कोरोना से रिकवरी के बाद भी खतरा कम नहीं, मरीजों हो रही थायरॉइड बीमारी

कोरोना से रिकवरी के बाद भी खतरा कम नहीं, मरीजों हो रही थायरॉइड बीमारी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिकवर हो चुके लोगों को वायरल थायरॉइड भी हो सकता है (Photo-pixabay)

कोरोना वायरस (coronavirus) के मरीजों में ठीक होने के बाद भी अलग-अलग तकलीफें दिख रही हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिकवर हो चुके लोगों को वायरल थायरॉइड (viral thyroid) भी हो सकता है.

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दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों (coronavirus infected) की संख्या 54 लाख पार कर चुकी है. फिलहाल वैज्ञानिकों की लगभग 100 से ज्यादा टीमें वैक्सीन (vaccine) बनाने में जुटी हुई हैं. इस बीच वायरस के नए-नए लक्षण (signs and symptoms of coronavirus) सामने आ रहे हैं. हाल ही में ये पाया गया कि संक्रमण से रिकवर करने के बाद मरीजों में थाइरॉइड के लक्षण दिख रहे हैं. इसके मरीज में गले में दर्द रहता है और कुछ भी निगलने में तकलीफ होती है. इसे वायरस-जन्य थायरॉइड माना जा रहा है, जिसे सबएक्यूट थायरॉइडिटिस (sub-acute thyroiditis) कहते हैं.

क्या कहती है स्टडी
The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में ये स्टडी छपी, जिसके मुताबिक ये बीमारी स्थाई थायरॉइड नहीं, बल्कि पोस्ट वायरल असर है. देखा गया है कि कोरोना वायरस सिर्फ लंग्स को नहीं, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर रहा है. इसी की जांच के लिए इटली के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ पीसा ने एक स्टडी की. इसमें शामिल एक वैज्ञानिक फ्रांसिस्को लेट्रोफा कहते हैं कि Covid-19 के मरीजों का इलाज करते हुए वैज्ञानिकों को इस बीमारी के लिए भी सचेत रहता चाहिए क्योंकि ये कई मरीजों में दिखाई दे रहा है. जैसे 19 साल की एक मरीज जो कोरोना से पूरी तरह से रिकवर कर गई थी, उसने कुछ दिनों बाद गले में दर्द, बुखार और दिल की धड़कन बढ़ने की शिकायत की. अस्पताल ले जाने पर पाया गया कि वो सबएक्यूट थायरॉइडिटिस का शिकार हो चुकी थी. जबकि इससे पहले उसे थायरॉइड की कोई शिकायत नहीं थी.

वायरस सिर्फ लंग्स को नहीं, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर रहा है (Photo-pixabay)

क्या है सबएक्यूट थायरॉइडिटिस


ये थायरॉइड डिसऑर्डर है, जिसके कारण गले में पाई जाने वाली थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है. माना जा रहा है कि कोरोना के मरीजों में ये पोस्ट वायरल संक्रमण है, जो श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण के कारण होता है. वैसे कई दूसरी वायरल बीमारियों जैसे Epstein-Barr virus (EBV) और HIV. कोरोना के मामले में ये डरावना इसलिए है क्योंकि अगर बीमारी पकड़ में न आए और इलाज न हो तो मरीज को हमेशा के लिए थायरॉइड हो सकता है.

कोरोना के मरीजों में थायरॉइड के लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं. जैसे गले और जबड़ों में दर्द और बुखार आना. लगातार थकान रहना और गर्म-सर्द लगना. वायरस से होने वाले इस थायरॉइड में आवाज भारी हो जाती है और कुछ भी निगलने में परेशानी होती है.

क्या है थायरॉइड बीमारी
थायरॉइड गले में पाई जाने वाली एक तरह की ग्रंथि है. ये ग्रंथि तितली के आकार के होती है. और गले के सामने वाले हिस्से, स्वरयंत्र (vocal cord) के नीचे की ओर पायी जाती है. जो मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करती है. इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में यह ग्रंथि सामान्‍य तरीके से काम नहीं करती. इसमें थायरॉइड हार्मोन बनना कम या ज्‍यादा हो जाता है. इससे शरीर के सभी अंगों और खासकर पाचक अंगों का काम बुरी तरह से प्रभावित होता है क्योंकि ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म पर नियंत्रण रखता है.

वैज्ञानिकों को कोरोना का टीका या कोई प्रभावी दवा तैयार करने में इतनी मुश्किल आ रही है (Photo-pixabay)


दूसरे अंगों पर भी असर
शरीर के लगभग हर अंग पर हमला करने की क्षमता के कारण ही वैज्ञानिकों को कोरोना का टीका या कोई प्रभावी दवा तैयार करने में इतनी मुश्किल आ रही है. कोरोना वायरस केवल फेफड़े ही नहीं, बल्कि हार्ट, किडनी और यहां तक कि मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है. फेफड़ों पर वायरस के हमले से जो स्थितियां बनती हैं, उनसे रक्त प्रवाह बाधित होता है और ब्लड क्लॉटिंग होने लगती है. चूंकि हृदय से रक्त बाकी अंगों तक पहुंचने में मुश्किल होती है इसलिए स्ट्रोक या पल्मोनरी एम्बॉलिज़्म जैसे खतरे बढ़ते हैं.

इसके अलावा मरीज किडनी फेलियर के शिकार हो सकते हैं. वायरस के सीधे संक्रमण के कारण साइटोकिन किडनी में रक्त सप्लाई नहीं होने देता या डायबि​टीज जैसी पहले से किसी बीमारी के कारण किडनी को घातक नुकसान की आशंका रहती है. वहीं कई में न्यूरोलॉजी संबंधी समस्याएं देखी जा सकती हैं. इन मरीजों में स्ट्रोक, सूंघने या स्वाद का सेंस जाना, डिप्रेशन जैसी शिकायतें हो सकती हैं.

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