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कोरोना की दवा लाखों में बेच रही है ये कंपनी, मौके का फायदा उठाने में रही है बदनाम

कोरोना की दवा लाखों में बेच रही है ये कंपनी, मौके का फायदा उठाने में रही है बदनाम

कंपनी हमेशा दवा के रेट बेतहाशा बढाने के कारण विवादों में रही है

कंपनी हमेशा दवा के रेट बेतहाशा बढाने के कारण विवादों में रही है

कोरोना के इलाज के जिस दवा रेमडेसिवीर (remedisvir to treat coronavirus) को असरदार बताया जा रहा है, उसकी कीमत लगभग 1.77 लाख रुपये है. ये पहली बार नहीं. दवा कंपनी गिलियड साइंसेज हमेशा से ज्यादा कीमतों के कारण विवादों में (Gilead Sciences controversy over medicine prices) रही है.

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    कोविड-19 का फिलहाल कोई पक्का इलाज नहीं आ सका है. दवाएं आ रही हैं लेकिन किसी भी दवा के बारे में ये दावा नहीं दिख रहा कि वो मरीज को पूरी तरह से ठीक कर ही देगी. इसी बीच गिलियड लाइफ साइंसेज कंपनी ने रेमडेसिवीर दवा उतारी, जिसे कोरोना का फिलहाल तक बढ़िया इलाज बताया जा रहा है. हालांकि आते ही ये दवा विवादों में घिर गई. दवा की कीमत लगभग पौने दो लाख है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या आम आदमी ये दवा अफोर्ड कर पाएगा.

    क्या है ये कंपनी
    गिलियड साइंसेज एक अमेरिकन बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी है. कैलीफोर्निया से काम करने वाली इस कंपनी का असल काम एंटीवायरल ड्रग्स तैयार करना ही है. फिलहाल ये एचआईवी, हिपेटाइटिस और इंफ्लूएंजा के लिए वैक्सीन तैयार करती है. लगभग 33 साल पहले बनी इस कंपनी ने इंटरनेशनल दवा बाजार में काफी तेजी से बढ़त हासिल की. हालांकि इसके पास कोई खास उपलब्धि नहीं है. हां, इसके खाते में विवाद ज्यादा हैं. जैसे जिस रेमडेसिवीर दवा के लिए इतना हल्ला है, वो साल 2014 में इबोला के इलाज के लिए तैयार हुई थी और तब भी ये दवा फर्स्ट ट्रायल में ही फेल हो गई थी. फिलहाल चूंकि यही दवा पहले से ही इंसानों पर ट्रायल की जा चुकी है इसलिए ये दौड़ में सबसे आगे है. हालांकि अब भी ये तय नहीं है कि दवा कोरोना संक्रमितों पर कितना असर करेगी.

    कोविड-19 का फिलहाल कोई पक्का इलाज नहीं आ सका है (Photo-pixabay)


    क्या है कोरोना का मामला
    दवा की कीमत को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. इसके सिंगल डोज की कीमत कंपनी ने 390 डॉलर तय की है, यानी 29,450 रुपए. दवा का पांच दिनों का कोर्स जरूरी है. ऐसे में पांच दिन की खुराक की कीमत हुई 1950 डॉलर यानी लगभग पौने दो लाख रुपए. ये कीमत विकासशील और गरीब देशों के लिए है. अमेरिका में इसकी सिंगल खुराक की कीमत 39,267 रुपए होगी. इस हिसाब से पांच दिनों के लिए उन्हें 2 लाख 35 हजार रुपए देने होंगे.

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    कंपनी के सीईओ डेनियल ओ डे ने दवा की कीमत पर विवाद के बाद एक ओपन लेटर लिखा. इसमें उन्होंने साफ किया कि दवा के असर करने पर मरीज की अस्पताल से जल्दी छुट्टी होगी, जिससे पैसे बचेंगे. दवा की कीमत उस खर्च के आगे कुछ नहीं. लेकिन सवाल ये उठता है कि भारत की कितनी बड़ी आबादी ये दवा अफोर्ड कर पाएगी, जबकि कोरोना की वजह से लोगों का रोजगार तक छिना हुआ है.

    दवा के लिए ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद भी मेडिकल एक्सपर्ट इसे मैजिक बुलेट नहीं मान रहे (Photo-pixabay)


    पुरानी दवाएं बेचकर मरीजों का किया नुकसान
    कंपनी मुसीबत में कीमतें बढ़ाने के लिए पहले भी कुख्यात रही है. इसके लिए इसपर कई केस भी चल रहे हैं. जैसे कंपनी ने एक एंटी-वायरल ड्रंग  tenofovir alafenamide fumarate (TAF) को तैयार करने में जान-बूझकर देर की ताकि वो पुरानी दवा से मुनाफा कमा सके. माना जाता है कि कंपनी को पता था कि TAF बेस्ड दवा ज्यादा सुरक्षित और कारगर है, तब भी वो पुराने फॉर्मूला पर काम करती रही. जबकि ये तक पता चल चुका था कि पुराने फॉर्मूले से कई गंभीर साइड इफैक्ट हो रहे हैं जैसे किडनियों का खराब होना और हड्डियां कमजोर होना.

    ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल में ये साइड इफैक्ट पता लग चुके थे लेकिन गिलियड ने इसे सबसे छिपाकर रखा और साल 2010 तक रुका रहा. इसने नए फॉर्मूला पर काम तभी शुरू किया, जब  Food and Drug Administration ने उसे इसका पेटेंट दे दिया. आखिरकार चार सालों बाद जब Genvoya नाम से कंपनी की दवा नए फॉर्मूला के साथ आई, तब तक पुरानी दवा ले रहे काफी सारे HIV मरीजों किडनी की गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके थे.

    दवा के पांच दिन की खुराक की कीमत हुई 1950 डॉलर यानी लगभग पौने दो लाख रुपए (Photo-pixabay)


    बेतहाशा दाम बढ़ाने का इतिहास
    गिलियड की अपनी एक दवा सोफोसबुवीर की उलजुलूल कीमत के लिए काफी आलोचना होती रही है. हेपेटाइटिस के इलाज के लिए इसकी एक खुराक की कीमत लगभग 75 हजार रुपए थी. इस हिसाब से इस दवा के 84 दिनों के कोर्स की कीमत साढ़े 63 लाख से भी ज्यादा थी. काफी आलोचना के बाद कुछ ही महीनों में दवा की कीमत एकदम से लगभग पौने 4 हजार हो गई. अलग-अलग देशों में इसके अलग-अलग खुराक और अलग कीमतें तय की गई हैं.

    यहां तक कि पब्लिक फंडिंग से बनी दवाओं की कीमतें भी कंपनी बढ़ाती रही, जैसे एड्स के लिए बनी दवाएं. अब कोरोना के मामले में भी दवा की कीमत इतनी अधिक होने पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि गिलियड इमरजेंसी सिचुएशन का फायदा उठा रहा है.



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    कंपनी के बारे में माना जाता है कि ये आएदिन दवाओं की कीमतें बढ़ाती रहती है. ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आगे चलकर कीमत और ज्यादा नहीं हो जाएगी. साथ ही एक डर इस बात का भी है कि आगे चलकर जो भी दवाएं आएंगी, वो इसी कीमत को ध्यान में रखते हुए अपनी कीमत तय करेंगी. इससे कोरोना का इलाज ले सकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

    काफी मुनाफा कमाएगी कंपनी
    मरीजों के पक्ष में बात करने वालों का तर्क है कि दवा की कीमत कम होनी ही चाहिए क्योंकि एक तो ये आम या गरीब आदमी की पहुंच से बाहर है, और दूसरा- ये तैयार भी अमेरिकी सरकार की फंडिंग से हुई है. एनडीटीवी के मुताबिक गिलियड की दवा के बारे में रॉयल बैंक ऑफ कनाडा ने अनुमान लगाया जो चौंकाने वाला है. बैंक का कहना है कि दवा से इस बाकी बचे साल में ही कंपनी को 2.3 बिलियन डॉलर का शुद्ध मुनाफा होगा.

    Tags: Coronavirus, Coronavirus Case in India, Coronavirus Update, Coronavirus vaccine, India Coronavirus Fight

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