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कोरोना वायरस: चीन से ऐसे एयरलिफ्ट किए गए 647 भारतीय, 96 घंटे चला ऑपरेशन

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 10:27 AM IST
कोरोना वायरस: चीन से ऐसे एयरलिफ्ट किए गए 647 भारतीय, 96 घंटे चला ऑपरेशन
96 घंटे चला चीन में फंसे भारतीयों को वापस लाने का ऑपरेशन

चीन (China) के हुबेई (Hubei) प्रांत और उसकी राजधानी वुहान (Wuhan) में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने बीजिंग (Beijing) की मदद से बड़ा ऑपरेशन चलाया.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 10:27 AM IST
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चीन (China) से फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर अब भी जारी है. चीन में इस वायरस की चपेट में आकर मरने वालों का आंकड़ा 500 के पास पहुंच गया है. भारत में भी इस वायरस के संक्रमित मरीज मिले हैं. इस बीच भारत ने चीन के वुहान में फंसे अपने नागरिकों को वहां से निकाल लाने में कामयाबी पाई है.

चीन के हुबेई प्रांत और उसकी राजधानी वुहान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने बीजिंग की मदद से बड़ा ऑपरेशन चलाया. वुहान से ही कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला है. वुहान में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले कई भारतीय स्टूडेंट्स फंसे थे. जब कोरोना वायरस का कहर वुहान में फैला तो समूचा शहर लॉक डाउन हो गया. वुहान में रहने वाले भारतीय भी घरों में कैद होकर रह गए. भारत सरकार ने वुहान में फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट करने का फैसला किया. एयर इंडिया के दो फ्लाइट्स से सभी भारतीयों को वुहान से वापस भारत लाया गया.

96 घंटे चला भारतीयों को वुहान से एयरलिफ्ट करने का ऑपरेशन
चीन के वुहान से 654 लोगों को बाहर निकाला गया. इसमें 647 भारत के नागरिक थे और 7 लोग मालदीव के रहने वाले थे. इनलोगों को वहां से बाहर निकालने के लिए 96 घंटे का ऑपरेशन चला. इस ऑपरेशन में भारत सरकार और बीजिंग के बीच कई स्तर पर कार्रवाई की गई. हेल्थ रिस्क से लेकर लॉजिस्टिक सपोर्ट को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन को संवेदनशीलता से अंजाम दिया गया. भारत सरकार ने वुहान से सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी में कामयाबी पाई.

कैसे चला भारतीयों को एयरलिफ्ट करने का ऑपरेशन
पहली बार 2-3 जनवरी को बीजिंग दूतावास ने कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की बात मानी. लेकिन इसकी गंभीरता समझने में कई दिन लग गए. 20 जनवरी तक कोरोना वायरस का संक्रमण चीन की मीडिया में छा गया. 22 जनवरी तक इस वायरस की वजह से 17 मौतों की पुष्टि हुई, वायरस के संक्रमण वाले 571 मामले पाए गए.

इसी के बाद बीजिंग में भारतीय दूतावास हरकत में आया. चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने अपनी टीम को तैयारी करने के लिए कहा गया. इसी बीच 26 जनवरी का गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम आ गया. इस दौरान भारतीय दूतावास में आए चीनी अधिकारियों से वुहान में फंसे भारतीयों को बाहर निकालने को लेकर बातचीत हुई.
coronavirus outbreak know how 647 indians airlifted from wuhan china operation lasted 96 hours
दो बार में एयरलिफ्ट किए गए भारतीय


ऑपरेशन में आई कई तरह की मुश्किलें
चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान से कोरोना वायरस फैला था. इस बीच सबसे बड़ी मुश्किल ये थी कि भारतीय दूतावास को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि हुबेई प्रांत में कितने भारतीय रहते हैं. दूतावास ने सोशल मीडिया के सहारे हुबेई और वुहान में रहने वाले भारतीयों से संपर्क साधना शुरू किया. लेकिन इसमें एक मुश्किल ये थी कि चीन में फेसबुक और ट्विटर दोनों बैन हैं. दूतावास के अधिकारियों ने वीचैट का सहारा लिया. चीन का ये सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया ऐप है.

