जानिए, उन 3 दवाओं के बारे में सब कुछ, जिनसे भारत में कोरोना मरीजों का इलाज होगा

जानिए, उन 3 दवाओं के बारे में सब कुछ, जिनसे भारत में कोरोना मरीजों का इलाज होगा
कोरोना के खिलाफ ये तीनों ही दवाएं अब तक की सबसे असरदार दवाएं मानी जा रही हैं (Photo-pixabay)

कोरोना (corona) के खिलाफ ये तीनों ही दवाएं अब तक की सबसे असरदार दवाएं (potential coronavirus drugs) मानी जा रही हैं. वैसे मेडिकल एक्सपर्ट ने चेताया है कि इन्हें मैजिक बुलेट (magic bullet) की तरह न देखा जाए.

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कोरोना का ग्लोबल आंकड़ा 90 लाख पार कर चुका है, वहीं भारत संक्रमितों देशों की कतार में चौथे नंबर पर है. इस सबके बीच देशी फार्मा कंपनियों ( homegrown pharmaceutical companies) ने दो दवाओं के तीन जेनेरिक वर्जन निकालने के लिए सरकारी मंजूरी ले ली है. ये एक अच्छा संकेत माना जा रहा है. रेमडेसिवीर (remdesivir) और फेविपिराविर (favipiravir) दवाओं के उत्पादन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने हां कह दी है. कई देशों में इन पर क्लिनिकल ट्रायल (clinical trail) हो रहा है और शुरुआती नतीजे शानदार आए हैं. जानिए, क्या हैं ये दवाएं और किस श्रेणी के कोरोना मरीजों पर काम कर रही हैं.

एंटीवायरल ड्रग फेविपिराविर को मुंबई की ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स (Glenmark Pharmaceuticals) ने तैयार किया है. इसे पहले से जापान में इंफ्लूएंजा के इलाज के लिए मान्यता मिली हुई है. फिलहाल Covid-19 के मामले में इस पर 18 क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं. इनमें से कई स्टडीज के सकारात्मक परिणाम आए. ग्लेनमार्क के मुताबिक कोरोना के मरीजों के इलाज के दौरान 88 प्रतिशत मरीजों में इससे फायदा दिखा. लगभग चार दिनों के भीतर उनका वायरल लोड यानी शरीर में वायरस की संख्या में काफी कमी आई.

कोरोना का ग्लोबल आंकड़ा 90 लाख पार कर चुका है. (Photo-pixabay)




कंपनी ग्लेनमार्क ने 20 जून को दवा के बारे में प्रेस वार्ता करते हुए चार क्लिनिकल ट्रायल्स का हवाला दिया. इनमें से 2 ट्रायल चीन में, एक रूस में और एक जापान का है. चीन की एक स्टडी में 80 मरीज लिए गए, जिन पर इनके असर की स्टडी की गई. साथ में दूसरी दवाओं जैसे Lopinavir भी एक ग्रुप को दी गई. तुलनात्मक अध्ययन में साफ दिख रहा था कि जिन मरीजों को फैबिफ्लू दिया जा रहा था, उनमें वायरल लोड तेजी से घटा. इससे मरीज जल्दी रिकवर कर जाता है. चीन की ही एक दूसरी स्टडी में 236 मरीज शामिल थे. इनमें भी दवा का अच्छा असर दिखा. वहीं जापान में मरीज के बड़े ग्रुप पर भी समान नतीजे दिख. वहां 2,141 मरीजों पर दवा की स्टडी हुई. ये सभी मरीज माइल्ड से लेकर औसत लक्षण वाले थे.
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दवा को FabiFlu ब्रांड नाम दिया गया है जो गोली के फॉर्म में दी जाएगी. फैबिफ्लू को कोरोना के हल्के और औसत लक्षण वाले मरीजों पर ही इस्तेमाल किया जाएगा. गंभीर मरीज इसके दायरे से बाहर रहेंगे. साथ ही ये भी तय हुआ है कि अगर मरीज इस दवा से इलाज के लिए मंजूरी दे, तभी उसका इलाज होगा.

फैबिफ्लू को कोरोना के हल्के और औसत लक्षण वाले मरीजों पर ही इस्तेमाल किया जाएगा. (Photo-moneycontrol)


इसी तरह से एक दवा कंपनी हेटेरो कोरोना वायरस के लिए कोविफोर दवा लॉन्च करने वाली है. ये दवा रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन है. ये वही दवा है जो साल 2014 में इबोला के इलाज के लिए बनाई गई थी. कोविफोर गोली की बजाए इंट्रावेनस तरीके से काम करती है यानी ये नसों से दी जाएगी. दवा कंपनी हेटेरो का कहना है कि इसका एक वायल 5000 से 6000 रुपये तक का होगा. इस तरह से पांच दिनों तक चलने वाले इलाज का खर्च 30 हजार के लगभग होगा.

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तीसरी दवा सिप्रमी है, जो रेमडेसिवीर का ही जेनेरिक अवतार होगा. दवा कंपनी सिप्ला इस पर काम कर रही है. फिलहाल इसकी कीमत के बारे में कंपनी ने कोई भी खुलासा नहीं किया है. चूंकि ये दवाएं कोरोना वायरस का पक्का इलाज नहीं हैं इसलिए इनके इस्तेमाल को खास तरीके से और कुछ ही मामलों में किया जाएगा. DCGI के मुताबिक रेमडेसिवीर दवाएं फिलहाल “restricted emergency use” के लिए ही सुरक्षित रहेंगी. यानी अगर मरीज को इस दवा के बारे में पूरी जानकारी दी जाए और इसके बाद वो इनसे इलाज की सहमति दे तो ही मरीज पर इनका इस्तेमाल होगा. मरीज नाबालिग होने पर पेरेंट्स या अभिभावक कंसेंट फार्म पर अनुमति देंगे.

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दवाओं के साथ कई और बाध्यताएं भी हैं. यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने 'Clinical Management Protocols for COVID-19' में साफ किया है कि रेमडेसिवीर श्रेणी की दवाएं किडनी के मरीजों, लिवर के मरीजों, गर्भवती या ब्रेस्टफीड कराती मांओं या फिर 12 साल के कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जा सकती हैं.
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