है. आसान शब्‍दों में समझें तो फेफड़ों में हवा के साथ मवाद, खून या पानी भरा हुआ नजर आया.

कंप्‍यूटूर टॉमोग्राफी में संक्रमित व्‍यक्ति के फेफड़ों में हवा के साथ मवाद, खून या पानी भरा हुआ नजर आया.


आगे के अध्‍ययन में पता की जाएंगी ये बातें
शोधकर्ताओं के मुताबिक, COVID-19 से ठीक हो चुके मरीजों पर किए जा रहे अध्‍ययन में आगे पता किया जाएगा कि क्‍या बाद में पलमनरी फाइब्रोसिस विकसित हो रहा है या नहीं. इसकी वजह से फेफड़ों को काफी क्षति पहुंचती है. इसके बाद फाइब्रोसिस टिश्‍यू फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं, जिससे मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. इसके बाद रक्‍त में ऑक्‍सीजन की कमी होने लगती है. ऑक्‍सीजन की कमी के कारण मरीज की सांस उखड़ने लगती है. वह मेहनत का कोई काम नहीं कर पाता है. फेफड़ों में बनने वाले स्‍कार्स इलाज से ठीक नहीं किए जा सकते हैं. हालांकि, इलाज के जरिये पलमनरी फाइब्रोसिस को धीमा किया जा सकता है. सही समय पर पता चल जाए तो इसे पूरी तरह से रोका जा सकता है.

क्‍या संक्रमण सही होने पर मरीज हो जाएगा इम्‍यून
ज्‍यादातर वायरोलॉजिस्‍ट का मानना है कि ठीक हो चुके संक्रमित मरीजों में कोरोना वायरस से रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) विकसित हो जाएगी. उनका कहना है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के दौरान एंटीबॉडीज रिलीज करती है. ये नियम उन लोगों पर भी लागू होगा, जो संक्रमित तो हुए लेकिन उनमें लक्षण नजर नहीं आए. ऐसा उन लोगों के साथ भी होगा, जिनके शरीर में वायरस एक सप्‍ताह भी रहा हो और बीमारी का कोई लक्षण नजर नहीं आया हो. हाल में पता चला है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले एक तिहाई लोगों में बीमारी का कोई लक्षण नजर नहीं आया था. इन्‍हीं लोगों ने सबसे ज्‍यादा संक्रमण फैलाया. हालांकि एक बार संक्रमित लोगों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने को लेकर कोई ठोस सबूत अभी तक नहीं मिला है.

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First published: March 24, 2020, 6:52 PM IST
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