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कोराना वायरस: क्या होती है WHO की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, भारत की कैसी है तैयारी

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Updated: January 31, 2020, 9:49 AM IST
कोराना वायरस: क्या होती है WHO की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी, भारत की कैसी है तैयारी
कोरोना वायरस को लेकर WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की है.

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (Global Health Emergency) को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी कहा जाता है. WHO किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करती है, जब उस बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा पैदा हो जाता है.

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  • Last Updated: January 31, 2020, 9:49 AM IST
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के देखकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (Global Health Emergency) घोषित कर दी है. कोरोना वायरस की वजह से चीन (China) में अब तक दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वायरस के संक्रमण के दो हजार नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही कई देशों में करोना वायरस से संक्रमित मरीज मिले हैं.

भारत के केरल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज की पहचान की गई है. दिल्ली में भी इस वायरस से संक्रमित संदिग्ध मरीज पाए गए हैं. कोराना वायरस को फैलने से रोकन के लिए चीन के कई शहर लॉक डाउन हैं. इन शहरों के लोग संक्रमण से बचने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं. कोराना वायरस को फैलने से रोकने के लिए चीन की सरकार भी कदम उठा रही है.

क्या होती है ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी कहा जाता है. WHO किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करती है, जब उस बीमारी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा पैदा हो जाता है. कोरोना वायरस के मामले में यही हुआ है. कोराना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए WHO ने आपात बैठक बुलाई थी. इस बैठक में कोरोना वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का फैसला लिया गया.



WHO किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करती है, जब इसकी रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस होती है. ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के हालात में दुनियाभर के देशों को उस बीमारी से बचाव और उसे फैलने से रोकने के उपाय करने होते हैं.

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चीन में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है.


ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी में क्या कदम उठाने होते हैं?
ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के हालात में दुनियाभर के देशों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन कई तरह के कदम उठाती है. इसके लिए WHO के पास आकस्मिक फंड होता है, जिसका इस्तेमाल प्रभावित इलाकों में किया जाता है. फिलहाल WHO के पास कोरोना वायरस से निपटने के लिए 1.8 मिलियन डॉलर का फंड है. ये पैसा दुनिया के कई देशों से आया है. यूके ने पिछले साल सबसे ज्यादा 11 मिलियन यूएस डॉलर की रकम WHO को दी थी.कोराना वायरस के बढ़ते हुए मामलों को देखकर WHO को इससे निपटने के लिए और भी फंड दिया जा सकता है.

WHO के सभी 196 सदस्य देश इसके नियम कायदों से बंधे होते हैं. ऐसी स्थिति में उन्हें WHO के बताए गए गाइडलाइन को फॉलो करना होता है. मल्टी डायरेक्शनल रिस्पॉन्स के जरिए संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोका जाता है.

WHO के गाइडलाइन में कई तरह के निर्देश जारी किए जा सकते हैं. इसमें ट्रैवल को लेकर नियम कायदे भी शामिल हैं. प्रभावित इलाकों में सफर को लेकर WHO विशेष गाइडलाइन जारी करती है. प्रभावित इलाकों के बॉर्डर एरिया और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर लोगों को स्क्रीनिंग की जाती है, ताकि वायरस के असर वाले लोगों की पहचान करके उनके अलग रहने की व्यवस्था की जाए.

WHO आमतौर पर ट्रैवल पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाती. संस्था की कोशिश होती है कि इंटरनेशनल ट्रैवल में नॉर्मल हालात बनी रहे.

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सरकार चीनी शहर वुहान से भारतीयों को निकालने की तैयारी कर रही है


क्या इसके पहले हेल्थ इमरजेंसी घोषित हुई है?
WHO कई मौकों पर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुकी है. यहां तक कि इस वक्त एकसाथ दो ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी चल रही है. जुलाई 2019 में पूर्वी अफ्रीका से इबोला वायरस के फैलने पर WHO ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है. इस वायरस की चपेट में आकर अब तक 3 हजार लोगों की जान जा चुकी है.

पोलियो, जिसे एक वक्त में खत्म हुआ मान लिया गया था. वो अब दोबारा वापस लौट आया है. WHO ने इसको लेकर भी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है.

कोरोना वायरस से निपटने की भारत की कैसी है तैयारी
भारत में केरल में कोराना वायरस के पहले मरीज की पहचान की गई है. दिल्ली में भी इसके कुछ संदिग्ध मरीज मिले हैं. देश के करीब 21 एयरपोर्ट्स पर चीन और हॉन्गकॉन्ग से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है. करीब 100 और स्कैनर भारतीय एयरपोर्ट्स पर लगाए जा रहे हैं.

इसके साथ ही चीन में फंसे भारतीयों को निकालने की तैयारी भी की जा चुकी है. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि शुक्रवार को चीन के वुहान शहर में फंसे भारतीय छात्रों को वहां से निकाला जाएगा. जिन भारतीयों ने वहां से निकलने पर सहमति दी है, उसे लाने के लिए एयर इंडिया का एक प्लेन शुक्रवार को वुहान शहर पहुंचेगा. इसके बाद एक दूसरे प्लेन से हुबेई प्रांत में फंसे बाकी भारतीयों को निकाला जाएगा.

पहले फ्लाइट से भारत वापसी के लिए विदेश मंत्रालय की लिस्ट में करीब 374 छात्र हैं. वहां से निकालने से पहले छात्रों का मेडिकल चेकअप भी किया जाएगा. उन छात्रों को विदेश मंत्रालय ने अपने साथ मास्क, ग्लोव्स, टिश्यू पेपर और हैंड सैनेटाइजर, खाने-पीने और पानी की बोतल जैसी चीजें साथ रखने की सलाह दी है. छात्रों को शॉर्ट नोटिस पर वहां से निकलने के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

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First published: January 31, 2020, 9:49 AM IST
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