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क्या दुनिया में अब तक का सबसे खतरनाक वायरस है कोरोना

News18Hindi
Updated: March 3, 2020, 7:51 PM IST
क्या दुनिया में अब तक का सबसे खतरनाक वायरस है कोरोना
अब पीक पकड़ने लगा कोरोना वायरस

लंदन के एक हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन स्कूल ने एक रियलटाइम मैप तैयार किया है, जिसमें तुरंत दुनियाभर में फैल रहे कोरोनावायरस के मरीजों की स्थिति दर्ज हो रही है. ये मैप ये भी दिखा रहा है कि किस तरह ये बीमारी पिछले तीन दशकों का सबसे खतरनाक वायरस साबित हो सकती है.

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दुनिया में पिछले कुछ दशकों में कई खतरनाक वायरस के हमले हुए. इनसे बड़े पैमाने पर लोगों की मौत भी हुई. पिछले दो-तीन दशकों में इबोला, सार्स और स्वाइन फ्लू को सबसे किलर वायरस माना गया लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल रहा है और बड़े पैमाने पर चपेट में ले रहा है, उसके बाद कहा जा रहा है कि ये अब तक का सबसे खतरनाक वायरस है.

लंदन के स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन ने कोरोना वायरस के फैलने का एक मैप तैयार किया है. ये मैप बताता है कि कोरोना वायरस कहीं ज्यादा देशों में फैल चुका है. इबोला, सार्स और स्वाइन फ्लू जो पिछले तीन दशक के सबसे खतरनाक वायरस माने गए, वो भी इतने देशों तक नहीं फैल पाए थे.

कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के शहर वुहान में दिसंबर में हुई. हालांकि उस समय चीन ने उससे संबंधित खबरों को दबाने या छिपाने की कोशिश की लेकिन जनवरी आते आते ये बेकाबू हो चुका था. जनवरी में इसकी पहचान कोरोना वायरस फैमिली के नए घातक सदस्य के तौर पर की गई. साथ ही ये खबरें भी आने लगीं कि इसके शिकार बड़े पैमाने पर बढ़ते जा रहे हैं. उसी गति से मरने वालों की तादाद भी बढ़ रही है.

दुनियाभर में 60,000 से ज्यादा लोग चपेट में



अगर खबरों पर गौर करें तो कोरोना वायरस दुनियाभर में 60,000 से ज्यादा लोगों को चपेट में ले चुका है. अकेले केवल चीन में इससे मौतों का आंकड़ा 1500 के आसपास पहुंच रहा है. चीन भरसक कोशिश के बाद भी इस पर काबू नहीं पा सका.

लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के के इस मैप में चार बीमारियों के फैलाव को दिखाया गया है. लाल घेरे में कोरोना वायरस, ब्लू घेरे में 2003 में फैला सार्स वायरस, बैंगनी रंग में 2009 में सामने आया स्वाइन फ्लू और हरे रंग में 2014 में शुरू हुई इबोला बीमारी की स्थिति है


चीन द्वारा इस खबर तो दबाने-छिपाने की वजह से ये वायरस दुनियाभर में फैल चुका है, क्योंकि दिसंबर और जनवरी में बड़े पैमाने पर जो लोग चीन आए और वहां से दुनिया के अन्य देशों में गए, वहां ये वायरस भी फैल गया.

 

क्या अभी और बढ़ेगी बीमार और मृतकों की तादाद
ब्रिटेन के टैबलॉयड "द सन" के अनुसार फरवरी के मध्य तक पहुंचते पहुंचते ये बीमारी पीक पर पहुंच चुकी है. बीमारों के साथ मृतकों की संख्या भी बढ़ने लगी है. लंदन के जिस हाइजिन और ट्रॉपिकल मेडिसिन स्कूल ने जो मैप तैयार किया है, वो वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेश के आंकड़ों के साथ रियल टाइम स्थिति को दर्शाता है. इस पर तुरंत पता लग जाता है कि कोरोनावायरस के मरीजों की दुनियाभर में क्या स्थिति है.

25 देशों में फैल चुकी है बीमारी 
फिलहाल ये मैप दिखा रहा है कि ये वायरस चीन की सीमा को पार करता हुए 25 देशों में फैल चुका है. आने वाले समय में प्रभावित देशों की संख्या और बढ़ेगी. जबकि अब चीन में बीमारों की संख्या रोज हजारों की तादाद में बढ़ रही है.

दुनिया के इस नक्शे में दिखाया जा रहा है कि कहां-कहां कोरोना वायरस पहुंच चुका है और मरीज मिल रहे हैं


शोधकर्ताओं का कहना है कि इसमें सबसे चिंताजनक बात ये है कि जिन लोगों को बीमारी हो रही है, उनमें इसके संकेत काफी देर से प्रगट होते हैं, उन्हें खुद नहीं मालूम होता कि वो ये बीमारी साथ लेकर चल रहे हैं.

इबोला की क्या स्थिति थी
2014 में जब दुनियाभर में इबोला महामारी ने दस्तक दी तो इसने 26800 लोगों को प्रभावित किया, जिसमें 40 फीसदी लोग मारे गए लेकिन उसका असर भौगोलिक तौर पर सीमित था. ये वायरस आमतौर पर पश्चिमी अफ्रीका के तीन देशों तक ज्यादा फैला रहा.

स्वाइन फ्लू से कितनी मौतें हुईं
स्वाइन फ्लू का प्रकोप 2009 में देखा गया. हालांकि उससे बहुत कम लोग प्रभावित हुए लेकिन उसने दुनिया के हर देश और जगह पर मौजूदगी दिखाई. स्वाइन फ्लू से करीब छह करोड़ प्रभावित हुए. माना जाता है कि 01-02 लाख मौतें हुईं.

हालांकि कोरोना वायरस से इतने लोग ना तो बीमार नजर आ रहे हैं और ना ही मौतों की संख्या इतनी ज्यादा लेकिन ये उन्हीं भौगोलिक इलाकों में फैलाव कर रहा है, जिसमें सार्स वायरस फैला था. इसका केंद्र सार्स की तरह ही चीन है और ये वहां से एशिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में पहुंच चुका है.

सार्स का क्या असर हुआ था
सार्स वर्ष 2003 के दौरान चीन से फैला था. उसकी वजह से करीब 1500 से 2000 लोगों की जान गई थी. ये बीमारी भी चीन से फैली थी. माना गया था कि वहां ये वायरस किसी जानवर या बर्ड मनुष्यों में पहुंचा और फिर हवा के जरिए फैलने लगा.

इबोला बेशक खतरनाक वायरस वाली बीमारी है लेकिन इसका असर अफ्रीका में केवल तीन देशों तक रहा


कोरोना में आगे क्या होगा
ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है. खबरों के अनुसार ये खांसने या छींकने से हवा के जरिए फैल रहा है. 13 फरवरी तक इस मैप के अनुसार दुनियाभर में 60,लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं. दुनियाभर में साइंटिस्ट इसकी दवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अब तक इसमें सफलता नहीं मिल सकी हैं.

एक बार इससे गंभीर तौर पर बीमार होने के बाद इसमें बचने की संभावना कम नजर आई है. ये भी माना जा रहा है कि बीमारी अप्रैल तक जारी रहेगी. क्योंकि तब तक मौसम ठंडा रहेगा. जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा, कोरोना वायरस का खतरा कम होने लगेगा.

एक्युवेदर डॉट कॉम नाम की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार मौसम भी इसके फैलाव में खास भूमिका रहा है.

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First published: February 14, 2020, 6:13 PM IST
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