कोरोना वायरस को लेकर भारतीयों में फैली थी बेचैनी
कोरोना वायरस को लेकर भारतीयों के बीच बेचैनी फैले थे. अपने घरों से दूर भारतीय इस नए हेल्थ रिस्क को लेकर परेशान थे. सबसे पहले भारतीय दूतावास ने उन्हें सायकोलॉजिकल सपोर्ट देना शुरू किया. उन्हें बीमारी को लेकर जानकारी दी. खाने-पीने, पानी और मेडिसीन की समस्या दूर की.

इस बीच भारतीय दूतावास ने ये पता लगा लिया कि हुबेई में करीब 750 भारतीय रहते हैं. इनमें आधे लोग वुहान और उसके आसपास के इलाकों में रहते हैं.

सबसे बड़ी मुश्किल ये थी कि कोरोना वायरस के असर वाले इलाकों को बंद कर दिया गया था. वहां ट्रेन से लेकर एयर ट्रैवल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कर दिया गया था. सवाल था कि वुहान में फंसे को भारतीयों को एयरपोर्ट तक कैसे लाया जाए?

भारतीयों को बाहर निकालने का मिशन आसान नहीं था
भारतीयों को एयरपोर्ट तक लाने के लिए दूतावास ने प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कंपनियों का सहारा लिया. उनका कहना था कि भारतीयों को एयरपोर्ट तक लाने के लिए उन्हें स्पेशल परमिशन की जरूरत पड़ेगी. शुरुआत में चीनी प्रशासन भारतीयों को वहां से बाहर निकलवाने को लेकर तैयार नहीं था. 28 जनवरी को चीनी प्रशासन ने कहा कि हालात कंट्रोल में हैं और ज्यादा पैनिक की जरूरत नहीं है.

हालांकि 29 जनवरी तक चीन अपने यहां फंसे भारतीयों को बाहर निकलवाने में सहयोग देने को तैयार हो गया. चीन के विदेश मंत्रालयल ने हुबेई प्रांत के प्रशासन से संपर्क किया. इसके बाद मेडिकल यूनिवर्सिटी और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कंपनी से भी संपर्क साधा गया.

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केरल में कोरोना वायरस को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है


दो बार में भारतीयों को वुहान से एयरलिफ्ट करने पर बनी सहमति
चीन में फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी हो चुकी थी. दो बार में उन्हें वहां से बाहर निकाला जाना था. चीनी प्रशासन की शर्त थी कि अगर किसी भारतीय में बुखार के लक्षण पाए गए तो उसे वापस जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.

सबसे पहले वुहान और उसके आसपास के इलाकों में रहने वालों भारतीयों को निकाला गया. 18 से 20 गाड़ियों में वुहान के 20 अलग-अलग जगहों से भारतीयों को वुहान एयरपोर्ट पर लाया गया. दूतावास के 40 कर्मचारी और चीन के स्टाफ 96 घंटे तक बिना रुके भारतीयों को बाहर निकालने के मिशन में जुटे रहे.

31 जनवरी को दोपहर 3.30 बजे एयर इंडिया की पहली फ्लाइट वुहान के लिए रवाना हुई. इस विमान ने वुहान एयरपोर्ट पर 8 बजे शाम को लैंड किया. 1 फरवरी सुबह 4 बजे इस विमान के जरिए 324 भारतीयों की वापसी हुई.

दूसरी बार हुबेई के अलग-अलग 15 लोकेशन से भारतीयों को वुहान एयरपोर्ट पर इकट्ठा किया गया. 1 फरवरी दोपहर को एयर इंडिया की दूसरी फ्लाइट ने वुहान के लिए उड़ान भरी. शाम 8 बजे वुहान एयरपोर्ट पर फ्लाइट ने लैंड किया. 2 फरवरी की सुबह 6 बजे 323 भारतीयों और 7 मालदीव के नागरिकों को लेकर ये विमान वापस लौटा. ये पूरा मिशन काफी चुनौतीपूर्ण था. जिसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया.

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First published: February 5, 2020, 10:14 AM IST
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