• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • 1980 से इस्‍तेमाल हो रही जुंए मारने की दवा से 48 घंटे में हो सकता है कोरोना वायरस का इलाज!

1980 से इस्‍तेमाल हो रही जुंए मारने की दवा से 48 घंटे में हो सकता है कोरोना वायरस का इलाज!

इस पत्र में रेमडेसिवीर दवा के लिए गीलिड साइंसेज को दिए गए पेटेंट रद्द करने की मांग की गई है. पत्र में कहा गया है कि पेटेंट कद्द होने से इस दवा को वैश्विक स्तर पर कोरोना के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकेगा. खासकर गरीब देशों में भी यह दवा भेजी जा सकेगी.

इस पत्र में रेमडेसिवीर दवा के लिए गीलिड साइंसेज को दिए गए पेटेंट रद्द करने की मांग की गई है. पत्र में कहा गया है कि पेटेंट कद्द होने से इस दवा को वैश्विक स्तर पर कोरोना के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकेगा. खासकर गरीब देशों में भी यह दवा भेजी जा सकेगी.

दुनियाभर के वैज्ञानिक इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) का इलाज ढूंढने में जुटे हुए हैं. बावजूद इसके अब तक कोई भी इसका कारगर इलाज (Proper Treatment) नहीं ढूंढ पाया है. हालांकि, ऑस्‍ट्रेलिया (Australia) के एक शोधकर्ता ने कोरोना वायरस के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है.

  • Share this:
    चीन से निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) दुनिया भर में अब तक 16 लाख से ज्‍यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है. इनमें 95 हजार से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में दुनियाभर के वैज्ञानिक दिनरात इस वायरस का इलाज ढूंढने में जुटे हैं. हालांकि, अब तक कोई भी शोधकर्ता COVID-19 के मरीजों को ठीक करने वाला कारगर इलाज (Treatment) नहीं ढूंढ पाया है. इस बीच ऑस्‍ट्रेलिया (Australia) की एक शोधकर्ता ने कोरोना वायरस के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है.

    शोधकर्ता ने दावा किया है कि जुंए मारने की दवा (Lice Drug) का इस्‍तेमाल कर मरीज को महज 48 घंटे में स्‍वस्‍थ्‍य किया जा सकता है. शोधकर्ता का कहना है कि अभी इस दवा पर आगे का शोध किया जाना बाकी है. लिहाजा, अभी कोरोना वायरस मरीजों पर इसका इस्‍तेमाल ना किया जाए. इस दवा के सेवन के कई गंभीर साइड इफेक्‍ट भी हैं.

    इवरमेक्टिन से 24 घंटे में मरना शुरू हो जाते हैं शरीर में मौजूद वायरस
    ऑस्ट्रेलिया में एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि बालों में पाए जाने वाले जुंए को मारने के लिए इस्‍तेमाल की जाने वाली इवरमेक्टिन (Ivermectin) से संक्रमित व्‍यक्ति को ठीक किया जा सकता है. 'द सन' की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्‍ट्रेलिया के बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टिट्यूट की डॉ. कायली वागस्टाफ ने जुंए मारने की दवा से सिर्फ 48 घंटों में कोरोना को पूरी तरह खत्म कर लिया है.

    डॉ. वागस्टाफ का कहना है कि इस दवा की एक डोज से ही कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है.


    डॉ. वागस्टाफ का कहना है कि जुंए मारने की दवा में इवरमेक्टिन रसायन का इस्तेमाल किया जाता है. इस दवा की एक डोज से ही कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है. इतना ही नहीं इस दवा की मदद से इलाज शुरू होने के 24 घंटे के भीतर ही शरीर में मौजूद कोरोना वायरस खत्म होना शुरू हो जाता है. उनके इस शोध को ऑस्‍ट्रेलिया की एंटीवायरल रिसर्च पत्रिका में भी प्रकाशित किया जा चुका है.

    लोशन, क्रीम और टेबलेट के तौर पर 1980 से किया जा रहा इस्‍तेमाल
    डॉ. वागस्टाफ ने बताया कि मौजूदा समय में इस महामारी का कोई इलाज नहीं है. ऐसे में जब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं बन जाती, तब तक इसका इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जा सकता है. उनका कहना है कि एंटी-पैरासाइटिक दवा इवरमेक्टिन परजीवियों से होने वाली बीमारियों को खत्म कर सकती है. कई परजीवी रोधी (Anti-Parasite) दवाइयों का इस्तेमाल एचआइवी, डेंगू, इंफ्लुएंजा और जीका वायरस के इलाज में भी किया जा चुका है. उनके नतीजे भी काफी अच्‍छे आए हैं.

    डॉ. वागस्टाफ कहती हैं कि नई दवा नहीं मिलने तक हम पहले से मौजूद दवाइयों का मिश्रण बनाकर इलाज कर सकते हैं. इवरमेक्टिन केमिकल का इस्‍तेमाल बालों के जुंए मारने के लिए बनाए जाने वाले लोशन और क्रीम में 1980 से किया जाता है. इसके अलावा गोलकृमि संक्रमण (Roundworm Infection) के इलाज में टेबलेट के तौर पर भी इसका इस्‍तेमाल किया जाता रहा है. वहीं, स्‍कैबीज जैसे त्‍वचा रोगों के इलाज में भी इसका इस्‍तेमाल होता है.

    शोधकर्ता का कहना है कि अभी कोरोना वायरस मरीजों पर इसका इस्‍तेमाल ना किया जाए.
    शोधकर्ता का कहना है कि अभी कोरोना वायरस मरीजों पर इसका इस्‍तेमाल ना किया जाए.


    चेतावनी: इवरमेक्टिन दवा शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान
    कोरोना वायरस को लेकर ऐसे प्रयोग (Experiments) दुनियाभर में चल रहे हैं. दुनियाभर की सरकारों की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि ऐसे किसी प्रयोग के आधार पर खुद नतीजे ना निकालें और ना ही अपने मन से कोई दवा का सेवन करें. खासतौर पर कोरोना वायरस के मामले में कोई भी दवा डॉक्टर की बिना सलाह के ना लें. इवरमेक्टिन के सेवन से थकान, कमजोरी, पेट दर्द, उलटियां, डायरिया, खुजली जैसी समस्‍या हो सकती है. इसके अलावा इसके सेवन से आंखों में इंफेक्‍शन भी हो सकता है.

    दवा के गलत इस्‍तेमाल से शरीर में सूजन, जोडों में दर्द और तेज बुखार भी हो सकता है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दवा के गंभीर साइड इफेक्‍ट भी हो सकते हैं. इनमें लो ब्‍लडप्रेशर, सूंघने की क्षमता खत्‍म होना और लिवर डैमेज शामिल हैं. डॉ. वागस्टाफ ने भी कहा है कि अभी इस दवा का क्‍लीनिकल परीक्षण किया जाना बाकी है. इसलिए कोरोना वायरस के मरीजों पर तुरंत इसका इस्‍तेमाल शुरू नहीं किया जाए.

    ये भी देखें:

    Coronavirus: जानें महाराष्‍ट्र में इसलिए बदतर होते चले गए हालात

    ICMR की रिपोर्ट: भारत में बिना संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए भी फैल रहा है कोरोना वायरस

    धरती पर मंडराया एक और बडा खतरा, ओजोन परत में बडा छेद, हो सकता है नुकसान

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज